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सेक्स स्वास्थ्य के लिए एक नयी भारतीय इन्फोलाइन

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मानावाधिकार संघठन क्रीआ ने हाल ही में एक इन्फोलाइन की शुरुआत की है जिसका नाम है ‘कही अनकही बातें’I इस बारे में और जानकारी प्राप्त करने के लिए लव मैटर्स ने क्रीआ की अनुभा सिंह से बात कीI

अनुभा सिंह क्रीआ में प्रोग्राम संयोजक हैंI क्रीआ मानवाधिकारों और महिलाओ को उनके अधिकार दिलाने के क्षेत्र में कार्यरत है और उसका ऑफिस दिल्ली में स्थित हैI 

लव मैटर्स: क्या इस तरह की इन्फो -लाइन की भारत में ज़रूरत है?

क्रीआ: आमतौर पर भारत में सेक्स और प्रजनन सम्बन्धी जानकारी प्रशिक्षण के ज़रिये या फिर विकास क्षेत्र में काम कर रहे संघों के द्वारा प्रदान की जाती  है I हिंदी बोलचाल वाले दूरदराज इलाकों में इस तरह की जानकारी प्रदान करने वाले संस्थान बहुत कम हैं I क्रीआ इन लोगों को एक बेहतर सेवा देने के लिए प्रतिबद्ध हैI

भारतीय युवाओं के मन में इस विषय को लेकर बहुत सारी गलत धारणाएं हैंI ग्रामीण परिवेश में तो खासकर सेक्स स्वास्थ्य और कामुकता के सन्दर्भ में चर्चा बहुत सीमित दायरे में की जाती हैI इस इन्फोलाइन के ज़रिये हम एक ऐसा मंच प्रदान करना चाहते हैं जहाँ टेक्नोलॉजी की मदद से एक व्यक्ति के यौन और प्रजनन सम्बन्धी सवाल, सुझाव और विचारों को दूसरे लोगों के साथ साझा कर सकेंIoldveda-old-veda-logo-banner-health-lifestyle-ayurveda

लव मैटर्स: यह ‘इन्फो-लाइन’ किस तरह से काम करती हैI

क्रीआ: यह एक शुल्क फ्री सर्विस है और उसी आई.वी.आर तकनीक पर आधारित है जो सभी मोबाइल फोनों में पायी जाती हैI इसके लिए ना तो इंटरनेट की ज़रूरत है और ना ही कोई एप्लीकेशन डाउनलोड करने कीI उपभोक्ता को केवल हमारे दिए हुए नंबर पर मिस्ड कॉल देनी है और वो 3 से 5 मिनट के सूचनात्मक ऑडियो एपिसोड मुफ्त सुन सकते हैंI

कोई भी उपभोक्ता 09266292662 पर मिस्ड कॉल कर सकता है और हम उन्हें वापस कॉल करेंगेI परन्तु यह एक हेल्पलाइन नहीं है और किसी को सलाह मशवरा देना इस योजना का हिस्सा नहीं हैI जब एक उपभोक्ता फ़ोन करेगा तो उसे उसके जवाबों के आधार पर पहले से अभिलिखित सन्देश सुनायी देंगेI

Info line on sexual health

लव मैटर्स: आप किस तरह की जानकारी प्रदान कर रहे हैं?

क्रीआ: हमारे अभिलेख दो अलग-अलग माध्यमों में हैंI पहला माध्यम एक अभियान है जिसमे हर हफ्ते दो नए एपिसोड होंगेI विशेषज्ञों के साथ साक्षात्कार, सुझाव और लोगों के प्रमाणकों को छोटे-छोटे सूचनात्मक संदेशो के ज़रिये हर शुक्रवार उपभोक्ताओं को सुनाया जायेगा और उसी विषय पर एक ड्रामा श्रृंखला की प्रस्तुति हर मंगलवार को होगीI

दूसरा माध्यम है ‘जानकारी’ जहाँ लोगों की प्रतिक्रियाओं के आधार पर सेक्स स्वास्थ्य से जुड़े विषयों पर कुछ स्थाई अभिलेख होंगेI यहाँ पर उपभोक्ताओं को अपने सवालों को रिकॉर्ड करवाने का मौक़ा भी दिया जायेगा जिनके जवाब एपिसोड के आख़री खंड में दिए जाएंगेI

लव मैटर्स: इस इन्फो-लाइन के ज़रिये आप किन महत्त्वपूर्ण विषयों पर अपना ध्यान केंद्रित कर रहे हैं?

