शारीरिक उत्पीड़न: क्या करें और क्या न करें?

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शारीरिक उत्पीड़न आपको शक्तिहीन महसूस करा सकता है। इससे नज़रअंदाज़ करना सही नहीं। तो आखिर आपको कैसे पता चलेगा कि जो आपके साथ हुआ क्या वो ही शारीरिक उत्पीड़न है? और आपको इसका सामना कैसे करना चहिये? जानने के लिए पढ़िए।

इस हफ्ते का विषय है शारीरिक उत्पीड़न। क्या करें …

  • …अपने सहज ज्ञान पर भरोसा

अपने आप को ये न समझाएं कि जो हो रहा है वो आपकी कल्पना है। यदि जो हो रहा है वो आपको गलत लग रहा है तो शायद कुछ गलत ही हो रहा है। यदि आपको किसी व्यक्ति के छूने से या कोई अनुपयुक्त टिपण्णी, ईमेल या अभद्र मज़ाक से महसूस होता है तो शायद आपका शक सही है।

  • …इसके खिलाफ आवाज़ बुलंद करें 

जी हाँ, यह कहना आसान है और करना शायद मुश्किल, लेकिन जब तक आप विरोध नहीं करेंगे, ऐसे करने वाले के हौसले बढ़ते रहेंगे। तो अगर वो आपके ज़यादा पास आने कि कोशिश करे, तो आप उन्हें आपसे दूरी बनाकर रखने के लिए बोलें। यदि आपको छुए तो आप उसे बता दें कि आपको उसका छूना पसंद नहीं। इसे हंसी या मुस्कराहट में टालना गलत सन्देश दे सकता है। आपके हावभाव से उसे पता चल जाना चाहिए कि जो वो करने का प्रयास कर रहा है, वो आपको बिलकुल मंज़ूर नहीं है। अपनी बात मजबूत ढंग से कहदें ताकि सही सन्देश उस व्यक्ति तक पहुँच जाये। यदि शारीरिक उत्पीड़न का मामला आपके ऑफिस में है और कोई आपको ये सलाह दे रहा है कि इसके खिलाफ आवाज़ उठाने से अच्छा नौकरी छोड़ देना है तो वो गलत कह रहा है। शारीरिक उत्पीड़न से आपकी सुरक्षा कि ज़िम्मेदारी आपके नियोक्ता कि है और नौकरी छोड़ देने से कुछ हासिल नहीं होगा।oldveda-old-veda-logo-banner-health-lifestyle-ayurveda

  • …औपचारिक शिकायत 

किसी के कहने में आकर इस तरह के व्यवहार को अनदेखा बिलकुल मत करें। नौकरी खोने का दर या समाज में बदनामी कि फ़िक्र भी अपने फैसले के बीच में न आने दें। हिम्मत करके अपने वरिष्ठ मैनेजमेंट को इसकी लिखित शिकायत  दें और यदि ऐसा ऑफिस में नहीं हुआ है तो पुलिस के पास जाएं। अपने साथ होने वाले इस प्रकार के व्यव्हार का ब्यौरा रखें, सही दिन, तारिख और समय जब किसी व्यक्ति ने आपके साथ यौन उत्पीड़न करने का प्रयास किया हो। इस सब को लिख लें उन् लोगों के नाम के साथ जिनके साथ अपने इस घटना का उल्लेख या चर्चा कि थी। क्या नहीं करें…

  • …इसे नज़रअंदाज़

शारीरिक उत्पीड़न आवश्यक नहीं कि शारीरिक ही हो। कोई अभद्र व्यव्हार, मज़ाक, अभद्र मेसेज या ईमेल, फेसबुक मेसेज जो आपको असहज महसूस कराये, सेक्स उत्पीड़न हो सकता है। केवल इसलिए कि कोई आपकी तरफ आकर्षित है, उसे आपको उत्पीड़ित करने का लाइसेंस नहीं मिल जाता। और ये केह कर टाल देना कि ‘मैं मज़ाक कर रहा था’ काफी नहीं है। यदि किसी व्यव्हार से आपको असहज लगे तो यह सेक्स उत्पीड़न है। खासकर जब आपके अपनी असहजता दर्शा देने पर भी ये सब न रुके। लेकिन यदि आप दोनों को ये पसंद है तो यह फ्ल्रटिंग है!

  • …अपने आप को दोष देना 

ये याद रखना ज़रूरी है कि चाहे कोई कुछ भी कहे, शारीरिक उत्पीड़न किसी भी सूरत में आपकी गलती नहीं है। अपने क्या पहना था और क्या कहा था, इस बात से किसी को शारीरिक उत्पीड़न का अधिकार नहीं मिल जाता। उत्पीड़न और छेड़छाड़ हमेशा ऐसा करने वाले कि ही गलती है। आपके द्वारा कही कोई भी बात उत्पीड़न का बहाना नहीं बन सकती। जब ऐसे मामले सामने आते हैं तो अक्सर समाज और कई बार पुलिस भी उत्पीड़न के शिकार को इसके लिए ज़िम्मेदार ठहरा देती है। चरित्र, नैतिकता और मूल्यों पर सवालिया निशान खड़े कर दिए जाते हैं। इसके लिए आपको सह्रमसर होने कि ज़रूरत नहीं है। अपने ऐसा कुछ नहीं किया था जिसके लिए आपका उत्पीड़न किया जाये।

  • …मदद मांगने में झिझक 

शारीरिक उत्पीड़न का संकट आपको मानसिक और भावात्मक रूप से नुक्सान पहुंचा सकता है। अपने दोस्तों या परिवार से इस बारे खुलकर बात करने से बिलकुल न कतराएं। आपको सहयोग और प्रोत्साहन कि ज़रूरत पड़ेगी। मदद मांगिये। इस मानसिक आघात से जूझने और उबरने के लिए किसी प्रशिक्षित मनोवैज्ञानिक या सलाहकार कि मदद लेनी पड़े तो संकोच न करें। इस मदद का फायदा आपको ही मिलेगा।


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