Connect with us

Sex & Relation

ट्राइकोमोनिएसिस

Published

on

ट्राइकोमोनिएसिस को ‘ट्रिक’ के नाम से भी जाना जाता है। यह यौनसंचारित रोग, महिलाओं एवं पुरुषों, दोनों को ही प्रभावित करता है लेकिन महिलाओं में इनके लक्षण दिखने की संभावना अधिक होती है।

बहुत कम मामलों में ट्रिक का इलाज नहीं करने पर महिलाओं में बांझपन हो सकता है।

यदि आप ट्रिक से संक्रमित हो जाते हैं तो इसका इलाज आसानी से किया जा सकता है, यदि महिलाओं का इलाज न कराया जाए तो कुछ एक मामलों में वे इसके कारण प्रजनन में असमर्थ हो सकती है।

ट्राइकोमोनिएसिस कैसे होता है?

असुरक्षित योनि मैथुन (लिंग से योनि में, भग से भग में) करने से ट्रिक हो सकता है।

इसका अर्थ यह है कि महिला को किसी संक्रमित शरीर या महिला से ट्रिक लग सकता है। और शरीर को यह केवल संक्रमित महिला से लग सकता है।

मुख या गुदा मैथुन करने से आपको ट्रिक नहीं होता।

ट्राइकोमोनिएसिस से कैसे बच सकते हैं?

1. हमेशा कंडोम का प्रयाग करें।

2. जब आपको असामान्य स्राव, घाव या पेषाब करते समय दर्द होता हो तो ट्रिक एवं अन्य यौनसंचारित रोगों की जांच कराएं।

इन लक्षणों से पता चलता है कि कुछ न कुछ गड़बड़ है। साथ ही अपने साथी को इनके बारे में बताएं जिससे वह भी जांच करा सकें और इलाज करा सकें। वरना आप अनचाहे दुबारा संक्रमित हो सकते हैं।

oldveda-logo-272

3. यदि आप महिला हैं, तो पैप स्मीयर जांच (कोशिकाओं में बदलाव का पता लगाने के लिए की जाने वाली जांच) से पहले ट्रिक की जांच कराएं।

ट्राइकोमोनिएसिस के लक्षण क्या हैं?

अधिकांश लोगों में ट्राइकोमोनिएसिस संक्रमण-जिसे आम तौर पर ट्रिक के नाम से जाना जाता है, के कोई लक्षण नज़र नहीं आते हैं। महिलाओं की अपेक्षा अक्सर पुरुषों में कोई लक्षण नहीं दिखते।

यदि आपको ट्राइकोमोनिएसिस हुआ है, तो आम तौर पर संक्रमित होने के एक हफ्ते के भीतर लक्षण नज़र आ जाते हैं।

महिलाओं में ट्राइकोमोनिएसिस, योनि, मूत्र नली, मूत्राषय और गर्भग्रीवा को संक्रमित करता है। पुरुषों में यह केवल मूत्र नली और लिंग की आगे की चमड़ी के नीचे के हिस्से को संक्रमित करता है।

महिलाओं में ट्राइकोमोनियासिस होने के लक्षण हैं:

  • योनि से पीला-हरा या दूधिया रंग का स्राव
  • योनि से तेज बदबू
  • पेशाब करते समय दर्द
  • सेक्स करते समय दर्द
  • योनि में खुजली
  • भग और भगोष्ठ में सूजन

कभी-कभार आपके मासिक धर्म के समय ये लक्षण और भी खराब हो सकते हैं। ऐसा कम होता है कि ट्रिक अपने-आप ठीक हो जाए। इसलिए यदि आपको इसके लक्षण नज़र आते हैं, तो इसका इलाज कराएं। साथ ही इसके बारे में अपने साथी को भी बताएं जिससे वह भी जाकर इसकी जांच करा सकें और इसका इलाज करा सकें।

