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स्वप्न दोष क्या है और क्यो होता है?

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स्वपन दोष जैसा कि इसके नाम से प्रतीत होता है कि यह स्वप्न से संबधित रोग है।तो हाँ यह सच है कि यह स्वप्न से संबधित रोग है।यह रोग अधिकतर युवाओं में पाया जाता है।अंग्रेंजी में यह  रोग स्पर्माटोरिया के नाम से जाना जाता है।सामान्य अवस्था में  स्त्री व पुरुष के सम्मिलन की चरमावस्था पर पुरुष का वीर्य स्खलित होता है। या यह कहा जा सकता है कि वीर्य़ का स्खलन संभोग  की चरम सीमा है जिसमें पुरुष का वीर्य स्खलित होता है। इसमें पुरुष व स्त्री शारीरिक व मानसिक तल पर एक साथ सम्मिलित होते हैं।और दोनो का एक ही लक्ष्य होता है सम्भोग की चरम अवस्था पर पहुँच कर  परमानन्द की अनुभूति  प्राप्त करना।

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लैकिन स्वपन दोष एक एसी अवस्था या प्रक्रिया है जिसमें कोई भी स्त्री शारीरिक रुप से उपस्थित नही होती है ।व्यक्ति केवल स्वप्न में स्त्री या कामिनी को  देखता है और शारीरिक रुप से किसी स्त्री की अनुस्थिति होने के कारण से व्यक्ति केवल कल्पना में ही सारे सम्भोग को करता है। और उस मानसिक सम्भोग की पूर्णता से पहले या पूर्णता पर वीर्य का स्खलन हो जाता है।इस असामान्य स्थिति को स्वप्न दोष कहते है। यह व्यक्ति के सोच विचार का परिणाम होता है।इस रोग को वैसे रोग कहना अतिशयोक्ति ही होगी।
लैकिन यह महिने में अगर 1 या 2 बार ही हो तो सामान्य बात कही जा सकती है।और यह कहा जा सकता है कि कोई रोग नही है किन्तु यदि यह इससे ज्यादा बार होता है तो वीर्य की या शुक्र की हानि होती है और व्यक्ति को शारीरिक कमजोरी का अहसास होता है। क्योंकि यह शुक्र भी रक्त कणों से पैदा होता है ।अतः अत्यधिक शुक्र क्षय व्यक्ति को कमजोर कर देता हैं।
अधिकतर तो स्वप्न दोष अपनी इच्छा के विपरीत ही होता है किन्तु कभी कभी यह ऐच्छिक भी हो सकता है।
इस क्रिया मे रोगी मानसिक रुप से सम्भागावस्था में होता है किन्तु वास्तविकता में  शारिरिक रुप से ऐसा न होने के कारण तथा स्त्री की अनुपस्थिति होने के कारण न तो कभी संभोग का वास्तविक आनन्द ही प्राप्त हो सकता है औऱ न ही संतुष्टि ही मिल सकती है।वल्कि यह तो मानसिक दुर्बलता,कुण्ठित व्यक्तित्व व आध्यात्मिक दुर्बलता का प्रतीक है।
कारण-   स्वप्न दोष के अनेकों कारण हो सकते हैं ।लैकिन प्रमुख कारणों में अश्लील चिंतन,अश्लील फिल्म देखना व नारी स्मरण मुख्य हैं ।इसके अलावा पेट में कब्ज रहना, नाड़ी तन्त्र की दुर्वलता भी एसी स्थितियाँ पैदा कर सकता है।गन्दी फिल्में व गंदे फोटो देखना गंदी कहानियो व उपन्यासों को पढ़ने से हमारा अवचेतन मस्तिष्क एसी ही बातों को सोचता रहता है जिसे जागते में तो समाज के भय से पूरा नही कर पाता उसे  सोते समय वह पूरा करना चाहता है।