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गर्मी में फ्रिज का ठंडा-ठंडा पानी पीने के 4 नुकसान

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गर्मी में फ्रिज का ठंडा-ठंडा पानी पीने के 4 नुकसान

गर्मी का मौसम लगभग शुरू हो चुका है तथा घर आने के बाद हम में से अधिकाँश लोग बाहर की चिलचिलाती धूप की गर्मी दूर करने के लिए फ्रिज का ठंडा पानी पीते हैं।

यह भी पढ़ें: क्यों नहीं पीना चाहिये बरफ वाला ठंडा पानी…?

हालाँकि बर्फ़ से स्वास्थ्य को कई लाभ होते हैं परन्तु बर्फ़ का ठंडा पानी या ठंडा पानी केवल अस्थाई तौर पर ही राहत देता है तथा नियमित तौर पर बर्फ़ का ठंडा पानी पीने से कई नुकसान भी होते हैं।

यहाँ बर्फ़ या ठंडा पानी पीने से होने वाले नुकसानों के बारे में बताया गया है:

1. पाचन में हस्तक्षेप: ठंडा पानी आपके भोजन की पाचन प्रक्रिया में बाधा उत्पन्न करता है क्योंकि ठंडा पानी पीने से रक्त वाहिकाएं सिकुड़ जाती हैं। इससे पाचन की प्रक्रिया धीमी पड़ जाती है और क्योंकि भोजन का पाचन ठीक से नहीं होता अत: भोजन के पोषक तत्व ख़त्म हो जाते हैं या शरीर द्वारा अवशोषित नहीं किये जाते। आप बेहतर पाचन के लिए घरेलू उपायों के बारे में जानना चाहेंगे।  READ: गर्म पानी पीने के 9 बडे़ फायदे

2. पोषक तत्वों को नष्ट करना: आपके शरीर का तापमान 37 डिग्री सेल्सियस होता है तथा जब आप कोई ठंडी चीज़ पीते हैं तो उस वस्तु के तापमान को नियमित करने के लिए आपके शरीर को कुछ ऊर्जा खर्च करनी पड़ती है। अन्यथा इस उर्जा का उपयोग भोजन के पाचन तथा पोषक तत्वों के अवशोषण के लिए होता है। यही कारण है कि ठंडा पानी पीने से आपके शरीर को पोषक तत्व नहीं मिल पाते।

3. गला ख़राब होने का खतरा बढ़ जाता है: ठंडा पानी पीने से आपके श्वसन तंत्र में म्युकोसा बन सकता है जो श्वसन तंत्र की सुरक्षात्मक परत होती है। जब यह परत संकुलित हो जाती है तो आपका श्वसन तंत्र अनावृत हो जाता है तथा विभिन्न संक्रमणों की चपेट में आ जाता है और इसी कारण गला ख़राब होने का खतरा बढ़ जाता है। आप गले को ख़राब होने से बचाने के 6 तरीकों के बारे में पढ़ना चाहेंगे।

4. आपके हृदय की गति को कम करता है: बर्फ़ का पानी या ठंडा पानी पीने से आपके हृदय की गति कम हो जाती है। अध्ययनों से पता चला है कि ठंडा पानी वेगस तंत्रिका को उत्तेजित करता है। वेगस तंत्रिका 10 वीं कपाल तंत्रिका है तथा यह शरीर के स्वायत्त तंत्रिका प्रणाली का महत्वपूर्ण हिस्सा है जो शरीर के अनैच्छिक कार्यों को नियंत्रित करती है। वेगस तंत्रिका हृदय की गति को कम करने में मध्यस्थता करती है तथा ठंडा पानी इस तंत्रिका को उत्तेजित करता है जिसके कारण हृदय की गति कम हो जाती है।


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मासानुसार गर्भिणी परिचर्या,प्रथम मास से नवम मास तक

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हर मास में गर्भ में शिशु के शरीर की वृधि होती है अत: विकासक्रम के अनुसार हर महीने गर्भिणी को कुछ विशेष आहार लेना चाहए | प्रथम मास में-

प्रथम मास में गो दुग्ध,घी,मक्खन का सेवन करे. मीठी और ठन्डे आहार का सेवन करे. : Sweet, cold and liquid diet, Medicated milk, Madhuyashti, madhuka puspa with butter, honey and sweetened milk

दुसरे मास में – : काकोली ओषधि का गो दूध के साथ सेवन करे

Milk medicated with madhura rasa (sweet taste) drugs, Sweetened milk treated with kakoli

तीसरे मास में – मधु,घी,ढूध का सेवन करे. सस्ती चावल की ढूध के खीर बनाकर सेवन करे साथ ही खिचड़ी का सेवन करे.

Milk with honey and ghrita, Milk with honey and ghrita

 

चतुर्थ मास में : ढूध, मक्खन(25ग्राम) का सेवन करे साथ सस्ठी चावल का ओधन ले.

