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एचआईवी एड्स – HIV AIDS

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एचआईवी, ह्यूमन इम्यूनोडेफिसिएन्सी वायरस का संक्षिप्त रूप है, जिसके कारण एड्स होता है।

एड्स, अक्वायर्ड इम्यून डिफिसियेंसी सिन्ड्रोम का संक्षिप्त रूप है।

चित्रः लाल फीता (रेड रिबन), एचआईवी पॉजि़टिव और एड्स से पीडि़त व्यक्तियों के साथ

एकजुटता का प्रतीक है।

एचआईवी कैसे होता है?

आपको, संक्रमित शारीरिक द्रव जैसे कि वीर्यपात से पहले निकलने वाले स्राव, वीर्य, योनि से निकलने वाले स्राव, मां के दूध और खून के संपर्क में आने से एचआईवी हो सकता है।

एचआईवी, यौनिक और गैर-यौनिक दोनों ही प्रकार की गतिविधियों से हो सकता है।

यौनिक गतिविधियों में, असुरक्षित मुख, योनि और गुदा मैथुन करना शामिल है। असुरक्षित मुख मैथुन करने की तुलना में असुरक्षित गुदा और योनि मैथुन करने से एचआईवी संक्रमण होने का जोखिम काफी अधिक होता है।

गैर यौनिक गतिविधियों में संक्रमित सिरिंज या सूई का आदान प्रदान, दूषित रक्त चढ़ाना और ’एचआईवी पॉजि़टिव महिला से स्तनपान शामिल है। एचआईवी जन्म के समय संक्रमित माँ से बच्चे को भी हो सकता है।

साथ-साथ खाना खाने, पानी पीने या मच्छर के काटने से आपको एचआईवी नहीं हो सकता है।

इन कुछ बीमारियों के होने पर आपको एचआईवी होने का जोखिम बढ़ सकता हैः

  • गोनोरिया
  • क्लैमिडिया
  • सिफि़लिस
  • जेनिटल हर्पीज़
  • ट्राइकोमोनिएसिस
  • बैक्टीरियल वेजिनोसिस

एचआईवी से आप कैसे बच सकते हैं?

चूंकि एचआईवी सेक्स, सूई के आदान-प्रदान प्रयोग और मां से उसके होने वाले बच्चे को हो सकता है, अतः अपने-आप को एचआईवी से किए जाने वाले बचाव को तीन वर्गों में बांटा गया हैः

एचआईवी के यौनिक संचरण से बचने के लिए
1. हमेशा कंडोम का प्रयोग करें।
पुरुष या महिला कंडोम का प्रयोग, आपको एचआईवी के जोखिम को कम करता है।

2. एक साथी या कम साथियों से यौन संबंध बनाएं।
एक साथी या कम साथियों से यौन संबंध बनाना, आपको एचआईवी या दूसरे यौनसंचारित रोगों के संक्रमण के संपर्क में आने के जोखिम को कम कर सकता है, जिसके परिणामस्वरूप एचआईवी संक्रमण का जोखिम घट सकता है।

3. पुरुष खतना
यदि आप पुरुष हैं तो खतना कराने पर विचार करें। अस्पताल या क्लीनिक में पुरुष खतना कराने से महिलाओं से होने वाले एचआईवी के जोखिम में 50 प्रतिशत की कमी देखी गई है। इसकी तुलना में महिलाओं का खतना या महिला जननांग का परिच्छेदन करवाने पर एचआईवी संक्रमण से कोई बचाव नहीं देखा गया।

4. यदि आपको असामान्य रूप से स्राव होता है, घाव हैं या पेशाब करते समय दर्द होता है तो यौनसंचारित रोगों की जांच कराएं। इन लक्षणों से पता चलता है कि कुछ न कुछ गड़बड़ है। देखा गया है कि क्लैमिडिया, गोनोरिया, सिफि़लिस, जेनिटल हर्पीज़, ट्राइकोमोनियासिस और बैक्टीरियल वेजिनोसिस, इन सभी से आपको एचआईवी से संक्रमित होने और फैलाने (किसी दूसरे को संक्रमित करने) का जोखिम बढ़ जाता है। इसलिए यदि आपको इनके लक्षण दिखते हैं तो इनकी जांच कराएं। साथ ही अपने साथी को इनके बारे में बताएं जिससे वह भी जांच करा सकें और इलाज करा सकें।

