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स्कैबीज़

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स्कैबीज़, कुटकी से होने वाला खुजली वाला त्वचा का संक्रमण है।

स्कैबीज़ के अंडो और मल से होने वाले एलर्जिक प्रतिक्रिया के कारण आपको दाने या मुंहासे होते हैं।

अच्छी बात यह है कि स्कैबीज़ का इलाज किया जा सकता है!

स्कैबीज़ कैसे पड़ते हैं?

स्कैबीज़ एक-दूसरे के शरीर के नज़दीकी संपर्क में आने से पड़ते हैं, जिसमें सेक्स करना भी शामिल है। इनके लगने का दूसरा तरीका स्कैबीज़ से संक्रमित किसी व्यक्ति के कपड़े, बिस्तरे या फर्नीचर का आदान-प्रदान करना हैं।

भीड़भाड़ वाली जगहें, जैसे कि जेल, नर्सिंग होम और बच्चों की देखभाल करने वाले स्थान स्कैबीज़ संक्रमण फैलने के लिए उपयुक्त स्थान हैं।

यह बात जान लेनी ज़रूरी है कि स्कैबीज़ से संक्रमित व्यक्ति बिना किसी लक्षण दिखे किसी दूसरे व्यक्ति तक इसे फैला सकता है।

 

स्कैबीज़ या चीलरों से आप कैसे बच सकते हैं?

1. जूएं से संक्रमित किसी व्यक्ति के साथ सेक्स न करें।
2. बिस्तरे, कपड़े और आदान-प्रदान की जाने वाली दूसरी वस्तुओं को बहुत गर्म या उबलते पानी में धोएं।

यदि आप किसी संक्रमित व्यक्ति के साथ बिस्तर या कपड़े आदान-प्रदान करते हैं तो यह ज़रूरी हो जाता है कि आप इन्हें काफी अधिक, 60 डिग्री सेल्सियस. या उससे अधिक गर्म पानी में धोएं। जिन चीजों को धोया नहीं जा सकता, जैसे कि गद्दे या कुशन, उन्हें ड्राईक्लीन करें या कम से कम 72 घंटों तक प्लास्टिक बैग में सील कर दें।
आम तौर पर मानव चमड़ी के संपर्क के बिना स्कैबीज़ दो या तीन दिनों से अधिक जीवित नहीं रह सकते हैं।oldveda-old-veda-logo-banner-health-lifestyle-ayurveda

3. स्कैबीज़ संक्रमण का इलाज कराएं।
यदि आपके परिवार का कोई सदस्य स्कैबीज़ से संक्रमित है तो उसका इलाज कराएं। स्कैबीज़ का संक्रमण व्यक्ति में बिना किसी लक्षण दिखे उनसे दूसरे व्यक्तियों को लग सकता है।

स्कैबीज़ होने के लक्षण क्या हैं?

यदि आप स्कैबीज़ से संक्रमित हैं, तो इसके लक्षण दो से छह हफ्तों में नज़र आने लगेंगे। कभी-कभार संक्रमित होने के चार दिन बाद भी संक्रमण दिखने शुरू हो सकते हैं।

इस दौरान आप अपने साथ रहने वाले व्यक्तियों, यौन-साथियों या किसी दूसरे व्यक्ति को जो आपके नज़दीकी संपर्क में आते हैं है, संक्रमित कर सकते हैं हैं। इसलिए यदि आपको स्कैबीज़ संक्रमण के लक्षण नज़र आते हैं, तो इन लोगों को भी इसकी जानकारी दें जिससे वे भी इसका इलाज करा सकें।

आपको स्कैबीज़ या कुटकी के अंडों या मल से हुए एलर्जिक प्रतिक्रिया के लक्षण नज़र आ सकते हैं। शुरुआत में आपको चमड़ी पर हल्की खुजली हो सकती है असके बाद यह पूरे शरीर पर तेज खुजली का रूप ले सकती है। यह खुजली खासकर रात में या गर्म पानी से नहाने के बाद और अधिक बढ़ जाती है।

आपको इन जगहों पर मंुहासे जैसे खुजली वाले दाने हो सकते हैं:

  • कलाइयों पर
  • उंगलियों के बीच
  • कुहनी
  • बगलों में
  • लिंग पर
  • निप्पल पर
  • स्तनों के नीचे
  • नितम्बों पर
  • गुदा के आस-पास