यदि आप एक महिला हैं और इसका इलाज नहीं कराती हैं, तो क्या होता है?
यदि आप इलाज नहीं कराती हैं, तो एचआईवी संक्रमित व्यक्ति के साथ असुरक्षित सेक्स करने पर आपको एचआईवी होने का जोखिम बढ़ जाता है। यदि आप गर्भवती हैं, तो आपकी समय से पहले या कम वज़न वाले बच्चे को जन्म देने की संभावना अधिक रहती हैं।

पुरुषों में ट्राइकोमोनिएसिस होने के लक्षण हैंः

  • लिंग से स्राव, अक्सर सुबह पहली बार पेषाब करते समय
  • लिंग के मुंड या मूत्र द्वार के आस-पास खुजली
  • पेशाब करते समय दर्दऐसा कम होता है कि ट्रिक अपने-आप ठीक हो जाए। इसलिए यदि आपको इसके लक्षण नज़र आते हैं तो इसका इलाज कराएं।

ट्रिक की जांच कैसे कराएं?

महिलाओं के मामले में, डाक्टर आपकी योनि के अंदर से सैम्पल ले सकती है या आपको अपनी पेशाब का सैम्पल देने को कह सकती हैं। नियमित सरवाइकल स्मियर या सरवाइकल कैंसर के लिए पैप टेस्ट कराते समय भी आप ट्रिक की जांच करने को कह सकती हैं। चूंकि आम तौर पर पैप के साथ यह जांच नहीं की जाती है, इसलिए आपको इसके लिए खास तौर पर कहना पड़ेगा।

पुरुषों के मामले में, स्वास्थ्य कर्मी या डाक्टर, ट्रिक की जांच के लिए आपकी मूत्र नली से ट्रिक की जांच के लिए तरल का सैम्पल ले सकते हैं है या आपसे अपनी पेशाब का सैम्पल देने के लिए कह सकते हैं।

 

ट्राइकोमोनिएसिस से छुटकारा कैसे पाएं?

खाने वाली ऐंटीबायोटिक दवाओं की एक खुराक लेने से आप ट्रिक से छुटकारा पा सकते हैं।

अक्सर मेट्रोनिडाजोल या टाइनिडाजोल ऐंटीबायोटिक्स लेने की सलाह दी जाती है।  कुछ मामलों में आपको संक्रमण हटाने के लिए ऐंटीबायोटिक्स की अधिक खुराकें लेने की सलाह दी जाती है।

दुबारा संक्रमण होने से बचने के लिए यह ज़रूरी है कि आप और आपके साथी दोनों ही ट्रिक की जांच कराएं और उसका इलाज कराएं।

जब तक आप और आपके साथी का इलाज पूरा नहीं हो जाता है, और संक्रमण के लक्षण दूर नहीं हो जाते हैं, आपको सेक्स नहीं करने की सलाह दी जाती है।
ऐंटीबायोटिक्स के प्रतिकूल असर से बचने के लिए इलाज के दौरान आपको शराब न पीने की सलाह भी दी जाती है।

 


Continue Reading

women body

पीरियड्स के दौरान खाएं ये फूड्स, दर्द से मिलेगी राहत

Published

on

By

पीरियड्स महिलाअों के लिए बहुत ही बड़ी समस्या है इसमें उनके कई परेशानियां का सामना करना पड़ता है जैसे दर्द, कमजोरी और चिड़चिड़ापन। इन से महिलाअों की दिनचर्या पर काफी असर पड़ता है लेकिन अगर इन दिनों अाप अपनी डाइट सही रखें तो अाप इन समस्याअों से बच सकती है। अाज हम आपको कुछ एेसी चीजों के बारे में बताएंगे जिनका पीरियड्स के दौरान सेवन करने से फिजिकल और मेंटल प्रॉब्लम्स को दूर कर सकती है।

stress-free_oldveda

1. एेलोवेरा जूस

अगर अापको पीरियड्स के दर्द से छुटकारा पाना है तो एक एेलोवेरा जूस में एक चम्मच एक चम्मच शहद अौर पानी मिलाकर कर पीने से दर्द, कमजोरी अौर अधिक ब्लीडिंग से राहत मिलती है।

