खजूर आंतो की सफाई से लेकर सभी सेक्स समस्याओं तक का कारगर उपाय…

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खजूर को संस्कृत में खर्जूर, भूमिखर्जूरिका, दुरारोहा, स्वादुमस्तका कहते हैं। जो खजूर काबुल, कंधार, इराक आदि देशों में मिलता है उसे पिण्ड खजूर कहते हैं। पिण्ड खजूर को सुलेमानी खजूर भी कहते हैं। देसी खजूर भारत में दक्षिण भारत, महाराष्ट्र, कर्नाटक, में बहुतायात में पाया जाता है। खजूर दक्षिण-पश्चिम एशिया के देशों, ईरान, इराक अरब, ओमान, आदि की मुख्य खाद्य फसल है।

 खजूर एक पौष्टिक ड्राई फ्रूट है जो वज़न को बढाता है। आयुर्वेद में खजूर को जलन, कमजोरी, हिक्का, बुखार, कास, बेहोशी, प्रमेह, मूत्र रोग, रक्तपित्त, अस्थमा, पित्त के कारण दर्द आदि में प्रयोग किया जाता है। यह वात-कफ विकार को दूर करता है। यह बलवर्धक और वीर्यवर्धक होता है। खजूर के पेड़ों को काटने पर जो रस प्राप्त होता है वह नशा तथा पित्त करने वाला होता है।
 
 खजूर के पेड़ रेगिस्तानी इलाकों में पाए जाते हैं। यह बहुत लम्बे होते है। इनका एक ही तना होता है जिस पर बढ़ कर पत्तियां निकलती हैं। खजूर के पेड़ में डालियाँ नहीं होती। पत्ते करीब हाथ भर लम्बे होते हैं। पत्तों की नोक कंटीली होती है। पेड़ पर फल गुच्छों में लगते है। कच्चे फल हरे, पीले और पकने पर लाल होते हैं। खजूर का फल करीब ढाई से सात सेंटीमीटर लम्बा होता है। यह रंग में लाल कुछ कालापन लिए होते हैं इसके बीज लम्बे-पतले और भूरे से होते हैं। देशी खजूर, शरीर को ताकत देते हैं और आंतरिक गंदगी को साफ़ करते है।

Source http://i9.dainikbhaskar.com/thumbnail/680x588/web2images/www.bhaskar.com/2015/05/25/khajoor_1432501237.jpg

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