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भैषज्य विज्ञान का मूल स्त्रोत है अथर्ववेद

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‘भैषज्य’ शब्द भेषज शब्द से स्वार्थ में ’अनन्तावसथेतिहभेषजाञ्ञ्य:’ । इस सूत्र से ‘ज्य’ प्रत्यय करने पर सिद्ध होता है । वैद्यक – रत्नमाला के इस वचन से ज्ञात होता है कि भैषज्य एवं भेषज – ये दोनों पर्यायवाची शब्द हैं । ‘भेषज’ शब्द की व्युत्पत्ति दो प्रकार से की जाती है –

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1) ‘भिषक वैद्यस्तस्येदम’ इस अर्थ में अण् प्रत्यय लगाकर व्युत्पादित भेषज शब्द सिद्ध होता है । वैद्य से संबंध क्रिया एवं द्रव्य ‘भैषज्य’ तथा ‘भेषज’ कहे जाते हैं और

2) ‘भेषो रोगस्तं जयति’ अर्थात् रोग को पराजित करने का उपाय भेषज है ।

इस संदर्भ में भिषक शब्द भी विचारमीय है । भिषक शब्द की व्युत्पत्ति है – बिभेति रोगो यस्मात् । ‘भी’ धातु से ‘षुक्’ प्रत्यय तथा ह्त्रस्व करने पर ‘भिषक’ शब्द की निष्पत्ति होती है । इससे स्पष्ट है कि ‘भेषज’ अथवा ‘भैषज्य’ एवं ‘भिषक’ शब्दों से प्राणी के रोग शमन का उपाय तथा उसका कर्ता विवक्षित है ।

अथर्ववेद में पर्याप्त रूप में भैषज्य – विज्ञान का मूल प्राप्त होता है । इसी कारण आयुर्वेद के संहिताकारों ने अथर्ववेद से अपना संबंध बताया है । अर्थात् कोई प्रश्नकर्ता वैद्य से यह प्रश्न करे कि ऋग्वेद, सामवेद, यजुर्वेद तथा अथर्ववेद – इन चारों वेदों में आयुर्वेदविद् किस वेद का उपदेश करता है तो वैद्य को चाहिए कि वह अथर्ववेद में अपनी भक्ति दिखलाएं ।

भैषज्य – विज्ञान का विस्तृत उल्लेख सर्वप्रथम अथर्ववेद में ही है । इस कारण अथर्ववेद ‘भिषग्वेद’ भी कहा जाता है । अथर्ववेद का दूसरा नाम ‘अथर्वाङ्गिरस’ वेद भी है । यह संज्ञा भी अथर्ववेद के भैषज्य – विज्ञान को संकेतित करती हैं ।
अथर्वाङ्गिरस में अथर्व + आङ्गिरस – ये दो शब्द हैं । ‘अथर्व’ शब्द हिंसार्थक थुर्वी धातु से निष्पन्न है । जिस भैषज्य – प्रक्रिया में किसी प्रकार की हिंसा की संभावना नहीं होती वह ‘अथर्व’ कही गयी है और रोगी के अंगों में सप्तधातुमय जो रस प्रवहमान है, उसके आधार पर किया जाने वाला भैषज्य आङ्गिरस है ।

तात्पर्य यह है कि ‘अथर्व’ शब्द से अभिहित भैषज्य – प्रक्रिया में किसी प३कार का उपचार किए बिना मंत्र एवं तप की शक्ति से रोग का नाश किया जाता था । अत: इस प्रक्रिया में रोगी के शरीर पर किसी प्रकार के प्रतिकूल प्रभाव द्वारा हिंसा (हानि) की संभावना नहीं रहती थी, किंतु इसके विपरित आङ्गिरसी चिकित्सा – पद्धति में रोगी के शरीर से संबंध विभिन्न उपचार किए जाते थे । इन दोनों प्रकार की चिकित्सा – पद्धतियों का समावेश अथर्ववेद में होने के कारण इसे ‘अथर्वाङ्गिरस’ वेद कहा गया है ।

अथर्ववेद में प्रतिपादित भैषज्य – विज्ञान का पूर्ण एवं विस्तृत विवरण ‘कौशिक गृह्यसूत्र’ में प्राप्त होता है । अथर्ववेद से संबंध इस गृह्यसूत्र में भैषज्य के लिए एक पृथक अध्याय है । कौशिक गृह्यसूत्र में भैषज्य का लक्षण करते हुए सूत्रकारने कहा है – ‘लिंगयुपतापो भैषज्यम्’ ।

