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वाटर वाटर्स

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वाटर वाटर्स, मोलस्कम कान्टेजिओसम नामक विषाणु (वायरस) से होते हैं। यह एक आम विषाणु संक्रमण है जो चमड़ी पर बुरा असर डालता है। यदि आप संक्रमित हो जाते हैं, तो आपकी चमड़ी पर द्रव या पानी से भरे फफोले निकल आते हैं।

आमतौर पर पानी वाले छाले अपने-आप ठीक हो जाते हैं।

वाटर वाटर्स कैसे होते हैं?

आपकी त्वचा के किसी दूसरे की त्वचा से सीधे संपर्क में आने से आपको वाटर वाटर्स हो सकते हैं। साथ ही किसी संक्रमित व्यक्ति के तौलिए का प्रयोग करने, उनके साथ नहाने या उनके कपड़े पहनने से भी ये आपको हो सकते हैं।

वाटर वाटर्स से कैसे बच सकते हैं?

1. हमेशा कंडोम का प्रयोग करें।
कंडोम आपको वाटर वार्ट्स से केवल तभी बचाते हैं जब आपके साथी के जननांगों पर वाटर वार्ट्स हों। वे उन हिस्सों पर हुए संक्रमण से आपको सुरक्षित नहीं रख सकते हैं जो कंडोम से ढके हुए नहीं हैं।

2. वाटर वार्ट्स से संक्रमित हिस्सों को ढक कर रखें। यदि आपके साथी वाटर वार्ट्स से संक्रमित हैं तो प्रभावित त्वचा को कपड़े या जीवाणुरहित पट्टी से ढक कर रखें। ऐसा करने पर आपको अपने साथी के नज़दीकी संपर्क में आने पर इनसे (संक्रमित होने से) सुरक्षा मिलती है।
3. अपने शरीर के छालों या फोड़ों को न छूएं।
अपने शरीर के छालों या फोड़ों को छूने, खुजली करने या फोड़ने या नोचने से बचें। अपने डॉक्टर से इनकी जांच कराएं, वरना आप अनचाहे अपने षरीर के दूसरे हिस्सों में विषाणु फैला सकते हैं।

 

वाटर वार्ट्स के लक्षण क्या हैं?

विषाणु (वायरस) से संक्रमित होने के दो से आठ हफ्तों के भीतर महिलाओं और पुरुषों में वाटर वार्ट्स के लक्षण नज़र आने लगते हैं।

महिलाओं और पुरुषों में वाटर वार्ट्स के लक्षण एक जैसे ही होते हैं। आम तौर पर ये आपके जननांगों, गुदा, जांघों और धड़ पर निकलते हैं।

वाटर वार्ट्स के लक्षणः

ऽ द्रव से भरे फफोले या छाले
ऽ फफोले या छाले अक्सर समूह में (एक साथ कई) निकलते हैं।

चित्रः  योनि के आस-पास वाटर वाट्र्स

ध्यान रहे, यदि आपको वाटर वार्ट्स हुए हैं, तो वह दिखाए गए इन चित्रों से बिलकुल अलग भी दिख सकते हैं! कभी-कभार कुछ भी नज़र नहीं आता। यदि आपको कोई षंका है, तो डॉक्टर के पास या क्लीनिक जाएं।

 

वाटर वार्ट्स की जांच कैसे कराएं?

आपके डाक्टर आपकी जांच कर बता सकते हैं कि आपको वाटर वार्ट्स हुए हैं कि नहीं। कभी-कभार आपके डाक्टर ऊतक (टिशू) का सैम्पल (बायोप्सी) लेकर इस बात की जांच करने के लिए भेज सकते हैं, कि आपको वाटर वार्ट्स ही निकले हैं और कुछ नहीं।

वाटर वार्ट्स से छुटकारा कैसे पाएं?

यदि आपको ये द्रव से भरे वाटर वार्ट्स हो गए हैं, तो आप अपने शरीर के दूसरे हिस्सों या दूसरे लोगों को भी वायरस फैला सकते हैं।

आम तौर पर आपका शरीर त्वचा पर होने वाले संक्रमण से 6 से 18 महीनों में अपने-आप छुटकारा पा लेता है। इसलिए दवाओं की सहायता से इन्हें दूर करने से पहले आपके डॉक्टर आपको, इनके अपने-आप ठीक होने का इंतज़ार करने की सलाह दे सकते हैं। आम तौर पर जब वाटर वार्ट्स खत्म हो जाते हैं तो संक्रमण भी चला जाता है। किंतु यदि आप किसी ऐसे व्यक्ति के संपर्क में आते हैं जिसे वाटर वार्ट्स हुए हैं तो आप इनसे फिर से संक्रमित हो सकते हैं।