5. अपने साथी के साथ एचआईवी की जांच कराएं।

6. जब भी आप किसी नए साथी से यौन संबंध बनाने वाले हैं, तो असुरक्षित सेक्स करने से पहले जांच कराएं। हो सकता है कि आप या आपके  साथी एचआईवी से संक्रमित हों, जिसका उन्हें पता न हो।

एचआईवी के रक्त संचरण से बचने के लिए
1. जीवाणुरहित सूइयों का प्रयोग करें।
जब भी आपको खून चढ़ाने की ज़रूरत पड़े तो यह सुनिष्चित कर लें कि नई जीवाणुरहित सूइयों का प्रयोग किया जाता है। यही बात दवा या नषे की सुइयों पर भी लागू होती है- सूइयों का आदान-प्रदान न करें, जब भी आप सूई लगाते हैं तो नई सूई का प्रयोग करें। यही बात गोदने (टैटू बनवाने), शरीर के किसी अंग में छेद करने और एक्यूपंक्चर भी लागू होती है।

2. यह सुनिश्चित कर लें कि आप हर बार जांचा गया सुरक्षित खून चढ़वाते हैं।
एचआईवी, सिफि़लिस और हेपिटाइटिस-बी सभी रोग खून चढ़ाने से लगते हैं। इसलिए यह ज़रूरी हो जाता है कि आप यह सुनिश्चित कर लें कि जो भी खून आपको चढ़ाया जाता है, वह जांचा हुआ है, खासकर उन देशों में जहां एचआईवी आम है।

मां से बच्चे को होने वाले एचआईवी से बचने के लिए
1. गर्भावस्था और प्रसव के दौरान एंटीरेट्रोवायरल दवाएं लें।
यदि आप एचआईवी पॉजि़टिव हैं और गर्भवती हैं तो अपने बच्चे को एचआईवी होने से बचाने के लिए गर्भावस्था और प्रसव के दौरान एंटीरेट्रोवायरल दवाएं लें।

2. सीज़ेरियन (ऑपरेशन से प्रसव)
यदि आप एचआईवी पॉजि़टिव हैं और गर्भवती हैं तो सीज़ेरियन पर विचार करें। इससे आपके होने वाले बच्चे को एचआईवी होने की संभावना कम हो जाती है।

3. यदि संभव हो तो स्तनपान न कराएं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन एचआईवी पॉजि़टिव माताओं को अपने बच्चों को मां के दूध के विकल्प के प्रयोग करने की सलाह देता है।

किंतु यदि आप ऐसी जगह रहती हैं जहां सुरक्षित पीने का पानी उपलब्ध नहीं है और आप रोज़ पानी नहीं उबाल सकतीं तो आप दूध के विकल्प का प्रयोग नहीं भी करने की सोच सकती हैं। असुरक्षित पीने के पानी से जानलेवा बीमारियां होने का जोखिम स्तनपान कराने से होने वाले एचआईवी संक्रमण पर भारी पड़ सकता है। इन बातों के बारे में अपने डाक्टर से सलाह लें।

एचआईवी के लक्षण क्या हैं?

एचआईवी के शुरुआती लक्षण, आम सर्दी-ज़ुकाम या फ्लू जैसे हो सकते हैं, इसीलिए अधिकांश लोगों को पता नहीं चल पाता कि वे एचआईवी से संक्रमित हो गए है।

यदि आपको असुरक्षित सेक्स करने के तीन से छह हफ्तों बाद बुखार, सिर दर्द, छाले, दस्त या गला खराब होता है, तो अच्छा रहेगा यदि आप एचआईवी की जांच करा लें। लेकिन समस्या यही है कि अधिकांश लोग इन्हें पहले एचआईवी संक्रमण के लक्षण नहीं समझते।

बिना इलाज किए, ये फ्लू जैसे लक्षण अपने-आप चले जाते हैं। किंतु यदि आप एचआईवी से संक्रमित हैं तो संक्रमण दूर नहीं होता। बल्कि आठ से दस वर्षों में यह संक्रमण धीरे-धीरे आपकी रोग प्रतिरोधी क्षमता को नष्ट कर देता है। और आप एचआईवी संक्रमण की दूसरी अवस्था, जिसे एड्स भी कहते हैं, में चले जाते हैं।