Milk with butter, Cooked sasti rice with curd, dainty and pleasant food mixed with milk and butter, Milk with one tola (12gm) of butter, Medicated cooked rice

 

पंचम मास में : ढूध घी सस्ठी चावल का पानी ढूध के साथ,ढूध से निकले गए मक्खन का प्रयोग.

Ghrita prepared with butter extracted from milk, Cooked shastika rice with milk, meat of wild animals along with dainty food mixed with milk and ghrita

 

छठा मास में – : मधुर वर्ग की ओषधि और घी ढूध, मीठी दही, गोखरू से सिद्ध घी और यवागू, इस मास में बुद्धि के विकास के लिए बादाम, ब्राह्मी, शंख पुष्पि का सेवन करे

Ghrita prepared from milk medicated with madhura (sweet) drugs, Ghrita or rice gruel medicated with gokshura

सप्तम मास में- : मधुर ओषध के साथ घी ढूध का पवन करे. प्रधक परनी से सिद्ध घी का सेवन, मीठे घी का सेवन करे,

Ghrita medicated with prithakaparnyadi group of drugs.

 

अठमा मास में – ढूध घी का सेवन. अनुवासन, अस्थापन वस्ति का प्रयोग.

Kshira Yawagu mixed with ghrita, Asthapana basti with decoction of badari mixed with bala,atibala satapuspa,patala etc.,honey and ghrita. Asthapan is followed by Anuvasana basti of oil medicated with milk madhura drugs

नवम  मास में – : इन महीने  में चावल को ६ गुना दूध व ६ गुना पानी में पकाकर घी दाल के पाचनशक्ति के अनुसार सुबह-शाम खाये अथवा शाम के भोजन में दूध-दलियें में घी डालकर खाये | शाम का भोजन तरल रूप में लेना जरूरी है |

Anuvasana basti with oil prepared with drugs of Madhura (sweet) group, vaginal tampon of this oil, Unctuous gruels and meat-soup of wild animals up to the period of delivery

 

पंचामृत : ९ महीने नियमित रूप से प्रकृति व पाचनशक्ति के अनुसार पंचामृत ले |
पंचामृत बनाने की विधि : १ चम्मच ताजा दही, ७ चम्मच दूध, २ चम्मच शहद, १ चम्मच घी व १ चम्मच मिश्री को मिला लें | इसमें १ चुटकी केसर भी मिलाना हितावह है |
गुण : यह शारीरिक शक्ति, स्फूर्ति, स्मरणशक्ति व कांति को बढ़ाता है तथा ह्रदय, मस्तिष्क आदि अवयवों को पोषण देता है | यह तीनों दोषों को संतुलित करता है व गर्भिणी अवस्था में होनेवाली उलटी को कम करता है |


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वजन बढ़ाना है तो खाने में जरूर शामिल करें ये 10 चीजें

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वजन का कम या ज्यादा होना  परेशानी की बात है। कुछ लोग पतले होने के लिए बहुत उपाय करते हैं वर्कआउट,डायटिंग या दवाईया लेते हैं और कुछ लोग अपने दुबले होने की वजह से भी परेशान रहते हैं। आप भी अगर वजन कम होने के कारण परेशान हैं तो अपने खान-पान में और कुछ घरेलू उपायों की मदद से कुछ ही दिनों में अपना वजन बिना किसी साइड इफेक्ट के वजन बढा सकते हैं।

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1. डेयरी प्रोडक्ट

आपना वेट बढाने के लिए दूध,दही,पनीर,मक्खन और घी जैसी चीजे अपने खाने में शामिल करें।

 

2. अच्छी नींद लें 

आप अगर मोटा होना चाहते हैं तो आपको पर्याप्त नींद भी लेनी होगी ताकि बॉडी अच्छी तरह काम करें। भरपूर नींद लेने से वजन बढना शुरू हो जाएगा।

 

3.  बीन्स

आप वेजीटेरियन हैं और वजन बढाना चाहते हैं तो बीन्स इसके लिए बहुत मददगार है। इसमें कैलोरी बहुत ज्यादा होती है जो वेट बढाने का काम करती है।

 

4.  ड्राई फ्रूट

काजू , छुहारा , बादाम, किशमिश, अखरोट और पिस्ता सभी के 3-4 दानों को लेकर दूध में डालकर उबालें और दूध ठंडा होने पर इसे पी लें।

 

5.  केला

मोटा होने के लिए केला मददगार है। हर रोज 2 पके केले खाएं या फिर नाश्ते में दूध में केले मैश करके खाएं।

 

6. ब्राउन राइस

ब्राउन राइस में कार्बोहाइडरेट और फाइबर के गुण पाए जाते हैं। जो मोटा होने के लिए बहुत जरूरी हैं। अपने खाने में इनको जरूर शामिल करें।

 

7. पास्ता

पास्ता में फैट और  कार्बोहाइडरेट भरपूर मात्रा में होते हैं। इसे खा कर वेट बढ़ाया जा सकता है।

 

8. आलू

इसे खाने से फैट बढती है लेकिन इसका रोज-रोज सेवन नही करना चाहिए।

 

9. पानी

पानी पीने से शरीर में ऐनर्जी बनी रहती है। जिससे आप कसरत करने से भी थकते नहीं। डेड लिफ्ट,मिलिट्री प्रे,बेंच प्रेस जैसी एक्सरसाइज वजन बढाने के लिए लाभकारी है।

 


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डायटिंग के फायदे कम और नुकसान ज्यादा है, जानिए कैसे !

