बरगद के पेड़ के फायदे

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बरगद के पेड़ का औषधीय और धार्मिक दोनों ही महत्व हैं। बरगद के पेड़ के कभी भी नष्ट न होने के कारण इसे अक्षय वट भी कहा जाता है। यह भारत का राष्ट्रीय वृक्ष है। इसका वानस्पतिक नाम फाइकस बेंघालेंसिस है। इसे तमाम औषधियों में उपयोग किया जाता है। इसके अलावा इसके पत्तों से निकलने वाले दूध को भी उपचार में प्रयोग किया जाता है। आज हम आपको इसके कुछ औषधीय गुणों के बारे में बताते हैं।

चोट लगनने पर

बरगद का दूध चोट, मोच और सूजन पर दिन में दो से तीन बार लगाने और मालिश करने से काफी आराम मिलता है। यदि कोई खुली चोट है तो बरगद के पेड़ के दूध में आप हल्दी मिलाकर चोट वाली जगह बांध लें। घाव जल्द भर जाएगा।

पैरों की बिवाई

हाथों की फटी हुई हथेली हो या एडिया (बिवाई), दोनों के ही उपचार में बरगद के पेड़ का दूध काफी कारगर है। ताजे-ताजे दूध को एडियों की फटी हुई दरारों पर भरकर मालिश करते रहने से कुछ ही दिनों में वह ठीक हो जाती हैं। घांव में दूध भरने से पहले एडियों को गर्म पानी से धो लें।

आग से जल जाना

यदि आपके शरीर का कोई हिस्सा जल जाता है तो बरगद का पेड़ उसमें भी राहत देता है। बरगद के पत्ते को पीसकर, उसमें जरूरत के मुताबिक दही मिला लें। अब इस लेप को जले हुए भाग पर लगाने से जलन दूर होती है। जले हुए स्थान पर बरगद की कोपल या कोमल पत्तों को गाय के दही में पीसकर लगाने से भी आराम मिलता है।

बच्चों के दस्त में

यदि बच्चे को पतले दस्त हो रहे हैं तो नाभि में बरगद का दूध लगाने से दस्त में आराम मिलता है। इसके अलावा एक बताशे में दो से तीन बूंद बरगद का दूध डालकर दिन में तीन चार बार रोगी को खिलाने से भी दस्त में आराम मिलता है।

कमर दर्द

कमर दर्द में सिकाई करने के बाद बरगद के दूध की मालिश करने से कुछ ही दिन में आराम मिलने लगता है। ऐसा दिन में कम से कम तीन बार करना होता है। इसके अलावा बरगद का दूध अलसी के तेल में मिलाकर मालिश करने से भी कमर दर्द से छुटकरा मिलता है।

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ज्यादा पेशाब आना

बरगद के पेड़ की छाल को सुखाकर उसका चूर्ण बना लें। अब इसमें से आधा चम्मच चूर्ण का एक कप गुनगुने पानी के साथ दिन में 3-4 बार सेवन करें। ऐसा लगातार 15 दिन तक करने से बार-बार पेशाब आने के रोग में फायदा होगा। बरगद के फल के बीज को बारीक पीसकर चौथाई चम्मच सुबह के समय गाय के दूध के साथ खाने से भी रोग ठीक हो जाता है।

बाल संबंधी रोग

बरगद के सूखे हुए पत्तों को जलाने पर बनी 20 ग्राम राख को अलसी के 100 मिलीलीटर तेल में मिलाकर मालिश करते रहने से सिर के उड़े हुए बाल उग आते हैं। कोमल पत्तों के रस में बराबर मात्रा में सरसों का तेल मिलाकर आग पर पकाकर गर्म कर लें, इस तेल को बालों में लगाने से बाल मजबूत बनते हैं।

नाक से खून बहना

बरगद की सूखी हुई जड़ को बारीक पीस लें। अब इसमें से आधी चम्मच पाउडर को लस्सी के साथ पीने से नाक से खून बहना बंद हो जाता है। नाक में बरगद के दूध की दो बूंद डालने से भी नकसीर (नाक से खून बहना) ठीक हो जाता है।

नींद अधिक आना

बरगद के कड़े हरे शुष्क पत्तों के 10 ग्राम चूर्ण को एक लीटर पानी में तब तक पकायें, जब तक यह चौथाई न बच जाए। इब इसमें चुटकी भर नमक मिलाकर सुबह-शाम पीने से आलस्य और नींद ज्यादा आने की परेशानी से छुटकारा मिलता है।


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