पैदल चलें तंदरुस्त रहें

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डाक्टरों का भी मानना है कि मोटापे जैसी कई प्रकार की बीमारियों का कारण शारीरिक व्यायाम का अभाव है। उनका कहना है कि चलना या
टहलना एक उत्तम व्यायाम है। इससे रक्त का परिभ्रमण और श्वास निश्वास की प्रक्रिया सुगम हो जाती है। पसीना खूब आता है।

पसीने के साथ शरीर का कुछ मालिन्य भी निकल जाता है। कई लोग दफ्तर से घर तक की यात्र बस, ट्राम, रेल या मोटर से करने के बाद टहलने या चलने के लिए निकल पड़ते हैं।

यदि दफ्तर और घर के बीच का फासला चार-पांच किलोमीटर तक का ही है तो समय की यह बर्बादी क्यों? महात्मा गांधी की आत्मकथा का एक प्रसंग यहां उल्लेखनीय लगता है। मैट्रिक उत्तीर्ण करके जब वे कानून पढ़ने इंगलैंड गए तो उन्होंने कॉलेज से कुछ ही दूरी पर एक कमरा किराए पर लिया। वहां तक की यात्र पैदल ही करते थे।

टहलने के लिए अलग समय लेने की जरूरत नहीं पड़ती थी। चूंकि मकान मुख्य शहर से थोड़ा दूर था इसलिए किराया भी कम पड़ता था। बस किराया भी बच जाता था। यदि अपने कार्यालय के दो-तीन पड़ोसी मित्रों को भी साथ ले सकें तो बातें करते-करते चल सकते हैं।
इस बहाने थोड़ा मनोविनोद भी हो सकता है। यदि आप किसी विषय विशेष में रुचि रखने वाले हैं तो उस विषय से संबंधित किसी मुद्दे पर चर्चा करते हुए कदम बढ़ा सकते हैं। हां, आने-जाने वाले वाहनों का ख्याल अवश्य रखना होगा।


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