 

चित्रः  खाज-खुजली (स्कैबीज़)

ध्यान रहे, यदि आपको खाज-खुजली हुई हैं, तो वह दिखाए गए चित्र से बिलकुल अलग भी दिख सकती हैं! यदि आपको कोई शंका है, तो डॉक्टर के पास या क्लीनिक जाएं।

खुजाने से खुजली नहीं मिटती है। इससे केवल आपकी चमड़ी को नुकसान पहुंचता है। यदि आप इसका इलाज नहीं कराते तो इन चीलरों की संख्या बढ़ सकती है।

 

स्कैबीज़़ की जाँच कैसे कराएं ?

इनका पता करने के लिए अपने डाक्टर के पास या नज़दीकी अस्पताल या क्लीनिक में जाएं। वे आपकी त्वचा पर स्कैबीज़़ के विशिष्ट लक्षण की तलाश करेंगें। कभी कभी वे आपके मुहांसे या ददोरों को खुरच कर उसके टुकड़े को सूक्ष्मदर्शी की सहायता से देखेंगें की कहीं वहाँ जुएं, अण्डे या स्कैबीज़़ चीलर तो नहीं है।

 

स्कैबीज़ से छुटकारा कैसे पाएं?

स्कैबीज़ से छुटकारा पाने के लिए तीन तरह के उपाय करने पड़ते हैं: दवाएं, संक्रमित वस्तुओं को धुलना और आपके कपड़ों या बिस्तरों के संपर्क में आए किसी यौन साथी या व्यक्तियों को इसके बारे में बताना।

यदि उपचार के दो से चार हफ्तों के बाद भी आपको खुजली बनी रहती है, नए छिद्र हैं या मुहांसे जैसे दाने हैं, तो आपको फिर से यह उपचार करना पड़ सकता है।

1. स्कैबीज़ का दवाओं से इलाज
साधारण साबुन से धोने से कोई फर्क नहीं पड़ता है। स्कैबीज़ के इलाज के लिए आम दवा की दुकानों या बिना नुस्खे के मिलने वाली कोई दवा नहीं है। इसलिए यदि आपको स्कैबीज़ होने के लक्षण हैं तो अपने डाक्टर के पास या अस्पताल जाएं।

डाक्टर द्वारा लिखी हुई स्कैबीज़ मारने की दवाएं, लोषन या क्रीम खरीदें। इन दवाओं को अपने शरीर पर लगाने से पहले, नहाकर तौलिए से अच्छी तरह शरीर सुखा लें। अपने पूरे शरीर पर गर्दन से लेकर पंजों तक स्कैबीज़ नाशक दवाएं लगाएं।

यदि आप शिशुओं और बच्चों को ये दवाएं लगा रहे हैं, तो उनके चेहरे, खोपड़ी और गर्दन पर भी दवा लगानी ज़रूरी होती है। बताए गए समय के लिए दवा लगाकर छोड़ दें, उसके बाद पानी से अच्छी तरह धो लें।
2. गर्म पानी से धुलाई
इस उपचार से पहले पहने हुए सभी कपड़ो और बिस्तरों को 60 डिग्री या अधिक तापमान के गर्म पानी में धोएं। यदि आप, अपने कपड़ों को धो नहीं सकते हैं तो उनकी ड्राई क्लीनिंग कराएं या प्लास्टिक बैग में 72 घंटे तक सीलबंद कर दें। ऐसा ही अपने गद्दों और तकियों के साथ भी करें। वरना आप फिर से खाज-खुजली वाले चीलरों (स्कैबीज़) से संक्रमित हो सकते हैं।
आम तौर पर स्कैबीज़, मानव चमड़ी के संपर्क के बिना दो या तीन दिनों  से अधिक जीवित नहीं रह सकते हैं।

3. अपने यौन-साथी को इस बारे में बताना
अपने यौन-साथी (साथियों) या आपके बिस्तरों, कपड़ों या तौलियों का प्रयोग करने वाले दूसरे व्यक्तियों को इसके बारे में बताएं जिससे वे भी इसकी जांच कराकर उपचार कर लें। वरना अनजाने में आपको फिर से खाज-खुजली हो सकती है।

