Connect with us

Heart Care

हार्ट अटैक पड़ने के बाद ना करें ये गल्‍तियां

Published

on

हार्ट अटैक पड़ने के बाद ना करें ये गल्‍तियां 

हार्ट अटैक; ये दो शब्‍द ही किसी इंसान को डराने के लिए पर्याप्‍त हैं। हर किसी को भय रहता है कि कहीं वह दिल की बीमारी से ग्रसित न हो जाये। अस्‍वस्‍थ जीवनशैली के कारण दिल के रोगों का खतरा ज्‍यादा बना रहता है।

हार्ट अटैक या कार्डिक अरेस्‍ट तब होता है जब हद्य तक पहुँचने वाले रक्‍त में बाधा पहुँचती है और धमनियों में रक्‍त के थक्‍के जमा हो जाते हैं, जिसकी वजह से पूरे शरीर के रक्‍तसंचार पर प्रभाव पड़ता है।

साथ ही हद्य की मांसपेशियों को पर्याप्‍त मात्रा में ऑक्‍सीजन नहीं मिल पाती है और वो क्षतिग्रस्‍त हो जाती है। यह बेहद घातक स्थिति होती है।

अगर किसी व्‍यक्ति को हद्य रोग होता है या हाल ही में दिल का दौरा पड़ा होता है तो उसके शरीर में तेजी से रिकवरी होती है ऐसे में उसे अपने स्‍वास्‍थ्‍य के प्रति सचेत रहने की आवश्‍यकता होती है और जीवनशैली में अच्‍छा सुधार लाने की आवश्‍यकता होती है।

हार्ट अटैक पड़ने वाले रोगी को शारीरिक और मानसिक रूप से स्‍वस्‍थ रहना बेहद आवश्‍यक होता है। उसे अवसाद, तनाव, थकान आदि से दूर रहना चाहिए और इन 10 बातों पर विशेष ध्‍यान देना चाहिए, जोकि निम्‍न प्रकार है:

oldveda-old-veda-logo-banner-health-lifestyle-ayurveda1

1. धूम्रपान – अगर धूम्रपान करते हैं तो उसे छोड़ना ही आपके लिए हितकर होगा। इसके लिए आपको शुरूआत में काफी दिक्‍कतों का सामना करना पड़ेगा लेकिन आप दृढ़ रहें और इस पहले कदम से ही अपने स्‍वास्‍थ्‍य के प्रति सचेत हो जाएं। धूम्रपान करने से दिल की धमनियों में रक्‍त के प्रवाह पर सीधा प्रभाव पड़ता है।

2. संतृप्‍त/ट्रांस फैट से बचें – भोजन में कम से कम ऑयल, डालडा या घी आदि का इस्‍तेमाल करें। संतृत्‍त वसा या ट्रांस फैट के सेवन से बचें। ज्‍यादा वसा का सेवन करने से वह वसा धमनियों के ऊपर एक परत के रूप में जम जाता है और रक्‍त के प्रवाह पर असर डालता है।

3. शक्‍कर, पेस्‍ट्री, मिठाई , चॉकलेट आदि का सेवन न करें – हार्ट अटैक के बाद सुगर पेस्‍ट्री, मिठाई, चॉकलेट आदि का सेवन कतई न करें। इसके सेवन शरीर में कोलेस्‍ट्रॉल का स्‍तर बहुत बढ़ सकता है और खून में इसकी बढोत्‍तरी खतरे का कारण बन सकती है। परिणामस्‍वरूप, रक्‍त के थक्‍के या रक्‍त का गाढापन हो सकता है जो जानलेवा होता है।

4. नमक की अधिकता – अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन लोगों को सलाह देता है कि हार्ट अटैक का खतरा उन लोगों में अधिक होता है जो नमक को ज्‍यादा मात्रा में लेते हैं यानि एक दिन में 1500 मिग्रा. से अधिक नमक का सेवन नुकसानदायक हो सकता है। ऐेसे में भोजन में नमक की मात्रा संतुलित रखनी चाहिए।

5. कोलेस्‍ट्रॉल बढ़ाने वाली खाद्य सामग्री से दूरी बनाएं – टिक्‍की चाट पकौडा सभी में काफी मात्रा में फैट होता है जो कोलेस्‍ट्रॉल को काफी हद तक बढ़ा सकता है ऐसे में इन चीजों से दूरी बनाएं रखना बेहद आवश्‍यक होता है।

6. शारीरिक गतिविधियों को नकारना सही नहीं – हार्ट अटैक के बाद बिस्‍तर पर न पड़ जाएं। आराम से टहलें और कुछ समय बाद शारीरिक गतिविधियों पर विशेष ध्‍यान दें। साइकिल चलाएं, टहलें या तैराकी करें। इससे आपका शरीर फिट रहेगा और शरीर में रक्‍त का संचार अच्‍छी तरह होगा।