क्रीआ: हर महीने हम अपने ‘अभियान’ चैनल के लिए नया मुद्दा चुन लेते हैं, जैसे कि पिछले महीने हमने गर्भपात के विषय में बात करी थी वही इस महीने हम पंचायती चुनावों पर चर्चा करेंगेI हमने निर्णय किया है कि सामान्य विषयों, जैसे महिला हस्तमैथुन, हस्तमैथुन से जुडी गलत धारणाएंऔर जननांगों पर ध्यान केन्दित किया जाएँI

हमने एक परामर्श-समिति का भी गठन किया है जो प्रतिमास मुद्दे चुनने और रेडियो पर जानकारी देने में हमारी मदद करेगीI विभिन्न संस्थाओं, जिनमे लव मैटर्स भी शामिल है, से सलाहकार इन चर्चाओ में सम्मिलित होते हैं और जानकारी तैयार करने में हमारी सहायता करते हैंI कई और एस.आर.एच.आर. संस्थाएं जैसे तारशी, समर्थयम और गुडगाँव की आवाज़ भी हमारे साथ हैंI

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लव मैटर्स: क्या यह इन्फो-लाइन सुरक्षित और विश्वसनीय है?

क्रीआ- हमारी तकनीकी पार्टनर, ग्रामवाणी ने ऐसी बहुत सी आई.वी.आर. प्रणालियां लागू की हैं जहाँ आंकड़े और सामग्री केवल उन्ही चंद लोगों को मुहैया कराई गयी थी जो उस योजना का हिस्सा थेI हम जानते हैं कि जिन मुद्दो के बारे में हम बात करते हैं वे बेहद संवेदनशील हैं तो हम यह सुनिश्चित करते हैं कि हमारे उपभोक्ताओं की गोपनीयता बनी रहेI इसके अलावा हम उपभोक्ताओं के द्वारा पूछे गए एक जैसे सवालों का जवाब भी सामूहिक रूप से देते हैं ना की किसी एक उपभोक्ता को अलग से सम्बोधित करते हैंI

लव मैटर्स: इस तरह की सेवा चलाने में आपको क्या-क्या चुनौतियों का सामना करना पड़ता है?

क्रीआ: हमारे लिए सबसे बड़ी चुनौती होती है, हर महीने सही मुद्दे का चुनावI हमारी परामर्श-समिति कई सुझावों पर विचार-विमर्श करती हैI हम अपने उपभोक्ताओं से सर्वे भी भरवाते हैं और उसके बाद ही उस महीने क्या मुद्दा होगा इस नतीजे पर पहुंचा जाता हैI

हमारे उपभोक्ताओं तक सही जानकारी पहुँचाना और उन्हें उनके अधिकारों से अवगत करवाना हमारी अगली चुनौती हैI हम अपने एपिसोड इस तरह से नियोजित करते हैं कि दी जा रही जानकारी हर कॉलर को भली-भांति समझ आ सकेI पिछले महीने हमें दो हज़ार फ़ोन आये थे और अब हम इस सर्विस को ऑफलाइन कार्यक्रमों के माध्यम से भी बढ़ावा दे रहे हैंI

 

अगर आपको सेक्स स्वास्थ्य से सम्बंधित किसी विषय में जानकारी चाहिए तो 09266292662पर बेहिचक कॉल करेंI यह सेवा हिंदी और अंग्रेज़ी दोनों में उपलब्ध हैI


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पीरियड्स के दौरान खाएं ये फूड्स, दर्द से मिलेगी राहत