और एसे चिन्तन के फलस्वरुप जिसका चिन्तन वह पूरे समय करता रहा है वो चीजे सपने में प्रकट हो जाती हैं.और यह समपन्न हो जाता है।कभी कभी अचानक के भय लगने से भी शरीर बहुत शिथिल हो जाता है जिसके कारण शरीर के अंग प्रत्यंगो की क्रियाविधि पर मस्तिष्क का कंट्रोल कम हो जाता है फलस्वरुप कभी कभी स्वप्न दोष हो जाता है।
देर से शादी होना भी एक कारण हो सकता है।कभी कभी प्रेमिका से या पत्नी से किसी काऱण दूरी होना जिसमें दोनो का आपस में प्रवल आकृषण हो एसी अवस्था में भी स्वप्न दोष हो जाता है।
ऐसा नही है कि स्वप्न दोष केवल पुरुषों को ही होता है यह  स्त्रियों को भी होता है बस अन्तर इतना है कि वहाँ वीर्य की जगह योनि से आर्तव आ जाता है।जिसे सामान्य भाषा में रज कहते हैं।
अन्य कारणों में एक कारण ज्यादा मिर्च मसालों का प्रयोग,सुस्वादु व  गरिष्ठ भोजन तथा विलासता पूर्ण रहन सहन भी इस रोग के लिए उत्तर दायी हैं।
परिणाम- रोगी का शरीर दुवला पतला व शारीरिक कमजोरी से ग्रसित हो जाता है।अत्यधिक ग्रसित होने पर पैरों की शिथिलन व स्मरण शक्ति कमजोर होना मन में खिन्नता होना  व अण्डकोषों का लटक जाना भी हो सकता है।इस रोग के रोगी का काम में मन नही लगता औऱ सम्भोग के समय अचानक लिंग  में शिथिलता की स्थिति  पैदा हो सकती है।और इस कारण शर्म के कारण व्यक्ति कई बार एकाकी सा जीवन विताने लगता है।रोगी का मन हमेशा काम क्रियाओं की बात सोचता रहता है।जिससे रात के समय तीव्र उत्तेजना होती है औऱ सुबह जागने के समय भी लिंग की उत्तेजना होती है।कभी कभी शौंच के समय पतला वीर्य गिरता है सांस फूलने लगती है।तथा हर समय लिंग का कड़ापन सा बना रहता है।औऱ भी ज्यादा खतरनाक स्थिति तब हो जाती है जब जननेन्द्रिय हमेशा कड़ी वनी रहै या उत्तेजित रहे तथा स्वप्न दोष के बाद अत्यधिक कमजोरी हो जाए ,कान से अलग तरह की आवाजे सुनाई देने लगें।
रोग का इलाजः – अनेकों बार की तरह में फिर यही कहूँगा कि कारण का निवारण ही सच्चा इलाज है।इसके अलावा
सतगिलोय, शीतलचीनी,सफेद मूसली,कतीरा गोंद,सत शिलाजीत और प्रवाल पिष्टी सब 10-10 ग्राम,शीतल वंग 5 ग्राम,औऱ भीमसेनी कपूर व केशर 1-1 ग्राम लेकर सभी अण्डर लाइन औषधियों  को अलग करके बारीक चूर्ण कर कपड़छन कर लें तथा अन्य दवाऐं भी अलग बारीक करके डाल लें ।फिर गुलाबजल के साथ खरल करें।फिर केसर डाल कर घोटें और चौथाई-2 ग्राम की गोलियाँ बना लें।
मात्रा- एक एक गोली प्रातः सांय गिलोय के स्वरस के स्वरस और शहद के साथ सेवन करें। स्वपनदोष दूर करने में व प्रमेह के अनेक उपसर्गों में लाभकारी है।

Feature image courtesy : gettyimages


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पीरियड्स के दौरान खाएं ये फूड्स, दर्द से मिलेगी राहत

