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क्या आप जानते हैं काजू के ये 10 फायदे

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क्या आप जानते हैं काजू के ये 10 फायदे

ड्राई फ्रूट्स में काजू लोग सबसे ज्यादा पसंद करते हैं, आप काजू का इस्तेमाल कई तरीके से करते हैं, चाहे हलवा बनाना हो या खीर या फिर सेवई इसके अलावा काजू को ऐसे भी खाया जा सकता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि काजू के क्या फायदे होते हैं। हम आपको बताते हैं काजू के 10 फायदे।

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-काजू खाने से हमारा वजन नियंत्रित रहता है पर ध्यान रहे कि जरूरत से ज्यादा काजू ना खाएं।

-काजू में भारी मात्रा में प्रोटीन होता है, जो हमारी हड्डियों को मजबूत बनाता है।

-काजू में मौजूद कॉपर हमारे बालों के लिए भी अच्छा होता है।

-काजू खाने से दांत मजबूत होते हैं और चमरकदार भी।

-काजू को रात भर भिगोंकर उसका लेप लगाएं, इससे चेहरे पर चमक आएगी।

-काजू के सेवन से हृदय रोग में आराम मिलता है।

-रिसर्च के मुताबिक अगर आप रोज काजू का इस्तेमाल करते हैं, तो डायबटिज का खतरा कम हो जाता है।

-काजू में सोडियम और पोटैशियम की मात्रा बहुत कम होती है, जिसकी वजह से ब्लड प्रेशर नियंत्रित बना रहता है। 

-काजू में मोनो सेचुरेटेड फैट पाया जाता है। ये दिल को तंदरुस्त रखने का काम करता है। अच्छी बात ये है कि ये कोलेस्ट्रॉल फ्री होता है।

 


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जानें कौन से नट्स से हैं क्या फायदे

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healthy-heart-650x433बादाम: बादाम में मौजूद 65 प्रतिशत मोनोसेचुरेटिड फैट शरीर के बैड कोलेस्ट्रॉल को कम और अच्छे कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाता है। बादाम में विटामिन ई, विटामिन बी  और फाइबर मौजूद होते हैं। कैल्शियम की अच्छी मात्रा होने की वजह से बादाम महिलाओं के लिए बेहद फायदेमंद होते हैं। बादाम को बिना छीले खाना चाहिए, क्योंकि इसके छिलकों में फ्लेवोनॉइड्स नाम का एंटीऑक्सीडेंट होता है, जो हृदय और रक्त धमनियों (arteries) को सुरक्षित रखने में सहायक होता है। बादाम में कार्बोहाइड्रेट की बेहद कम मात्रा होती है।

चेतावनी: ज्य़ादा बादाम खाने से आपको कब्ज़ हो सकती है, इसलिए दिन में 5 बादाम से ज्य़ादा न खाएं।

काजू: काजू को ड्राय फ्रूट्स का राजा भी कहा जाता है। काजू को प्रोटीन, मिनरल सॉल्ट, जिंक, आयरन, फाइबर और मैगनीशियम का अच्छा स्रोत माना जाता है। काजू का सेवन शरीर को ऊर्जा देने के साथ कई बीमारियों से हमारी रक्षा करता है।

चेतावनी: काजू ज्यादा न खाएं। इससे आपको खुश्की और खांसी हो सकती है। ज्यादा काजू खाने से आपको एसिडिटी की दिक्कत हो सकती है।

Walnut-Akhroot-अखरोट: अखरोट में मौजूद फैट और पौष्टिक तत्व शरीर में इंसुलिन की मात्रा को संतुलित रखने में सहायक होते हैं। एग्ज़ीमा और अस्थमा के रोगियों के लिए अखरोट फायदेमंद होता है। अखरोट से टाइप टू डाइबिटीज़ के रोगियों में हृदय रोग की आशंका कम हो जाती है।

चेतावनी: अखरोट को 10 ग्राम से 20 ग्राम मात्रा में ही खाएं। अखरोट गरम व खुश्क प्रकृति का होता है। अखरोट पित्त प्रकृति वालों के लिए हानिकारक होता है।

सूखी अंजीर: सूखी अंजीर भूख को नियंत्रित रखने में मदद करती है। इसमें फाइबर और पोटैशियम की मात्रा ज़्यादा होती है। मोटे लोगों को सूखी अंजीर का सेवन करना चाहिए। यह उनका वज़न कम करने में भी सहायक होती है।

चेतावनी: अंजीर का अधिक सेवन जिगर के लिए हानिकारक हो सकता है। अंजीर गरम होती है, इसलिए 5 दाने से ज्य़ादा न खाएं।

पिस्ता: पिस्ता दिल के रोगियों के लिए बेहद फायदेमंद होता है। यह विटामिन बी-6 का प्रमुख स्रोत है। इसमें विटामिन और खनिज भरपूर मात्रा में होते हैं। डाइटिंग कर रही महिलाओं के लिए पिस्ता फायदेमंद होता है, क्योंकि इससे पेट ज़्यादा देर तक भरा रहता है।