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पीरियड्स महिलाअों के लिए बहुत ही बड़ी समस्या है इसमें उनके कई परेशानियां का सामना करना पड़ता है जैसे दर्द, कमजोरी और चिड़चिड़ापन। इन से महिलाअों की दिनचर्या पर काफी असर पड़ता है लेकिन अगर इन दिनों अाप अपनी डाइट सही रखें तो अाप इन समस्याअों से बच सकती है। अाज हम आपको कुछ एेसी चीजों के बारे में बताएंगे जिनका पीरियड्स के दौरान सेवन करने से फिजिकल और मेंटल प्रॉब्लम्स को दूर कर सकती है।

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1. एेलोवेरा जूस

अगर अापको पीरियड्स के दर्द से छुटकारा पाना है तो एक एेलोवेरा जूस में एक चम्मच एक चम्मच शहद अौर पानी मिलाकर कर पीने से दर्द, कमजोरी अौर अधिक ब्लीडिंग से राहत मिलती है।

2. तुलसी

पानी में 7-8 पत्ते उबालकर उसमें एक चम्मच शहद मिलाकर पीने से राहत मिलती है।

3. अलसी

सुबह नाश्ते में भूनी हुई अलसी लेने से पारियड्स के दर्द से छुटकारा मिलता है।
 

3. ग्रीन टी

ग्रीन टी पीने से शरीर के मसल्स रिलैक्स महसूस करते है अौर दर्द में राहत मिलती है।

4. पाइन एप्पल

पीरियड्स के दिनों में पाइन एप्पल का खुब सेवन करने से हर तरह के दर्द से छुटकारा मिलता है।

5. अदरक 

पानी में अदरक डाल कर उबाल लें अौर फिर इसमें थोड़ा सा शहद मिलाकर पी लें इससे दर्द से झट से राहत मिलती है।

6. खसखस अौर गर्म दूध

दूध में खसखस मिलाकर पीने से कमजोरी भी दूर होती है अौर साथ ही साथ खून की कमी भी पूरी होती है।

7. केला 

पीरियड्स के दौरान केला खाने से मूड भी सही बना रहता है अौर एनर्जी भी।


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Sex & Relation

लहसुन की सिर्फ 2 से 3 कली आपके जीवन में कर सकती हैं ये बड़ा कमाल

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लहसुन की सिर्फ 2 से 3 कली आपके जीवन में कर सकती हैं ये बड़ा कमाल

क्या आप लिबिडो की कमी या बिस्तर पर सही प्रदर्शन नहीं कर पाने की समस्या से जूझ रहे हैं? अगर हां, तो एक सरल उपाय से आप इस समस्या से छुटकारा पा सकते हैं और अपनी सेक्स क्षमता बढ़ा सकते हैं। जी हां, ये आसान उपाय कुछ और नहीं बल्कि आपके किचन में मिलने वाली चीज लहसुन है। लहसुन एक ऐसा मसाला या खाद्य सामग्री है, जो आपको आसानी से उपलब्ध होता है। लहसुन की छोटी-छोटी कलियां सिर्फ खाने का जायका ही नहीं बढ़ाती बल्कि इनके बहुत सारे औषधीय गुण भी होते हैं। बेशक लहसुन स्वाद में कड़वा होता है लेकिन इसमें आपकी सेक्स लाइफ में मिठास घोलने की पूरी क्षमता होती है।

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लहसुन ही क्यों
लहसुन एक शक्तिशाली कामोत्तेजक (aphrodisiac) है, जो सेक्स क्षमता सुधारने के लिए बहुत प्रभावी माना जाता है। वास्तव में लहसुन आपके यौन स्वास्थ्य के लिए बहुत लाभकारी है। ये यौन इच्छा को बढ़ाने के लिए एक टॉनिक के रूप में कार्य करता है। इतना ही नहीं इससे कम लिबिडो के कारण आपके सेक्स प्रदर्शन पर पड़ने वाले प्रभाव को भी कम करने में मदद मिलती है।

आपको क्या चाहिए

  • लहसुन की केवल 2 से 3 कली

इसका इस्तेमाल ऐसे करें

  • डॉक्टर बखरू के अनुसार, आपको अपनी लिबिडो बढ़ाने के लिए रोजाना लहसुन की 2 से 3 कच्ची कली खानी चाहिए।