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पीरियड्स महिलाअों के लिए बहुत ही बड़ी समस्या है इसमें उनके कई परेशानियां का सामना करना पड़ता है जैसे दर्द, कमजोरी और चिड़चिड़ापन। इन से महिलाअों की दिनचर्या पर काफी असर पड़ता है लेकिन अगर इन दिनों अाप अपनी डाइट सही रखें तो अाप इन समस्याअों से बच सकती है। अाज हम आपको कुछ एेसी चीजों के बारे में बताएंगे जिनका पीरियड्स के दौरान सेवन करने से फिजिकल और मेंटल प्रॉब्लम्स को दूर कर सकती है।

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1. एेलोवेरा जूस

अगर अापको पीरियड्स के दर्द से छुटकारा पाना है तो एक एेलोवेरा जूस में एक चम्मच एक चम्मच शहद अौर पानी मिलाकर कर पीने से दर्द, कमजोरी अौर अधिक ब्लीडिंग से राहत मिलती है।

2. तुलसी

पानी में 7-8 पत्ते उबालकर उसमें एक चम्मच शहद मिलाकर पीने से राहत मिलती है।

3. अलसी

सुबह नाश्ते में भूनी हुई अलसी लेने से पारियड्स के दर्द से छुटकारा मिलता है।
 

3. ग्रीन टी

ग्रीन टी पीने से शरीर के मसल्स रिलैक्स महसूस करते है अौर दर्द में राहत मिलती है।

4. पाइन एप्पल

पीरियड्स के दिनों में पाइन एप्पल का खुब सेवन करने से हर तरह के दर्द से छुटकारा मिलता है।

5. अदरक 

पानी में अदरक डाल कर उबाल लें अौर फिर इसमें थोड़ा सा शहद मिलाकर पी लें इससे दर्द से झट से राहत मिलती है।

6. खसखस अौर गर्म दूध

दूध में खसखस मिलाकर पीने से कमजोरी भी दूर होती है अौर साथ ही साथ खून की कमी भी पूरी होती है।

7. केला 

पीरियड्स के दौरान केला खाने से मूड भी सही बना रहता है अौर एनर्जी भी।


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Sex & Relation

लहसुन की सिर्फ 2 से 3 कली आपके जीवन में कर सकती हैं ये बड़ा कमाल

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लहसुन की सिर्फ 2 से 3 कली आपके जीवन में कर सकती हैं ये बड़ा कमाल

क्या आप लिबिडो की कमी या बिस्तर पर सही प्रदर्शन नहीं कर पाने की समस्या से जूझ रहे हैं? अगर हां, तो एक सरल उपाय से आप इस समस्या से छुटकारा पा सकते हैं और अपनी सेक्स क्षमता बढ़ा सकते हैं। जी हां, ये आसान उपाय कुछ और नहीं बल्कि आपके किचन में मिलने वाली चीज लहसुन है। लहसुन एक ऐसा मसाला या खाद्य सामग्री है, जो आपको आसानी से उपलब्ध होता है। लहसुन की छोटी-छोटी कलियां सिर्फ खाने का जायका ही नहीं बढ़ाती बल्कि इनके बहुत सारे औषधीय गुण भी होते हैं। बेशक लहसुन स्वाद में कड़वा होता है लेकिन इसमें आपकी सेक्स लाइफ में मिठास घोलने की पूरी क्षमता होती है।

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लहसुन ही क्यों
लहसुन एक शक्तिशाली कामोत्तेजक (aphrodisiac) है, जो सेक्स क्षमता सुधारने के लिए बहुत प्रभावी माना जाता है। वास्तव में लहसुन आपके यौन स्वास्थ्य के लिए बहुत लाभकारी है। ये यौन इच्छा को बढ़ाने के लिए एक टॉनिक के रूप में कार्य करता है। इतना ही नहीं इससे कम लिबिडो के कारण आपके सेक्स प्रदर्शन पर पड़ने वाले प्रभाव को भी कम करने में मदद मिलती है।

आपको क्या चाहिए

  • लहसुन की केवल 2 से 3 कली

इसका इस्तेमाल ऐसे करें

  • डॉक्टर बखरू के अनुसार, आपको अपनी लिबिडो बढ़ाने के लिए रोजाना लहसुन की 2 से 3 कच्ची कली खानी चाहिए।