चेतावनी: ज़्यादा पिस्ता खाने से आपको एसिडिटी की दिक्कत हो सकती है। पिस्ते में नमक होने की वजह से ब्लड प्रेशर के मरीजों के लिए ज्यादा नुकसानदायक है।

kashmiri-raisins-kishmishकिशमिश: किशमिश के सेवन से पेट की कब्ज़ दूर होती है। इसे एक बढ़िया एंटीऑक्सीडेंट माना जाता है, जो स्टैमिना बढ़ाता है। किशमिश अल्ज़ाइमर जैसी गंभीर बीमारी से राहत दिलाने में भी उपयोगी साबित हुई है। अल्ज़ाइमर को ‘भूलने वाला रोग’ भी कहते हैं। इसके कारण आपकी याददाश्त कमज़ोर हो जाती है और आप भूलने लगते हैं। बीपी,शुगर और सिर में कई बार चोट लगने से आपको यह दिक्कत हो सकती है।

चेतावनी: किशमिश को भिगोकर खाना ही फायदेमंद होता है।

पीनट्स: पीनट्स में प्रोटीन की भरपूर मात्रा होती है। इसमें एंटीऑक्सीडेंट्स भी होते हैं। अगर पीनट्स को डिब्बे में बंद करके फ्रिज में रखा जाए, तो ये छह महीने तक खराब नहीं होते।

चेतावनी: जिनको अस्थमा की दिक्कत है, वो प्रेग्नेंसी के समय पीनट्स न खाएं। पीनट्स भी गर्म होते हैं। ज्यादा खाने से आपको गर्मी की शिकायत हो सकती है।


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तिल खाने के 9 बेमिसाल फायदे…

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तिल देखने में हैं छोटा मगर इसके गुण हैं अनेक। यह अनेक प्रकार के बीमारियों को दूर रखने में मदद करता है।

 

मकर संक्रांति के अवसर पर तिल के लड्डू की याद सबको आती है मगर क्या आपको पता है कि तिल देखने में तो छोटा लगता है मगर इसके गुण अनेक है। इसलिए सदियों से तिल का इस्तेमाल हर घर के रसोईघर में होता रहा है। तिल सिर्फ खाने में रंग, स्वाद और टेक्सचर ही नहीं लाता है बल्कि यह कई प्रकार से स्वास्थ्य को भी फायदा पहुँचाता है-

बैड कोलेस्ट्रोल को कम करता है- 

तिल में मोनो-सैचुरेटेड फैटी एसिड (mono-unsaturated fatty acid) होता है जो शरीर से बैड कोलेस्ट्रोल को कम करके गुड कोलेस्ट्रोल यानि एच.डी.एल. (HDL) को बढ़ाने में मदद करता है। यह हृदय रोग, दिल का दौरा और धमनीकलाकाठिन्य (atherosclerosis) के संभावना को कम करता है।

कैंसर से सुरक्षा प्रदान करता है-

तिल में सेसमीन (sesamin) नाम का एन्टीऑक्सिडेंट (antioxidant) होता है जो कैंसर के कोशिकाओं को बढ़ने से रोकने के साथ-साथ है और उसके जीवित रहने वाले रसायन के उत्पादन को भी रोकने में मदद करता है। यह फेफड़ों का कैंसर, पेट के कैंसर, ल्यूकेमिया, प्रोस्टेट कैंसर, स्तन कैंसर और अग्नाशय के कैंसर के प्रभाव को कम करने में बहुत मदद करता है।

तनाव को कम करता है-

इसमें नियासिन (niacin) नाम का विटामिन होता है जो तनाव और अवसाद को कम करने में मदद करता है।

हृदय के मांसपेशियों को स्वस्थ रखने में मदद करता है-

तिल में ज़रूरी मिनरल जैसे कैल्सियम, आयरन, मैग्नेशियम, जिन्क, और सेलेनियम होता है जो हृदय के मांसपेशियों को सुचारू रूप से काम करने में मदद करता है और हृदय को नियमित अंतराल में धड़कने में मदद करता है। पढ़े-  अखरोट कैसे दिल को स्वस्थ रखता है?

शिशु के हड्डियों को मजबूती प्रदान करता है-

तिल में डायटरी प्रोटीन और एमिनो एसिड होता है जो बच्चों के हड्डियों के विकसित होने में और मजबूती प्रदान करने में मदद करता है। उदाहरणस्वरूप 100ग्राम तिल में लगभग 18 ग्राम प्रोटीन होता है, जो बच्चों के विकास के लिए बहुत ज़रूरी होता है।

गर्भवती महिला और भ्रूण (foetus) को स्वस्थ रखने में मदद करता है-

तिल में फोलिक एसिड होता है जो गर्भवती महिला और भ्रूण के विकास और स्वस्थ रखने में मदद करता है।

शिशुओं के लिए तेल मालिश के रूप में काम करता है-

अध्ययन के अनुसार तिल के तेल से शिशुओं को मालिश करने पर उनकी मांसपेशियाँ सख्त होती है साथ ही उनका अच्छा विकास होता है। आयुर्वेद के अनुसार इस तेल से मालिश करने पर शिशु आराम से सोते हैं।