एचआईवी संक्रमण या एड्स की बाद की अवस्थाएं
अक्सर गंभीर रूप से बीमार होने में एचआईवी से संक्रमित होने के बाद आठ से दस वर्ष लग सकते हैं। क्योंकि तब तक एचआईवी आपकी रोग-प्रतिरोधी क्षमता को यहां तक नष्ट कर चुका होता है कि आपका शरीर दूसरे तरह के संक्रमणों से नहीं लड़ पाता है।oldveda-logo-272

 

चित्रः कापोसीज़ सारकोमा

एचआईवी संक्रमण एवं एड्स के बाद के लक्षणः

  • वजन बहुत अधिक कम हो जाना
  • भूख न लगना
  • लगातार दस्त
  • त्वचा का कैंसर
  • दिमागी बुखार (मेनेन्जाइटिस)

आपको एचआईवी संक्रमण हुआ है कि नहीं, इसका निश्चित रूप से पता करने का एकमात्र तरीका, इसकी जांच करना है।

एचआईवी की जांच कैसे कराएं?

आम तौर पर आपके असुरक्षित सेक्स करने, जीवाणुरहित किए बिना सूई का प्रयोग करने या संदेहास्पद खून चढ़वाने के बाद एचआईवी जांच कराने के लिए स्वास्थ्य सेवा प्रदाता (डॉक्टर) तीन महीने इंतज़ार करने के लिए कहेंगे।

यदि आप एचआईवी की जांच कराना चाहते हैं, तो टेस्ट से पहले और बाद में डाक्टर को परामर्श या बातचीत करनी चाहिए।

विन्डो पीरियड
एचआईवी टेस्ट, एचआईवी संक्रमण के प्रति आपके शरीर की रोग-प्रतिरोधी प्रणाली की क्षमता का आकलन करता है। वह इस बात का आकलन करता है कि आपके शरीर ने एचआईवी ऐंटीबॉडीज़ पैदा किए हैं कि नहीं। यदि आपका टेस्ट एचआईवी पॉजि़टिव आता है तो इसका अर्थ है कि आपके खून में एचआईवी ऐंटीबॉडीज़ मौजूद हैं।

आम तौर पर एचआईवी ऐंटीबॉडीज़ बनने में दो महीने लग जाते हैं। इसलिए आश्वस्त होने के लिए एचआईवी टेस्ट कराने से पहले डाक्टर आपको तीन महीने इंतज़ार करने के लिए कहते हैं- इस अवधि को विन्डो पीरियड कहा जाता है।
जब आप इस अवधि से पहले टेस्ट करवाते हैं तो आपका टेस्ट एचआईवी निगेटिव आ सकता है, जबकि सच्चाई यह है कि आपको एचआईवी होता है।

इसे फाल्स निगेटिव कहते हैं।

विभिन्न प्रकार के एचआईवी टेस्ट
आपके निवास स्थान के अनुसार कुछ अलग-अलग तरह के एचआईवी टेस्ट उपलब्ध हैं- खून, पेशाब या मुंह की जांच (हालांकि आखिरी के दोनों टेस्ट अभी तक भारत में आम उपलब्ध नहीं हैं)। आपके डाक्टर खून का सैम्पल ले सकते हैं, पेशाब का सैम्पल देने को कह सकते हैं अथवा आपके मसूढ़ों से पोंछकर थूक का सैम्पल ले सकते हैं।

खून या थूक की जांच की तुलना में पेशाब की जांच एचआईवी का पता लगाने के लिए कम विश्वसनीय होती है।

आपके एचआईवी टेस्ट का नतीजा कब मिलता है?
आपके टेस्ट के नतीजे की इंतज़ार अवधि टेस्ट के प्रकार पर निर्भर करती है। आम तौर पर मानक एचआईवी टेस्ट का नतीजा आने में दो हफ्ते तक लग जाते हैं। हालांकि यदि आपका षीघ्र एचआईवी टेस्ट किया जाना है तो आपके नतीजे एक घंटे में भी मिल जाते हैं

एचआईवी से छुटकारा कैसे पाएं?