 


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पीरियड्स के दौरान खाएं ये फूड्स, दर्द से मिलेगी राहत

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पीरियड्स महिलाअों के लिए बहुत ही बड़ी समस्या है इसमें उनके कई परेशानियां का सामना करना पड़ता है जैसे दर्द, कमजोरी और चिड़चिड़ापन। इन से महिलाअों की दिनचर्या पर काफी असर पड़ता है लेकिन अगर इन दिनों अाप अपनी डाइट सही रखें तो अाप इन समस्याअों से बच सकती है। अाज हम आपको कुछ एेसी चीजों के बारे में बताएंगे जिनका पीरियड्स के दौरान सेवन करने से फिजिकल और मेंटल प्रॉब्लम्स को दूर कर सकती है।

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1. एेलोवेरा जूस

अगर अापको पीरियड्स के दर्द से छुटकारा पाना है तो एक एेलोवेरा जूस में एक चम्मच एक चम्मच शहद अौर पानी मिलाकर कर पीने से दर्द, कमजोरी अौर अधिक ब्लीडिंग से राहत मिलती है।

2. तुलसी

पानी में 7-8 पत्ते उबालकर उसमें एक चम्मच शहद मिलाकर पीने से राहत मिलती है।

3. अलसी

सुबह नाश्ते में भूनी हुई अलसी लेने से पारियड्स के दर्द से छुटकारा मिलता है।
 

3. ग्रीन टी

ग्रीन टी पीने से शरीर के मसल्स रिलैक्स महसूस करते है अौर दर्द में राहत मिलती है।

4. पाइन एप्पल

पीरियड्स के दिनों में पाइन एप्पल का खुब सेवन करने से हर तरह के दर्द से छुटकारा मिलता है।

5. अदरक 

पानी में अदरक डाल कर उबाल लें अौर फिर इसमें थोड़ा सा शहद मिलाकर पी लें इससे दर्द से झट से राहत मिलती है।

6. खसखस अौर गर्म दूध

दूध में खसखस मिलाकर पीने से कमजोरी भी दूर होती है अौर साथ ही साथ खून की कमी भी पूरी होती है।

7. केला 

पीरियड्स के दौरान केला खाने से मूड भी सही बना रहता है अौर एनर्जी भी।


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Sex & Relation

लहसुन की सिर्फ 2 से 3 कली आपके जीवन में कर सकती हैं ये बड़ा कमाल

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लहसुन की सिर्फ 2 से 3 कली आपके जीवन में कर सकती हैं ये बड़ा कमाल

क्या आप लिबिडो की कमी या बिस्तर पर सही प्रदर्शन नहीं कर पाने की समस्या से जूझ रहे हैं? अगर हां, तो एक सरल उपाय से आप इस समस्या से छुटकारा पा सकते हैं और अपनी सेक्स क्षमता बढ़ा सकते हैं। जी हां, ये आसान उपाय कुछ और नहीं बल्कि आपके किचन में मिलने वाली चीज लहसुन है। लहसुन एक ऐसा मसाला या खाद्य सामग्री है, जो आपको आसानी से उपलब्ध होता है। लहसुन की छोटी-छोटी कलियां सिर्फ खाने का जायका ही नहीं बढ़ाती बल्कि इनके बहुत सारे औषधीय गुण भी होते हैं। बेशक लहसुन स्वाद में कड़वा होता है लेकिन इसमें आपकी सेक्स लाइफ में मिठास घोलने की पूरी क्षमता होती है।

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लहसुन ही क्यों
लहसुन एक शक्तिशाली कामोत्तेजक (aphrodisiac) है, जो सेक्स क्षमता सुधारने के लिए बहुत प्रभावी माना जाता है। वास्तव में लहसुन आपके यौन स्वास्थ्य के लिए बहुत लाभकारी है। ये यौन इच्छा को बढ़ाने के लिए एक टॉनिक के रूप में कार्य करता है। इतना ही नहीं इससे कम लिबिडो के कारण आपके सेक्स प्रदर्शन पर पड़ने वाले प्रभाव को भी कम करने में मदद मिलती है।

