अगर आप को भी ‘सू-सू’ रोकने की आदत है, तो आपका शरीर बन रहा है खतरनाक बीमारियों के लिए घर

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अगर आप को भी ‘सू-सू’ रोकने की आदत है,

तो आपका शरीर बन रहा है खतरनाक बीमारियों के लिए घर

दोस्तों अगर कोई आपके सामने यह बोले कि मुझे Urine करना पसंद नहीं, तो आपका क्या रिएक्शन होगा? जहां तक मेरा मानना है कि बार-बार Urine करना स्वस्थ इंसान की निशानी है. यह एक शारीरिक क्रिया है. बहुत से लोग ऐसे होते हैं जो दिन में केवल 2 या 3 बार ही टॉयलेट जाते हैं. अगर आप भी उन लोगों में से एक हैं तो आपकी जानकारी के लिए आज हम कुछ बाते बताने जा रहे हैं, जिन्हें जान कर आपको समझ आएगा कि आप अपने शरीर और स्वास्थ्य के साथ कितना गलत कर रहे हैं.

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Urine को रोकना कितना नुकसानदेह होता है?

Urine शरीर की एक सामान्य प्रक्रिया है, जिसे महसूस होने पर एक से दो मिनट के अंदर निकाल देना चाहिए. कुछ लोग Urine को कुछ मिनट के लिए तो कुछ कई घंटों के लिए रोक कर रखते है. लेकिन Urine को रोककर रखने वाले लोग शायद इस बात से अंजान होते हैं कि इस तरह से Urine इन्फेक्शन का खतरा बढ़ता है और साथ ही वो इसे महसूस करने की क्षमता को भी खो देते हैं.

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Image Source: wordpress

– जितना लंबे समय तक आप Urine को रोककर रखेगें, आपका ब्‍लैडर बैक्‍टीरिया को अधिक विकसित कर कई प्रकार के स्वास्थ्य जोखिम का कारण बन सकता है. इसके अलावा किडनी फेल होने की संभावना भी बढ़ जाती है.

-बहुत अधिक देर Urine को रोकने से Urine का रंग भी बदलने लगता है. हालांकि ऐसा होने के पीछे सबसे अधिक संभावना संक्रमण की होती है.

– पसीने की तरह Urine के माध्यम से भी शरीर के गैर जरूरी तत्व बाहर निकलते हैं. यदि वह थोड़े समय भी अधिक शरीर में रहते हैं, तो संक्रमण की शुरुआत हो सकती है.

कामकाजी लोगों पर कैसे असर डालता है Urine रोकना

कामकाजी लोग जो 8 से 10 घंटे बैठ कर काम करते हैं उनको Urine की जरूरत ही तब महसूस होती हैं, जब उनका काम खत्म होता है या वो लंच के लिए ब्रेक लेते हैं, जो बहुत गलत है. इस दौरान किडनी से यूरिनरी ब्लैडर में Urine इकठ्ठा होने लगता है. ब्लैडर खाली करने में देरी से Urine किडनी में वापस जाने लगता है. ऐसी स्थिति बार-बार होने से पथरी बनने की शुरूआत हो जाती है, क्योंकि Urine में यूरिया और अमिनो एसिड जैसे टॉक्सिक तत्व होते हैं.

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Urine रोकने से क्या-क्या समस्याएं हो सकती हैं?

– किडनी में स्टोन

– Urinary Tract Infection (UTI)

– Urine का रंग बदलना

– ब्लैडर की मांसपेशियों का कमजोर होना

एक दिन में कितनी बार जाना चाहिए टॉयलेट?

वैसे तो जब भी आपको महसूस हो कि आपको टॉयलेट जाना है तब ही जाना चाहिए. टॉयलेट जाने की फील आपके पानी पीने की मात्रा पर निर्भर करती है. अगर आप ज्यादा पानी पियेंगे, तो हर घंटे या दो घंटे में आपको टॉयलेट जाना पड़ेगा.

तो दोस्तों अब आपको तो ये पता ही चल गया होगा कि Urine कम और ज्यादा आना दोनों ही स्थिति में पानी की मुख्य भूमिका है. अब हम आपको बता रहे हैं कि एक दिन में कितना पानी पीना चाहिए ताकि आपका Urinary System सही तरह से काम करता रहे और आप स्वस्थ्य रहें.

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– एक दिन में कम से कम 8 से 10 गिलास पानी ज़रूर पीन चाहिए.

– पानी नहीं पी पा रहे हैं तो आप ऐसे फलों का अधिक से अधिक सेवन करें जिनमें पानी की मात्रा ज्यादा हो और जो आपको पूरी तरह से हाइड्रेट रखें. जैसे तरबूज, संतरा, खीरा, ककड़ी आदि.

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– इसके अलावा आप पानी की जगह लाइम वाटर, छाछ, शिकंजी, जूस आदि भी पी सकते हैं.

ध्यान देने वाली एक बात और है कि अगर आप योगा, व्यायाम या जिमिंग करते हैं तो उस दौरान भी आपको ज्यादा से ज्यादा पानी पीना चाहिए. ऐसा इसलिए क्योंकि व्यायाम करते वक़्त और करने के बाद पसीना बहुत आता है, जिससे शारीर में पानी की कमी हो जाती है.

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