टिप- लहसुन खाने के बाद अच्छी तरह से ब्रश ज़रूर करें। दरअसल इसे खाने के बाद मुंह से बदबू आती है। जाहिर हैं, ये बदबू आपको किसिंग के दौरान महंगी पड़ सकती है।


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शुक्राणु बढ़ाना चाहते हैं तो रोजाना खायें मुट्ठी भर अखरोट

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लॉस एंजिलिस : पुरुषों की शुक्राणु संख्या दुनिया भर में एक बड़ी समस्या मानी जाती है और वैज्ञानिकों का कहना है कि इसे बढ़ाने का बहुत आसान तरीका है मुट्ठी भर अखरोट खाना।

यूसीएलए स्कूल ऑफ नर्सिंग की प्रोफेसर वेंडी रॉबिन्स ने बताया, ‘अखरोट और पुरुष प्रजनन-क्षमता के संबंध में हमने जो प्राथमिक अनुसंधान किया उसमें हमने भोजन में अखरोट जोड़ने पर शुक्राणुओं के पहलुओं में सुधार पाया जिसने हमारे लिए पुरूष प्रजनन-क्षमता और प्रजनन स्वास्थ्य पर अखरोट के प्रभावों का और अध्ययन करने का एक मंच तय किया।’ वेंडी ने कहा, ‘नई परियोजना चल रही हैं और हमें उम्मीद है कि निकट भविष्य में इसके बारे में आपसे साझा करने में सक्षम होंगे।’ उन्हेंने बताया कि रोजाना 75 ग्राम अखरोट के सेवन से 21 से 35 साल के आयुवर्ग के स्वस्थ पुरुषों के समूह में शुक्राणु जीवन-शक्ति, गतिशीलता और सामान्य आकृति में सुधार हुआ।

विज्ञान पत्रिका ‘बायोलोजी ऑफ रिप्रोडक्शन’ में प्रकाशित यह अध्ययन दुनिया भर में सात करोड़ से ज्यादा दंपतियों के लिए अहम हैं जिन्हें प्रजनन क्षमता की दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। वैज्ञानिकों का कहना है कि इनमें से 30 से 50 फीसद मामले पुरुष पार्टनर से जोड़े जाते हैं।

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अखरोट अकेला ऐसा मेवा है जो पौधा आधारित ओमेगा-3 फैटी ऐसिड- अल्फा-लिनोलेनिक एसिड (एएलए) का शानदार स्रोत है। बहरहाल, एएलए के अलावा अखरोट में उच्च ऐंटी-ऑक्सिडेंट हैं, और साथ ही अनेक माइक्रो-न्यूट्रिशिएंट भी जिनके बारे में वेंडी का सोचना है कि उन सब का मिला जुला असर पड़ता है।

‘कैलीफोर्निया वालनट कमिशन’ की पोषण सलाहकार कैरोल बर्ग स्लोआन ने कहा कि खाने का रिश्ता मानव प्रजनन सफलता से जोड़ा जाता है। लेकिन ज्यादातर जोर मां के भोजन पर होता है और बहुत कम जोर पिता के भोजन पर होता है। कैरोलन ने कहा कि वेंडी के अध्ययन ने यह जताया है कि पिता के भोजन का प्रभाव ना सिर्फ प्रजनन-क्षमता पर होता है, बल्कि यह बच्चे और आने वाली पीढ़ियों के स्वास्थ्य को भी प्रभावित करता है।

यूसीएलए के अनुसंधान में 117 स्वस्थ युवकों को शामिल किया गया था। उन्हें पाश्चात्य शैली का भोजन दिया गया। उनमें से तकरीबन आधे लोगों ने 12 हफ्तों तक रोजाना 75 ग्राम अखरोट का सेवन किया। बाकी लोगों ने इसका सेवन नहीं किया। वेंडी ने बताया कि 12 हफ्तों के बाद अखरोट का सेवन करने वाले युवकों के समूह में शुक्राणु जीवन-शक्ति, गतिशीलता और सामान्य आकृति में सुधार पाया गया।


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