रोग को लिंग अर्थात् चिन्हों द्वारा ज्ञात होने के कारण लिंगी कहा जाता है । शरीर में होने वाले ज्वर, भ्रम, पीड़ा आदि रोगजनित विकार ही रोग के चिन्ह हैं । निदान द्वारा रोग के उप यानी अत्यन्त समीप जाकर मंत्र एवं औषधि आदि उपचारों से रोग (ताप) का विनाश करना ‘उपताप’ या ‘भैषज्य’ कहा जाता है ।

रोग दो प्रकार के हो सकते हैं – पापजनित तथा आहारदिजनित । यद्यपि दोनो प्रकार के रोगों के चिन्ह समान ही ज्ञात होते हैं, तथापि जिन रोगों की उत्पत्ति आहारदि की विकृति द्वारा ज्ञात न हो सके तथा जिनपर आहारजनित रोगों की औषधियां सफल न हों, उन रोगों को पापजनित मानकर आथर्वणिक भैषज्य – प्रक्रिया द्वारा उनका विनाश करना चाहिए । आहारदिजनित व्याधियों पर आङ्गिरसी प्रक्रियाद्वारा विजय प्राप्त करनी चाहिए । कौशिक गृह्यकर्ता ने यह अभिमत ‘वचनादन्यत्’ सूत्रद्वारा प्रकट किया है ।

आयुर्वेद शास्त्र के प्राचीन आचार्यों ने भी अथर्ववैदिक भैषज्य – प्रक्रिया के उपर्युक्त सिद्धांत को प्राय: यथावत् स्वीकार किया है । अर्थात् भेषज आश्रय भेद से दो प्रकार का होता है –
1) दैवव्यपाश्रय तथा 2) युक्तिव्यपाश्रय । इनमें मंत्र, औषधि, मणिधारण, उपवास, मंगलपाठ, बलि. उपहार, होम, नियम आदि क्रियाओं द्वारा जो चिकित्सा होती है, उसे दैवव्यपाश्रय भेषज कहते हैं । संशोधन उपशमन और प्रत्यक्ष फल देनेवाली सभी क्रियाओं को युक्तिव्यपाश्रय भेषज कहते हैं ।


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ब्रैकफास्ट हो Best तो Weight रहेगा Set, जाने ब्रेकफास्ट में क्या खाएं और क्या नहीं.!

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आज हर 5 में से 3 इंसान मोटापे का शिकार हैं। मोटापा एक ऐसी बीमारी हैं जो एक बार काबू से बाहर चले जाए तो उसे कंट्रोल में करना मुश्किल हो जाता है। यहीं मोटापा आगे चलकर बहुत सारी बीमारियों को न्यौता देता है। हालांकि लोग अब सेहत के प्रति सजग होने लगे हैं और हैल्दी खान-पान की तरफ ध्यान देने लगे हैं लेकिन डाइट लेने और एक्सरसाइज करने के बावजूद भी कई बार वजन कम नहीं होता। इसके पीछे की एक बड़ी वजह हमारे खाने पीने का अनुचित समय और आहार। अगर आप उचित आहार को उचित समय पर खा रहे हैं तो यकीनन आपका वजन कम होगा। फर्स्ट मील यानी सुबह के नाश्ते में उचित आहारों को शामिल करें।

अच्छी सेहत और वजन कम करने का सबसे अच्छा तरीका है आपका ब्रेकफास्ट बेस्ट हो। इसके बाद ही आप बाकी के दिन की डाइट प्लान कर सकते हैं। नाश्ता आपके ब्लड शुगर को स्थिर रखता है जिससे आपको सारा दिन भूख कम लगती है और मैटाबॉलिज्म भी बढ़ा रहता है। चलिए आज आपको बताते हैं कि आपका ब्रेकफास्ट कैसा होना चाहिए।

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कैलोरी की बजाए षौष्टिक आहार लें

कैलोरी की बजाए पौष्टिक तत्वों से भरपूर आहारों का सेवन करें। मीठे आहारों का सेवन कम करें।