आपको क्या चाहिए

  • लहसुन की केवल 2 से 3 कली

इसका इस्तेमाल ऐसे करें

  • डॉक्टर बखरू के अनुसार, आपको अपनी लिबिडो बढ़ाने के लिए रोजाना लहसुन की 2 से 3 कच्ची कली खानी चाहिए।

टिप- लहसुन खाने के बाद अच्छी तरह से ब्रश ज़रूर करें। दरअसल इसे खाने के बाद मुंह से बदबू आती है। जाहिर हैं, ये बदबू आपको किसिंग के दौरान महंगी पड़ सकती है।


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शुक्राणु बढ़ाना चाहते हैं तो रोजाना खायें मुट्ठी भर अखरोट

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लॉस एंजिलिस : पुरुषों की शुक्राणु संख्या दुनिया भर में एक बड़ी समस्या मानी जाती है और वैज्ञानिकों का कहना है कि इसे बढ़ाने का बहुत आसान तरीका है मुट्ठी भर अखरोट खाना।

यूसीएलए स्कूल ऑफ नर्सिंग की प्रोफेसर वेंडी रॉबिन्स ने बताया, ‘अखरोट और पुरुष प्रजनन-क्षमता के संबंध में हमने जो प्राथमिक अनुसंधान किया उसमें हमने भोजन में अखरोट जोड़ने पर शुक्राणुओं के पहलुओं में सुधार पाया जिसने हमारे लिए पुरूष प्रजनन-क्षमता और प्रजनन स्वास्थ्य पर अखरोट के प्रभावों का और अध्ययन करने का एक मंच तय किया।’ वेंडी ने कहा, ‘नई परियोजना चल रही हैं और हमें उम्मीद है कि निकट भविष्य में इसके बारे में आपसे साझा करने में सक्षम होंगे।’ उन्हेंने बताया कि रोजाना 75 ग्राम अखरोट के सेवन से 21 से 35 साल के आयुवर्ग के स्वस्थ पुरुषों के समूह में शुक्राणु जीवन-शक्ति, गतिशीलता और सामान्य आकृति में सुधार हुआ।

विज्ञान पत्रिका ‘बायोलोजी ऑफ रिप्रोडक्शन’ में प्रकाशित यह अध्ययन दुनिया भर में सात करोड़ से ज्यादा दंपतियों के लिए अहम हैं जिन्हें प्रजनन क्षमता की दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। वैज्ञानिकों का कहना है कि इनमें से 30 से 50 फीसद मामले पुरुष पार्टनर से जोड़े जाते हैं।

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अखरोट अकेला ऐसा मेवा है जो पौधा आधारित ओमेगा-3 फैटी ऐसिड- अल्फा-लिनोलेनिक एसिड (एएलए) का शानदार स्रोत है। बहरहाल, एएलए के अलावा अखरोट में उच्च ऐंटी-ऑक्सिडेंट हैं, और साथ ही अनेक माइक्रो-न्यूट्रिशिएंट भी जिनके बारे में वेंडी का सोचना है कि उन सब का मिला जुला असर पड़ता है।

‘कैलीफोर्निया वालनट कमिशन’ की पोषण सलाहकार कैरोल बर्ग स्लोआन ने कहा कि खाने का रिश्ता मानव प्रजनन सफलता से जोड़ा जाता है। लेकिन ज्यादातर जोर मां के भोजन पर होता है और बहुत कम जोर पिता के भोजन पर होता है। कैरोलन ने कहा कि वेंडी के अध्ययन ने यह जताया है कि पिता के भोजन का प्रभाव ना सिर्फ प्रजनन-क्षमता पर होता है, बल्कि यह बच्चे और आने वाली पीढ़ियों के स्वास्थ्य को भी प्रभावित करता है।

यूसीएलए के अनुसंधान में 117 स्वस्थ युवकों को शामिल किया गया था। उन्हें पाश्चात्य शैली का भोजन दिया गया। उनमें से तकरीबन आधे लोगों ने 12 हफ्तों तक रोजाना 75 ग्राम अखरोट का सेवन किया। बाकी लोगों ने इसका सेवन नहीं किया। वेंडी ने बताया कि 12 हफ्तों के बाद अखरोट का सेवन करने वाले युवकों के समूह में शुक्राणु जीवन-शक्ति, गतिशीलता और सामान्य आकृति में सुधार पाया गया।


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