अस्थि-सुषिरता (osteoporosis) से लड़ने में मदद करता है-

तिल में जिन्क और कैल्सियम होता है जो अस्थि-सुषिरता से संभावना को कम करने में मदद करता है।

मधुमेह के दवाईयों को प्रभावकारी बनाता है-

डिपार्टमेंट ऑफ बायोथेक्सनॉलॉजी विनायक मिशन यूनवर्सिटी, तमिलनाडु (Department of Biothechnology at the Vinayaka Missions University, Tamil Nadu) के अध्ययन के अनुसार यह उच्च रक्तचाप को कम करने के साथ-साथ इसका एन्टी ग्लिसेमिक प्रभाव रक्त में ग्लूकोज़ के स्तर को 36% कम करने में मदद करता है जब यह मधुमेह विरोधी दवा ग्लिबेक्लेमाइड (glibenclamide) से मिलकर काम करता है। इसलिए टाइप-2 मधुमेह (type 2 diabetic) रोगी के लिए यह मददगार साबित होता है।

टिप्स :- तिल का सेवन हेल्दी तरीके से करें। इसको अपने आहार में शामिल करने से पहले भून लें। किसी भी तरह के सलाद में इसको छिड़क कर खा सकते हैं या तिल के लड्डू, तिल की पूरी भी बनाकर भी खा सकते हैं। खाना बनाने में तिल के तेल का भी इस्तेमाल कर सकते हैं।


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शुक्राणु बढ़ाना चाहते हैं तो रोजाना खायें मुट्ठी भर अखरोट

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लॉस एंजिलिस : पुरुषों की शुक्राणु संख्या दुनिया भर में एक बड़ी समस्या मानी जाती है और वैज्ञानिकों का कहना है कि इसे बढ़ाने का बहुत आसान तरीका है मुट्ठी भर अखरोट खाना।

यूसीएलए स्कूल ऑफ नर्सिंग की प्रोफेसर वेंडी रॉबिन्स ने बताया, ‘अखरोट और पुरुष प्रजनन-क्षमता के संबंध में हमने जो प्राथमिक अनुसंधान किया उसमें हमने भोजन में अखरोट जोड़ने पर शुक्राणुओं के पहलुओं में सुधार पाया जिसने हमारे लिए पुरूष प्रजनन-क्षमता और प्रजनन स्वास्थ्य पर अखरोट के प्रभावों का और अध्ययन करने का एक मंच तय किया।’ वेंडी ने कहा, ‘नई परियोजना चल रही हैं और हमें उम्मीद है कि निकट भविष्य में इसके बारे में आपसे साझा करने में सक्षम होंगे।’ उन्हेंने बताया कि रोजाना 75 ग्राम अखरोट के सेवन से 21 से 35 साल के आयुवर्ग के स्वस्थ पुरुषों के समूह में शुक्राणु जीवन-शक्ति, गतिशीलता और सामान्य आकृति में सुधार हुआ।

विज्ञान पत्रिका ‘बायोलोजी ऑफ रिप्रोडक्शन’ में प्रकाशित यह अध्ययन दुनिया भर में सात करोड़ से ज्यादा दंपतियों के लिए अहम हैं जिन्हें प्रजनन क्षमता की दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। वैज्ञानिकों का कहना है कि इनमें से 30 से 50 फीसद मामले पुरुष पार्टनर से जोड़े जाते हैं।

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अखरोट अकेला ऐसा मेवा है जो पौधा आधारित ओमेगा-3 फैटी ऐसिड- अल्फा-लिनोलेनिक एसिड (एएलए) का शानदार स्रोत है। बहरहाल, एएलए के अलावा अखरोट में उच्च ऐंटी-ऑक्सिडेंट हैं, और साथ ही अनेक माइक्रो-न्यूट्रिशिएंट भी जिनके बारे में वेंडी का सोचना है कि उन सब का मिला जुला असर पड़ता है।

‘कैलीफोर्निया वालनट कमिशन’ की पोषण सलाहकार कैरोल बर्ग स्लोआन ने कहा कि खाने का रिश्ता मानव प्रजनन सफलता से जोड़ा जाता है। लेकिन ज्यादातर जोर मां के भोजन पर होता है और बहुत कम जोर पिता के भोजन पर होता है। कैरोलन ने कहा कि वेंडी के अध्ययन ने यह जताया है कि पिता के भोजन का प्रभाव ना सिर्फ प्रजनन-क्षमता पर होता है, बल्कि यह बच्चे और आने वाली पीढ़ियों के स्वास्थ्य को भी प्रभावित करता है।

यूसीएलए के अनुसंधान में 117 स्वस्थ युवकों को शामिल किया गया था। उन्हें पाश्चात्य शैली का भोजन दिया गया। उनमें से तकरीबन आधे लोगों ने 12 हफ्तों तक रोजाना 75 ग्राम अखरोट का सेवन किया। बाकी लोगों ने इसका सेवन नहीं किया। वेंडी ने बताया कि 12 हफ्तों के बाद अखरोट का सेवन करने वाले युवकों के समूह में शुक्राणु जीवन-शक्ति, गतिशीलता और सामान्य आकृति में सुधार पाया गया।


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