एचआईवी संक्रमण लाइलाज है। इसके लिए कोई टीका नहीं है।

बिना किसी इलाज के यदि स्वस्थ जीवन-षैली अपनाई जाए तो संक्रमित व्यक्ति संक्रमण होने के बाद औसतन 10 वर्ष जीवित रह सकते हंै।

आज उपलब्ध एचआईवी दवाओं के प्रयोग से आप स्वस्थ रह सकते हैं और किसी एड्स के लक्षण बिना इस अवधि को बढ़ा सकते हैं। इन दवाओं को एंटीरिट्रोवायरल्स, एआरवी या एचआईवी एंटीवायरल दवाएं कहा जाता है। ये आपके षरीर में वायरस को बढ़ने से रोकती हैं।


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पीरियड्स के दौरान खाएं ये फूड्स, दर्द से मिलेगी राहत

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पीरियड्स महिलाअों के लिए बहुत ही बड़ी समस्या है इसमें उनके कई परेशानियां का सामना करना पड़ता है जैसे दर्द, कमजोरी और चिड़चिड़ापन। इन से महिलाअों की दिनचर्या पर काफी असर पड़ता है लेकिन अगर इन दिनों अाप अपनी डाइट सही रखें तो अाप इन समस्याअों से बच सकती है। अाज हम आपको कुछ एेसी चीजों के बारे में बताएंगे जिनका पीरियड्स के दौरान सेवन करने से फिजिकल और मेंटल प्रॉब्लम्स को दूर कर सकती है।

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1. एेलोवेरा जूस

अगर अापको पीरियड्स के दर्द से छुटकारा पाना है तो एक एेलोवेरा जूस में एक चम्मच एक चम्मच शहद अौर पानी मिलाकर कर पीने से दर्द, कमजोरी अौर अधिक ब्लीडिंग से राहत मिलती है।

2. तुलसी

पानी में 7-8 पत्ते उबालकर उसमें एक चम्मच शहद मिलाकर पीने से राहत मिलती है।

3. अलसी

सुबह नाश्ते में भूनी हुई अलसी लेने से पारियड्स के दर्द से छुटकारा मिलता है।
 

3. ग्रीन टी

ग्रीन टी पीने से शरीर के मसल्स रिलैक्स महसूस करते है अौर दर्द में राहत मिलती है।

4. पाइन एप्पल

पीरियड्स के दिनों में पाइन एप्पल का खुब सेवन करने से हर तरह के दर्द से छुटकारा मिलता है।

5. अदरक 

पानी में अदरक डाल कर उबाल लें अौर फिर इसमें थोड़ा सा शहद मिलाकर पी लें इससे दर्द से झट से राहत मिलती है।

6. खसखस अौर गर्म दूध

दूध में खसखस मिलाकर पीने से कमजोरी भी दूर होती है अौर साथ ही साथ खून की कमी भी पूरी होती है।

7. केला 

पीरियड्स के दौरान केला खाने से मूड भी सही बना रहता है अौर एनर्जी भी।


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Sex & Relation

लहसुन की सिर्फ 2 से 3 कली आपके जीवन में कर सकती हैं ये बड़ा कमाल

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लहसुन की सिर्फ 2 से 3 कली आपके जीवन में कर सकती हैं ये बड़ा कमाल

क्या आप लिबिडो की कमी या बिस्तर पर सही प्रदर्शन नहीं कर पाने की समस्या से जूझ रहे हैं? अगर हां, तो एक सरल उपाय से आप इस समस्या से छुटकारा पा सकते हैं और अपनी सेक्स क्षमता बढ़ा सकते हैं। जी हां, ये आसान उपाय कुछ और नहीं बल्कि आपके किचन में मिलने वाली चीज लहसुन है। लहसुन एक ऐसा मसाला या खाद्य सामग्री है, जो आपको आसानी से उपलब्ध होता है। लहसुन की छोटी-छोटी कलियां सिर्फ खाने का जायका ही नहीं बढ़ाती बल्कि इनके बहुत सारे औषधीय गुण भी होते हैं। बेशक लहसुन स्वाद में कड़वा होता है लेकिन इसमें आपकी सेक्स लाइफ में मिठास घोलने की पूरी क्षमता होती है।

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लहसुन ही क्यों
लहसुन एक शक्तिशाली कामोत्तेजक (aphrodisiac) है, जो सेक्स क्षमता सुधारने के लिए बहुत प्रभावी माना जाता है। वास्तव में लहसुन आपके यौन स्वास्थ्य के लिए बहुत लाभकारी है। ये यौन इच्छा को बढ़ाने के लिए एक टॉनिक के रूप में कार्य करता है। इतना ही नहीं इससे कम लिबिडो के कारण आपके सेक्स प्रदर्शन पर पड़ने वाले प्रभाव को भी कम करने में मदद मिलती है।