7. वजन बढ़ने से रोकना – हार्ट अटैके बाद अपने शरीर पर पूरा ध्‍यान दें, खान-पान का विशेष ख्‍याल रखें ताकि आपका वजन बढ़ न पाएं। वजन बढ़ने से शरीर में फैट और मोटापा आ जाता है जिसकी वजह से हद्य में अन्‍य बीमारियों होने की शंका बनी रहती है। व्‍यक्ति का बॉडी मॉस इंडेक्‍स (बीएमआई), 18.5 और 24.9 के बीच होना चाहिए।

8. अन्‍य स्‍वास्‍थ स्थितियों को नकार देना – कई बार हार्ट अटैक बाद लोग अन्‍य समस्‍याओं को नकार देते हैं ऐसा न करें। मधुमेह, हाइपरटेंशन, हाइपोथॉयरोडिज्‍म, अवसाद, हाइपरथॉयरोडिज्‍म आदि का भी ध्‍यान में रखें और अपना सही उपचार करवाएं। अपनी दिनचर्या और दैनिक कार्यों को इस प्रकार बनाएं कि आपके शरीर में मोटापा न आने पाएं। मोटापा ही इन सभी बीमारियों की मुख्‍य जड़ होता है। साथ ही प्रतिदिन अपनी दवाईयां का सेवन करें; उन्‍हें खाना कभी न भूलें।

9. उच्‍च रक्‍तचाप – अमेरिकन हार्ट एसो‍सिएशन ने बताया है कि हार्ट अटैक का खतरा सबसे ज्‍यादा उच्‍च रक्‍तचाप से होता है। तनाव, ज्‍यादा व्‍यायाम करने या तनाव आदि होने से भी उच्‍च रक्‍तचाप हो जाता है जो कि दिल के लिए खतरा बन सकता है।

10. लक्षणों को नकारना – अगर हार्ट अटैक के बाद रिकवरी के दौरान बहुत ज्‍यादा थकान, छाती में दर्द, बहुत ज्‍यादा पसीना आता है या पैरों में सूजन हो जाती है तो ऐेसे लक्षणों को नकारें नहीं। अपने स्‍वास्‍थ्‍य के प्रति सचेत रहें।


Body Care

डायबिटीज के पक्के ईलाज ! ईलाज नंबर 4 और 7 की तो सौ फीसदी गारंटी है

Published

on

By

आजकल शुगर ने महामारी का रूप धारण कर लिया है. जिससे पूरी दुनिया परेशान है पर हम आयुर्वेद में कुछ तरीकों और उपायों द्वारा इसपर काबू पा सकते हैं डायबिटीज खून में शक्कर की मात्रा अधिक होने के कारण होता है.

आइए हम आपको बताते हैं डायबिटीज के ईलाज के बारे में जिससे आप फिर कभी शुगर से परेशान नहीं होंगे.

 

1. जीवनशैली में बदलाव, शिक्षा खान—पान की आदतों में सुधार करके शुगर को नियंत्रित किया जा सकता है. इससे मरीज की थकान और सिरदर्द समस्या हमेशा के लिए दूर हो जाती है.

2. प्रतिदिन सुबह योगा व व्यायाम करके भी शुगर को कंट्रोल किया जा सकता है. इससे न केवल आपके चेहरे का नूर दमकेगा, बल्कि आपके स्वास्थ्य में भी सुधार होगा.

3. अगर शुगर कंट्रोल में नहीं आ रहा है तो केवल गेहूं की रोटी नहीं खानी चाहिए. इसके बजाय तीन किलो जौ, आधा किलो गेहूं और आधा किलो चने को मिला कर आटा पिसवा लेना चाहिए और फिर इसकी रोटी खानी चाहिए.

sugar-aak

4. आक के पेड़ का पता उल्टी तरफ से लेकर पैर पर बांधे रखें. रात को सिर्फ सोते वक़्त इसको हटायें. एक सप्ताह तक यह प्रयोग करें, आपकी शुगर जड़ से खत्म हो जाएगी.

5. हरी सब्जी, दाल, दही का सेवन अधिक करना चाहिए. करेले की सब्जी या कच्चा करेला और जामुन खाना चाहिए. कई बार तो जामुन के पत्तों का जूस भी शुगर में लाभकारी होता है.


Continue Reading

Heart Care

आयुर्वेदिक उपचार: हार्ट ब्‍लॉकेज खोलने के लिये असदार दवा

Published

on

हमारे शरीर का अनमोल अंग हृदय है, जो 24 घंटे अपने काम में लगा रहता है। लेकिन हमारी खराब लाइफस्‍टाइल और गलत खान-पान के तरीको की वजह से हार्ट ब्‍लॉकेज काफी आम समस्‍या बनती हुई नज़र आ रही है।

अगर हृदय की नलियों में ब्‍लॉकेज होना शुरु हो रहा है तो इसका साफ मतलब है कि रक्‍त में एसिडिटी बढ़ गई है। एसिडिटी भी दो प्रकार की होती है जिसमें एक तो पेट की एसिडिटी होती है और दूसरी रक्‍त की।