वाटर वार्ट्स के इलाज के विकल्प
आपके शरीर के दूसरे हिस्सों या दूसरे लोगों को वाटर वार्ट्स का संक्रमण फैलने से रोकने के लिए आपको छालों को ऐसी पट्टी या कपड़े से ढक कर रखने की सलाह दी जाएगी जिससे षरीर के दूसरे अंगों पर पानी ना लग सके।

आप इन वाटर वार्ट्स को डाक्टर द्वारा निम्नलिखित किसी तरीके से भी हटवा सकते हैं:

  • उनको जमा कर (क्रायोथेरेपी)
  • उन पर लेज़र डालकर
  • छालों को काटकर या चीरा लगाकर या खुरच कर उनसे पानी बाहर निकालकर (क्यूरेटाज)

आम तौर पर आपके डॉक्टर आपको इनके अपने-आप ठीक होने का इंतज़ार करने की सलाह दे सकते हैं, क्योंकि इन तरीकों से कटे के निशान बन सकते हैं।


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पीरियड्स के दौरान खाएं ये फूड्स, दर्द से मिलेगी राहत

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पीरियड्स महिलाअों के लिए बहुत ही बड़ी समस्या है इसमें उनके कई परेशानियां का सामना करना पड़ता है जैसे दर्द, कमजोरी और चिड़चिड़ापन। इन से महिलाअों की दिनचर्या पर काफी असर पड़ता है लेकिन अगर इन दिनों अाप अपनी डाइट सही रखें तो अाप इन समस्याअों से बच सकती है। अाज हम आपको कुछ एेसी चीजों के बारे में बताएंगे जिनका पीरियड्स के दौरान सेवन करने से फिजिकल और मेंटल प्रॉब्लम्स को दूर कर सकती है।

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1. एेलोवेरा जूस

अगर अापको पीरियड्स के दर्द से छुटकारा पाना है तो एक एेलोवेरा जूस में एक चम्मच एक चम्मच शहद अौर पानी मिलाकर कर पीने से दर्द, कमजोरी अौर अधिक ब्लीडिंग से राहत मिलती है।

2. तुलसी

पानी में 7-8 पत्ते उबालकर उसमें एक चम्मच शहद मिलाकर पीने से राहत मिलती है।

3. अलसी

सुबह नाश्ते में भूनी हुई अलसी लेने से पारियड्स के दर्द से छुटकारा मिलता है।
 

3. ग्रीन टी

ग्रीन टी पीने से शरीर के मसल्स रिलैक्स महसूस करते है अौर दर्द में राहत मिलती है।

4. पाइन एप्पल

पीरियड्स के दिनों में पाइन एप्पल का खुब सेवन करने से हर तरह के दर्द से छुटकारा मिलता है।

5. अदरक 

पानी में अदरक डाल कर उबाल लें अौर फिर इसमें थोड़ा सा शहद मिलाकर पी लें इससे दर्द से झट से राहत मिलती है।

6. खसखस अौर गर्म दूध

दूध में खसखस मिलाकर पीने से कमजोरी भी दूर होती है अौर साथ ही साथ खून की कमी भी पूरी होती है।

7. केला 

पीरियड्स के दौरान केला खाने से मूड भी सही बना रहता है अौर एनर्जी भी।


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Sex & Relation

लहसुन की सिर्फ 2 से 3 कली आपके जीवन में कर सकती हैं ये बड़ा कमाल

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लहसुन की सिर्फ 2 से 3 कली आपके जीवन में कर सकती हैं ये बड़ा कमाल

क्या आप लिबिडो की कमी या बिस्तर पर सही प्रदर्शन नहीं कर पाने की समस्या से जूझ रहे हैं? अगर हां, तो एक सरल उपाय से आप इस समस्या से छुटकारा पा सकते हैं और अपनी सेक्स क्षमता बढ़ा सकते हैं। जी हां, ये आसान उपाय कुछ और नहीं बल्कि आपके किचन में मिलने वाली चीज लहसुन है। लहसुन एक ऐसा मसाला या खाद्य सामग्री है, जो आपको आसानी से उपलब्ध होता है। लहसुन की छोटी-छोटी कलियां सिर्फ खाने का जायका ही नहीं बढ़ाती बल्कि इनके बहुत सारे औषधीय गुण भी होते हैं। बेशक लहसुन स्वाद में कड़वा होता है लेकिन इसमें आपकी सेक्स लाइफ में मिठास घोलने की पूरी क्षमता होती है।