आपको क्या चाहिए

  • लहसुन की केवल 2 से 3 कली

इसका इस्तेमाल ऐसे करें

  • डॉक्टर बखरू के अनुसार, आपको अपनी लिबिडो बढ़ाने के लिए रोजाना लहसुन की 2 से 3 कच्ची कली खानी चाहिए।

टिप- लहसुन खाने के बाद अच्छी तरह से ब्रश ज़रूर करें। दरअसल इसे खाने के बाद मुंह से बदबू आती है। जाहिर हैं, ये बदबू आपको किसिंग के दौरान महंगी पड़ सकती है।


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Dry Fruits

शुक्राणु बढ़ाना चाहते हैं तो रोजाना खायें मुट्ठी भर अखरोट

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लॉस एंजिलिस : पुरुषों की शुक्राणु संख्या दुनिया भर में एक बड़ी समस्या मानी जाती है और वैज्ञानिकों का कहना है कि इसे बढ़ाने का बहुत आसान तरीका है मुट्ठी भर अखरोट खाना।

यूसीएलए स्कूल ऑफ नर्सिंग की प्रोफेसर वेंडी रॉबिन्स ने बताया, ‘अखरोट और पुरुष प्रजनन-क्षमता के संबंध में हमने जो प्राथमिक अनुसंधान किया उसमें हमने भोजन में अखरोट जोड़ने पर शुक्राणुओं के पहलुओं में सुधार पाया जिसने हमारे लिए पुरूष प्रजनन-क्षमता और प्रजनन स्वास्थ्य पर अखरोट के प्रभावों का और अध्ययन करने का एक मंच तय किया।’ वेंडी ने कहा, ‘नई परियोजना चल रही हैं और हमें उम्मीद है कि निकट भविष्य में इसके बारे में आपसे साझा करने में सक्षम होंगे।’ उन्हेंने बताया कि रोजाना 75 ग्राम अखरोट के सेवन से 21 से 35 साल के आयुवर्ग के स्वस्थ पुरुषों के समूह में शुक्राणु जीवन-शक्ति, गतिशीलता और सामान्य आकृति में सुधार हुआ।

विज्ञान पत्रिका ‘बायोलोजी ऑफ रिप्रोडक्शन’ में प्रकाशित यह अध्ययन दुनिया भर में सात करोड़ से ज्यादा दंपतियों के लिए अहम हैं जिन्हें प्रजनन क्षमता की दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। वैज्ञानिकों का कहना है कि इनमें से 30 से 50 फीसद मामले पुरुष पार्टनर से जोड़े जाते हैं।

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अखरोट अकेला ऐसा मेवा है जो पौधा आधारित ओमेगा-3 फैटी ऐसिड- अल्फा-लिनोलेनिक एसिड (एएलए) का शानदार स्रोत है। बहरहाल, एएलए के अलावा अखरोट में उच्च ऐंटी-ऑक्सिडेंट हैं, और साथ ही अनेक माइक्रो-न्यूट्रिशिएंट भी जिनके बारे में वेंडी का सोचना है कि उन सब का मिला जुला असर पड़ता है।

‘कैलीफोर्निया वालनट कमिशन’ की पोषण सलाहकार कैरोल बर्ग स्लोआन ने कहा कि खाने का रिश्ता मानव प्रजनन सफलता से जोड़ा जाता है। लेकिन ज्यादातर जोर मां के भोजन पर होता है और बहुत कम जोर पिता के भोजन पर होता है। कैरोलन ने कहा कि वेंडी के अध्ययन ने यह जताया है कि पिता के भोजन का प्रभाव ना सिर्फ प्रजनन-क्षमता पर होता है, बल्कि यह बच्चे और आने वाली पीढ़ियों के स्वास्थ्य को भी प्रभावित करता है।

यूसीएलए के अनुसंधान में 117 स्वस्थ युवकों को शामिल किया गया था। उन्हें पाश्चात्य शैली का भोजन दिया गया। उनमें से तकरीबन आधे लोगों ने 12 हफ्तों तक रोजाना 75 ग्राम अखरोट का सेवन किया। बाकी लोगों ने इसका सेवन नहीं किया। वेंडी ने बताया कि 12 हफ्तों के बाद अखरोट का सेवन करने वाले युवकों के समूह में शुक्राणु जीवन-शक्ति, गतिशीलता और सामान्य आकृति में सुधार पाया गया।


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