हृदय की नलियां ब्‍लॉक होने से हार्ट अटैक होता है इसलिये आज हम आपको आयुर्वेदिक उपचार बताने वाले हैं जो काफी सरल है। जब रक्‍त में अमलता एसिडिटी बढ़ जाती है, तो आप ऐसी चीजों का उपयोग करें जो छारीय होती हैं। छारीय चीज़ें खाने से रक्‍त में बढ़ी एसिडिटी कम हो जाती है और आप हार्ट ब्‍लॉकेज से हमेशा के लिये बचे रह सकते हैं।

हार्ट ब्‍लॉकेज खोलने के लिये असदार दवा

लौकी का जूस पीयिजे और हार्ट हटैक से बचिये लौकी सभी सब्‍जियों में सबसे ज्‍यादा छारीय होती है। इसका एक गिलास जूस रोज पियें या फिर कच्‍ची लौकी रोजाना खाएं।

30-1462017246-bottle-gourd

कितनी मात्रा में पीना है? रोजाना 200 से 300 ml पियें

30-1462017313-14-1421211548-23bottle-gourd-juice

कब पियें? लौकी का जूस सुबह शौच जाने के बाद पियें, जब पेट बिल्‍कुल खाली हो जाता है। या फिर इसे नाश्‍ते के आधे घंटे के बाद भी पी सकते हैं।

30-1462017335-18-bottlegourd

लौकी के जूस को और अधिक छारीय बनाने का तरीका लौकी के जूस में आप पुदीने या तुलसी की 7-10 पत्‍तियां मिला कर पी सकते हैं। इसके अलावा सेंधाया काला नमक भी मिला सकते हैं। लौकी के जूस में बाजार में बिकने वाला आयोडीन युक्‍त नमक ना मिलाएं।

30-1462017374-tulsi-basil-leaves

क्‍या बरतें सावधानी लौकी जूस के उपयोग में थोड़ी सावधानी बरतें। अगर कोई व्‍यक्‍ति लौकी का जूस पीता है तो जूस बनाने से पहले लौकी के टुकड़े काट कर उसे चखना चाहिये। अगर इसका स्वाद कड़वा है तो उस लौकी का जूस नहीं पीना चाहिए। इसके अलावा लौकी के जूस को किसी अन्य जूस के साथ नहीं मिलाना चाहिए।

30-1462017452-16-1444974773-arjun-tree

अर्जुन की छाल अर्जुन के पेड़ की छाल बड़ी ही आसानी से मिल जाती है। 2 चम्‍मच अर्जुन की छाल को 1 गिलास गर्म पानी में डाल कर आधा होने तक उबालें। फिर इसे ठंडा कर के दिन में दो बार पियें। इसे खाली पेट पीना चाहिये।

30-1462017482-05-heart

कब तक करना है प्रयोग लौकी का जूस या फिर अर्जुन की छाल को 2-3 महीने तक प्रयोग करना चाहिये। इनको पीने से आपको कुछ ही दिनों में असर दिखाई देना शुरु हो जाएगा।


Continue Reading

Heart Care

मानव शरीर के जेनेटिक स्ट्रक्चर में बदलाव से हो सकता है दिल की बीमारी का खतरा

Published

on

heart-650_650x488_71450251562नई दिल्ली: वैज्ञानिकों ने जेनेटिक स्ट्रक्चर में होने वाले ऐसे परिवर्तन पर अध्ययन किया है, जो मांसपेशियों और दिल के विकारों के लिए जिम्मेदार है। लंदन के इम्पीरियल कॉलेज के वैज्ञानिकों ने जेब्रा के समान दिखने वाली एक मछली में डोमेन युक्त ‘पोपाई’ नामक जीन में परिवर्तन का पता लगाया है, जो मांसपेशियों और हृदय के कार्यों को प्रभावित करता है।

ये जीन कुछ ऐसे प्रोटीन का निर्माण करते हैं, जो मांसपेशियों की कोशिकाओं को साथ रखने के लिए महत्वपूर्ण हैं, लेकिन जीन उत्परिवर्तन के वक्त मांसपेशियों की कोशिकाएं कमजोर होकर टूटने लगती हैं।

जीन उत्परिवर्तन को पहली बार इटली के फरारा यूनिवर्सिटी और बीजिंग जियोनॉमिक्स इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिकों ने खोजा था। वैज्ञानिकों ने इटली के एक ऐसे परिवार के जेनेटिक स्ट्रक्चर पर अध्ययन किया था, जिसमें परिवार के सभी सदस्य कुपोषण के रोगी थे। इसके अलावा उन्हें ‘कार्डियक एरीथीमिया’ भी था, जिसमें इंसान की दिल की धड़कनें आसामान्य हो जाती हैं।

अध्ययन के मुख्य लेखक थॉमस ब्रैंड ने बताया, “यह एक विशिष्ट प्रकार के जीन का पहला ऐसा उदाहरण है, जो मांसपेशी और हृदय संबंधी दोनों तरह के रोगों के लिए जिम्मेदार है…” यह शोध ‘क्लीनिकल इन्वेस्टिगेशन’ में प्रकाशित हुआ है।


Continue Reading

Trending