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लहसुन ही क्यों
लहसुन एक शक्तिशाली कामोत्तेजक (aphrodisiac) है, जो सेक्स क्षमता सुधारने के लिए बहुत प्रभावी माना जाता है। वास्तव में लहसुन आपके यौन स्वास्थ्य के लिए बहुत लाभकारी है। ये यौन इच्छा को बढ़ाने के लिए एक टॉनिक के रूप में कार्य करता है। इतना ही नहीं इससे कम लिबिडो के कारण आपके सेक्स प्रदर्शन पर पड़ने वाले प्रभाव को भी कम करने में मदद मिलती है।

आपको क्या चाहिए

  • लहसुन की केवल 2 से 3 कली

इसका इस्तेमाल ऐसे करें

  • डॉक्टर बखरू के अनुसार, आपको अपनी लिबिडो बढ़ाने के लिए रोजाना लहसुन की 2 से 3 कच्ची कली खानी चाहिए।

टिप- लहसुन खाने के बाद अच्छी तरह से ब्रश ज़रूर करें। दरअसल इसे खाने के बाद मुंह से बदबू आती है। जाहिर हैं, ये बदबू आपको किसिंग के दौरान महंगी पड़ सकती है।


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शुक्राणु बढ़ाना चाहते हैं तो रोजाना खायें मुट्ठी भर अखरोट

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लॉस एंजिलिस : पुरुषों की शुक्राणु संख्या दुनिया भर में एक बड़ी समस्या मानी जाती है और वैज्ञानिकों का कहना है कि इसे बढ़ाने का बहुत आसान तरीका है मुट्ठी भर अखरोट खाना।

यूसीएलए स्कूल ऑफ नर्सिंग की प्रोफेसर वेंडी रॉबिन्स ने बताया, ‘अखरोट और पुरुष प्रजनन-क्षमता के संबंध में हमने जो प्राथमिक अनुसंधान किया उसमें हमने भोजन में अखरोट जोड़ने पर शुक्राणुओं के पहलुओं में सुधार पाया जिसने हमारे लिए पुरूष प्रजनन-क्षमता और प्रजनन स्वास्थ्य पर अखरोट के प्रभावों का और अध्ययन करने का एक मंच तय किया।’ वेंडी ने कहा, ‘नई परियोजना चल रही हैं और हमें उम्मीद है कि निकट भविष्य में इसके बारे में आपसे साझा करने में सक्षम होंगे।’ उन्हेंने बताया कि रोजाना 75 ग्राम अखरोट के सेवन से 21 से 35 साल के आयुवर्ग के स्वस्थ पुरुषों के समूह में शुक्राणु जीवन-शक्ति, गतिशीलता और सामान्य आकृति में सुधार हुआ।

विज्ञान पत्रिका ‘बायोलोजी ऑफ रिप्रोडक्शन’ में प्रकाशित यह अध्ययन दुनिया भर में सात करोड़ से ज्यादा दंपतियों के लिए अहम हैं जिन्हें प्रजनन क्षमता की दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। वैज्ञानिकों का कहना है कि इनमें से 30 से 50 फीसद मामले पुरुष पार्टनर से जोड़े जाते हैं।

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अखरोट अकेला ऐसा मेवा है जो पौधा आधारित ओमेगा-3 फैटी ऐसिड- अल्फा-लिनोलेनिक एसिड (एएलए) का शानदार स्रोत है। बहरहाल, एएलए के अलावा अखरोट में उच्च ऐंटी-ऑक्सिडेंट हैं, और साथ ही अनेक माइक्रो-न्यूट्रिशिएंट भी जिनके बारे में वेंडी का सोचना है कि उन सब का मिला जुला असर पड़ता है।

‘कैलीफोर्निया वालनट कमिशन’ की पोषण सलाहकार कैरोल बर्ग स्लोआन ने कहा कि खाने का रिश्ता मानव प्रजनन सफलता से जोड़ा जाता है। लेकिन ज्यादातर जोर मां के भोजन पर होता है और बहुत कम जोर पिता के भोजन पर होता है। कैरोलन ने कहा कि वेंडी के अध्ययन ने यह जताया है कि पिता के भोजन का प्रभाव ना सिर्फ प्रजनन-क्षमता पर होता है, बल्कि यह बच्चे और आने वाली पीढ़ियों के स्वास्थ्य को भी प्रभावित करता है।

यूसीएलए के अनुसंधान में 117 स्वस्थ युवकों को शामिल किया गया था। उन्हें पाश्चात्य शैली का भोजन दिया गया। उनमें से तकरीबन आधे लोगों ने 12 हफ्तों तक रोजाना 75 ग्राम अखरोट का सेवन किया। बाकी लोगों ने इसका सेवन नहीं किया। वेंडी ने बताया कि 12 हफ्तों के बाद अखरोट का सेवन करने वाले युवकों के समूह में शुक्राणु जीवन-शक्ति, गतिशीलता और सामान्य आकृति में सुधार पाया गया।


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