2. तुलसी

पानी में 7-8 पत्ते उबालकर उसमें एक चम्मच शहद मिलाकर पीने से राहत मिलती है।

3. अलसी

सुबह नाश्ते में भूनी हुई अलसी लेने से पारियड्स के दर्द से छुटकारा मिलता है।
 

3. ग्रीन टी

ग्रीन टी पीने से शरीर के मसल्स रिलैक्स महसूस करते है अौर दर्द में राहत मिलती है।

4. पाइन एप्पल

पीरियड्स के दिनों में पाइन एप्पल का खुब सेवन करने से हर तरह के दर्द से छुटकारा मिलता है।

5. अदरक 

पानी में अदरक डाल कर उबाल लें अौर फिर इसमें थोड़ा सा शहद मिलाकर पी लें इससे दर्द से झट से राहत मिलती है।

6. खसखस अौर गर्म दूध

दूध में खसखस मिलाकर पीने से कमजोरी भी दूर होती है अौर साथ ही साथ खून की कमी भी पूरी होती है।

7. केला 

पीरियड्स के दौरान केला खाने से मूड भी सही बना रहता है अौर एनर्जी भी।


Continue Reading

Sex & Relation

लहसुन की सिर्फ 2 से 3 कली आपके जीवन में कर सकती हैं ये बड़ा कमाल

Published

on

लहसुन की सिर्फ 2 से 3 कली आपके जीवन में कर सकती हैं ये बड़ा कमाल

क्या आप लिबिडो की कमी या बिस्तर पर सही प्रदर्शन नहीं कर पाने की समस्या से जूझ रहे हैं? अगर हां, तो एक सरल उपाय से आप इस समस्या से छुटकारा पा सकते हैं और अपनी सेक्स क्षमता बढ़ा सकते हैं। जी हां, ये आसान उपाय कुछ और नहीं बल्कि आपके किचन में मिलने वाली चीज लहसुन है। लहसुन एक ऐसा मसाला या खाद्य सामग्री है, जो आपको आसानी से उपलब्ध होता है। लहसुन की छोटी-छोटी कलियां सिर्फ खाने का जायका ही नहीं बढ़ाती बल्कि इनके बहुत सारे औषधीय गुण भी होते हैं। बेशक लहसुन स्वाद में कड़वा होता है लेकिन इसमें आपकी सेक्स लाइफ में मिठास घोलने की पूरी क्षमता होती है।

garlicc-for-libido-power

लहसुन ही क्यों
लहसुन एक शक्तिशाली कामोत्तेजक (aphrodisiac) है, जो सेक्स क्षमता सुधारने के लिए बहुत प्रभावी माना जाता है। वास्तव में लहसुन आपके यौन स्वास्थ्य के लिए बहुत लाभकारी है। ये यौन इच्छा को बढ़ाने के लिए एक टॉनिक के रूप में कार्य करता है। इतना ही नहीं इससे कम लिबिडो के कारण आपके सेक्स प्रदर्शन पर पड़ने वाले प्रभाव को भी कम करने में मदद मिलती है।

आपको क्या चाहिए

  • लहसुन की केवल 2 से 3 कली

इसका इस्तेमाल ऐसे करें

  • डॉक्टर बखरू के अनुसार, आपको अपनी लिबिडो बढ़ाने के लिए रोजाना लहसुन की 2 से 3 कच्ची कली खानी चाहिए।

टिप- लहसुन खाने के बाद अच्छी तरह से ब्रश ज़रूर करें। दरअसल इसे खाने के बाद मुंह से बदबू आती है। जाहिर हैं, ये बदबू आपको किसिंग के दौरान महंगी पड़ सकती है।