टिप- लहसुन खाने के बाद अच्छी तरह से ब्रश ज़रूर करें। दरअसल इसे खाने के बाद मुंह से बदबू आती है। जाहिर हैं, ये बदबू आपको किसिंग के दौरान महंगी पड़ सकती है।


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Dry Fruits

शुक्राणु बढ़ाना चाहते हैं तो रोजाना खायें मुट्ठी भर अखरोट

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लॉस एंजिलिस : पुरुषों की शुक्राणु संख्या दुनिया भर में एक बड़ी समस्या मानी जाती है और वैज्ञानिकों का कहना है कि इसे बढ़ाने का बहुत आसान तरीका है मुट्ठी भर अखरोट खाना।

यूसीएलए स्कूल ऑफ नर्सिंग की प्रोफेसर वेंडी रॉबिन्स ने बताया, ‘अखरोट और पुरुष प्रजनन-क्षमता के संबंध में हमने जो प्राथमिक अनुसंधान किया उसमें हमने भोजन में अखरोट जोड़ने पर शुक्राणुओं के पहलुओं में सुधार पाया जिसने हमारे लिए पुरूष प्रजनन-क्षमता और प्रजनन स्वास्थ्य पर अखरोट के प्रभावों का और अध्ययन करने का एक मंच तय किया।’ वेंडी ने कहा, ‘नई परियोजना चल रही हैं और हमें उम्मीद है कि निकट भविष्य में इसके बारे में आपसे साझा करने में सक्षम होंगे।’ उन्हेंने बताया कि रोजाना 75 ग्राम अखरोट के सेवन से 21 से 35 साल के आयुवर्ग के स्वस्थ पुरुषों के समूह में शुक्राणु जीवन-शक्ति, गतिशीलता और सामान्य आकृति में सुधार हुआ।

विज्ञान पत्रिका ‘बायोलोजी ऑफ रिप्रोडक्शन’ में प्रकाशित यह अध्ययन दुनिया भर में सात करोड़ से ज्यादा दंपतियों के लिए अहम हैं जिन्हें प्रजनन क्षमता की दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। वैज्ञानिकों का कहना है कि इनमें से 30 से 50 फीसद मामले पुरुष पार्टनर से जोड़े जाते हैं।

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अखरोट अकेला ऐसा मेवा है जो पौधा आधारित ओमेगा-3 फैटी ऐसिड- अल्फा-लिनोलेनिक एसिड (एएलए) का शानदार स्रोत है। बहरहाल, एएलए के अलावा अखरोट में उच्च ऐंटी-ऑक्सिडेंट हैं, और साथ ही अनेक माइक्रो-न्यूट्रिशिएंट भी जिनके बारे में वेंडी का सोचना है कि उन सब का मिला जुला असर पड़ता है।

‘कैलीफोर्निया वालनट कमिशन’ की पोषण सलाहकार कैरोल बर्ग स्लोआन ने कहा कि खाने का रिश्ता मानव प्रजनन सफलता से जोड़ा जाता है। लेकिन ज्यादातर जोर मां के भोजन पर होता है और बहुत कम जोर पिता के भोजन पर होता है। कैरोलन ने कहा कि वेंडी के अध्ययन ने यह जताया है कि पिता के भोजन का प्रभाव ना सिर्फ प्रजनन-क्षमता पर होता है, बल्कि यह बच्चे और आने वाली पीढ़ियों के स्वास्थ्य को भी प्रभावित करता है।

यूसीएलए के अनुसंधान में 117 स्वस्थ युवकों को शामिल किया गया था। उन्हें पाश्चात्य शैली का भोजन दिया गया। उनमें से तकरीबन आधे लोगों ने 12 हफ्तों तक रोजाना 75 ग्राम अखरोट का सेवन किया। बाकी लोगों ने इसका सेवन नहीं किया। वेंडी ने बताया कि 12 हफ्तों के बाद अखरोट का सेवन करने वाले युवकों के समूह में शुक्राणु जीवन-शक्ति, गतिशीलता और सामान्य आकृति में सुधार पाया गया।


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