ब्रेकफास्ट में क्या खाएं

– प्रोटीनयुक्त आहार लें। ब्रेकफास्ट में अंडे को शामिल करें।

– ड्राई फ्रूट्स (नट्स) और एवोकाडो खाएं।

– फ्रूट जूस लेने की बजाए खूब पानी पीएं और कॉफी या टी लें।

– सब्जियों के जूस को ब्रेकफास्ट में शामिल करें।

ब्रेकफास्ट में इन आहारों से परहेज करें

– मीठे आहारों का सेवन बिलकुल ना करें।

– डिब्बाबंद आहारों का सेवन ना करें।

– चीनी वाला दही ना खाएं।

– फ्रोजेन मील्स से परहेज करें।

– चीनीयुक्त प्रोटीन पाऊडर ना लें।

– मैदे की ब्रैड की बजाए ब्राऊन ब्रैड खाएं।

– मीट खाना बंद करें।


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Body Care

पथरी के दर्द से छुटकारा पाने के लिए अपनाएं ये घरेलू उपाय!

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पथरी यानि स्टोन की समस्या आजकल आम देखने को मिल रही है। इसका दर्द इतना भयानक होता है कि सहा न जा सकें। पथरी यूरिन सिस्टम की बीमारी है जो शरीर में कैल्शियम के गाढ़े होने से बढ़ने लगती है। हर उम्र के लोग इस समस्या का सामना कर रहे है। अगर आप भी इस समस्या से परेशान है तो हम आपको कुछ घरेलू नुस्खे बताने जा रहे है, जिसे अपनाकर आप पथरी के दर्द से निजात पा सकते है।

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1. केला

पथरी के दर्द से राहत पाने के लिए केले का सेवन रोज करें। केले में पाए जाने वाले विटामिन्स पथरी को बढ़ने से रोकते है।

 2. अजवाइन

पानी में अजवाइन डालकर उबाल लें और फिर इसे छानकर पीएं। इसे पीने से पथरी के दर्द से छुटकारा मिलेगा।

3. नींबू पानी

नींबू में सीट्रिक एसिड की मात्रा पाई जाती है जोकि शरीर में कैल्शियम की मात्रा को बढ़ने से रोकता है। पथरी के समय इसका सेवन करने से जल्दी राहत मिलती है।

4. मिश्री, सौंफ और सूखा धनिया

रात को 2 गिलास पानी में 2 बड़े चम्मच सौंफ, सूखा धनिया और मिश्री को डालकर भिगों दें। सुबह इसे छानकर खाली पेट पीए। एेसा करने से आपको जल्दी ही पथरी से राहत मिलेगी।

5. प्याज

प्याज के रस को शक्कर के साथ पीएं। प्याज में पाए जाने वाले पोटैशियम और विटामिन-B शरीर में पथरी को बढ़ने से रोकता है।

6. एलोवेरा

एलोवेरा का जूस नियमित रूप से पीने से पथरी के दर्द से राहत मिलती है।

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बड़ी से बड़ी बीमारी का रामबाण इलाज है यह तेल, इस तेल में छुपे हैं अनेक फायदे !

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यह पढ़ें : कलौंजी : बड़ी से बड़ी बीमारी का एक इलाज

हमें स्वास्थ्य संबंधी कोई भी समस्या होती है तो हम उसे ठीक करने के लिए डॉक्टर और दवाइयों का सहारा लेते हैं.

लेकिन फिर भी पूरी तरह से ठीक नहीं हो पाते हैं.

अगर हम कहें कि अपनी किसी भी बीमारी का कारगर इलाज आप घर बैठे कर सकते हैं तो आपको शायद हमारी बातों पर यकीन नहीं होगा.

लेकिन ये सच है हम आपको बताने जा रहे हैं एक ऐसे तेल के बारे में जिसमें गंभीर से गंभीर बीमारियों से लड़ने की क्षमता छुपी है.

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कलौंजी का तेल

कलौंजी का इतिहास सालों पुराना है. सदियों से इसका उपयोग मसाले और दवाइयों के रुप किया जा रहा है. इसके औषधिय गुणों के चलते ही कहा जाता है कि कलौंजी के तेल में हर मर्ज़ का इलाज है सिवाय मौत के.

कलौंजी का तेल पोषक तत्वों से भरपूर

कलौंजी में कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और वसा जैसे 100 से भी ज्यादा महत्वपूर्ण पोषक तत्व पाए जाते हैं. जो हमारे शरीर के रोग प्रतिरोधक क्षमता को मज़बूत करते है.

आगे स्लाइड में next पर क्लिक करके जाने रामबाण औषधि कलौंजी के औषधीय गुणों के बारे में…


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