Continue Reading

Dry Fruits

शुक्राणु बढ़ाना चाहते हैं तो रोजाना खायें मुट्ठी भर अखरोट

Published

on

By

लॉस एंजिलिस : पुरुषों की शुक्राणु संख्या दुनिया भर में एक बड़ी समस्या मानी जाती है और वैज्ञानिकों का कहना है कि इसे बढ़ाने का बहुत आसान तरीका है मुट्ठी भर अखरोट खाना।

यूसीएलए स्कूल ऑफ नर्सिंग की प्रोफेसर वेंडी रॉबिन्स ने बताया, ‘अखरोट और पुरुष प्रजनन-क्षमता के संबंध में हमने जो प्राथमिक अनुसंधान किया उसमें हमने भोजन में अखरोट जोड़ने पर शुक्राणुओं के पहलुओं में सुधार पाया जिसने हमारे लिए पुरूष प्रजनन-क्षमता और प्रजनन स्वास्थ्य पर अखरोट के प्रभावों का और अध्ययन करने का एक मंच तय किया।’ वेंडी ने कहा, ‘नई परियोजना चल रही हैं और हमें उम्मीद है कि निकट भविष्य में इसके बारे में आपसे साझा करने में सक्षम होंगे।’ उन्हेंने बताया कि रोजाना 75 ग्राम अखरोट के सेवन से 21 से 35 साल के आयुवर्ग के स्वस्थ पुरुषों के समूह में शुक्राणु जीवन-शक्ति, गतिशीलता और सामान्य आकृति में सुधार हुआ।

विज्ञान पत्रिका ‘बायोलोजी ऑफ रिप्रोडक्शन’ में प्रकाशित यह अध्ययन दुनिया भर में सात करोड़ से ज्यादा दंपतियों के लिए अहम हैं जिन्हें प्रजनन क्षमता की दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। वैज्ञानिकों का कहना है कि इनमें से 30 से 50 फीसद मामले पुरुष पार्टनर से जोड़े जाते हैं।

oldveda-old-veda-logo-banner-health-lifestyle-ayurveda1

अखरोट अकेला ऐसा मेवा है जो पौधा आधारित ओमेगा-3 फैटी ऐसिड- अल्फा-लिनोलेनिक एसिड (एएलए) का शानदार स्रोत है। बहरहाल, एएलए के अलावा अखरोट में उच्च ऐंटी-ऑक्सिडेंट हैं, और साथ ही अनेक माइक्रो-न्यूट्रिशिएंट भी जिनके बारे में वेंडी का सोचना है कि उन सब का मिला जुला असर पड़ता है।

‘कैलीफोर्निया वालनट कमिशन’ की पोषण सलाहकार कैरोल बर्ग स्लोआन ने कहा कि खाने का रिश्ता मानव प्रजनन सफलता से जोड़ा जाता है। लेकिन ज्यादातर जोर मां के भोजन पर होता है और बहुत कम जोर पिता के भोजन पर होता है। कैरोलन ने कहा कि वेंडी के अध्ययन ने यह जताया है कि पिता के भोजन का प्रभाव ना सिर्फ प्रजनन-क्षमता पर होता है, बल्कि यह बच्चे और आने वाली पीढ़ियों के स्वास्थ्य को भी प्रभावित करता है।

यूसीएलए के अनुसंधान में 117 स्वस्थ युवकों को शामिल किया गया था। उन्हें पाश्चात्य शैली का भोजन दिया गया। उनमें से तकरीबन आधे लोगों ने 12 हफ्तों तक रोजाना 75 ग्राम अखरोट का सेवन किया। बाकी लोगों ने इसका सेवन नहीं किया। वेंडी ने बताया कि 12 हफ्तों के बाद अखरोट का सेवन करने वाले युवकों के समूह में शुक्राणु जीवन-शक्ति, गतिशीलता और सामान्य आकृति में सुधार पाया गया।


Continue Reading

Trending