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शरीर में मोटापा घटाने या वजन कम करने के लिए डाइटिंग किया जाता है.

डायटिंग में लोग ऊर्जा युक्त पौष्टिक आहार लेना बंद कर देते है या भोजन ना कर भूखे रहना डायटिंग का सबसे आसान तारिका मानते है, लेकिन भोजन ना करके जो वजन कम करने का रास्ता अपनाया जाता है, वह हानिकारक होता. इस तरह के डायटिंग के नुकशान ज्यादा होते है.

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वास्तव डाइटिंग के फायदे कम और नुकसान ज्यादा होता है.

तो आइये जानते है क्या है डायटिंग के नुकशान –

डायटिंग के नुकशान –

1 – शारीरिक कमजोरी

डायटिंग से भोजन में अचानक गिरावट आ जाती है. शरीर को सही तरीके से काम करने के लिए जो पर्याप्त ऊर्जा चाहिए होता है, वह नहीं मिल पाती और इससे शारीरिक कमजोरी आने लगती है.

2 – अंगों की क्षतिग्रस्तता

आहार की पर्याप्त मात्रा से शरीर के सभी अंग और मासपेशियां स्वास्थ्य और सुचारू रूप से कार्य करती है, लेकिन जैसे ही डायटिंग शुरू करते है, तो शरीर में अचानक भोजन और तत्वों की कमी से अंगों में कमजोरी आने से क्षतिग्रस्त होने लगते है.

3 – पोषक तत्वों में कमी

डायटिंग में  दैनिक जीवन के आहार को बहुत कम कर दिया जाता है, जिससे भोजन में मिलने वाले पोषक तत्व शरीर में नहीं पहुँच पाते और सब्जी फल और खाद्य पदार्थो से शरीर को मिलने पोषक तत्वों में कमी आने लगती है.

4 – बाल झड़ना

डायटिंग से पोषक तत्वों में कमी आने और पर्याप्त प्रोटीन विटामिन ना मिलने से बालों की समस्या शुरू हो जाती और बाल अपने आप झड़ने लगते है. सिर पर गंजापन आने लगता है.

5 – धीमी शारीरिक प्रतिक्रिया

डायटिंग से शरीर में भोजन नहीं पहुँच पाता, जिसके कारण शरीर के अंगों में निष्क्रियता आने लगती है और शरीर की सारी  प्रक्रिया धीमी हो जाती है और ब्लड सर्कुलेशन धीमा हो जाता है. सोचने समझने की क्षमता कमजोर हो जाती है और मस्तिष्क भी ठीक से काम नहीं कर पाता. शरीर की आंतरिक क्रिया धीमी होने लगती है.

6 – जल असंतुलन

डायटिंग से शरीर में भोजन के साथ पानी की कमी भी होने लगती है. ज्यादातर भोजन करते रहने से शरीर अपने आप पानी की मांग करता है. जिससे हमे प्यास लगती है. लेकिन खाली पेट में ना तो ज्यादा प्यास लगती है और ना ही ज्यादा पानी पी पाते है. इससे शरीर में जल असंतुलन हो जाता है.

7 – रक्त संचार में कमी

हम जो भोजन करते है. वही तरल होकर रक्त रूप में शरीर में संचारित होता है लेकिन डायटिंग के कारण शरीर का रक्त संचार भी प्रभावित होता  है.

8 – भार बढ़ना

डायटिंग  के कारण अचानक से भोजन का स्तर कम हो जाता है और खाद्य पदार्थ नहीं मिलने से शरीर में चयापचय की दर धीमी हो जाती है. अचानक भोजन छोड़ने और करने से वजन कम हो की जगह बढ़ने लगता है.

9 – निस्तेज शरीर

पर्याप्त आहार ना मिलने से शरीर की खूबसूरती और ताजगी भी खत्म होने लगती है, जिससे शरीर कमजोर मुर्झाया और निस्तेज दिखाई देता है.

डिप्रेशन और चिडचिडापन

भोजन की सही मात्र शरीर में ना पहुँच पाने से, शरीर में कर्बोहाइड्रेट और चीनी की खपत नहीं हो पाती, जिससे  शरीर के अंदर सेरोटोनिन स्तर गिर जाता है और डिप्रेशन आने लागता है. यही हार्मोन ‘खुश’ हार्मोन होता है. शारीरिक कमजोरी और डिप्रेशन होने से दिमाग में अपने आप ही चिडचिडापन आने लगता है.

मोटापा कम करने के लिए डायटिंग अपनाया जाता है, जिसमे शरीर के आहार की बढ़ी हुई मात्र को अचानक कम करने की या रोकने की कोशिश की जाती है, जिसके कारण शरीर के आंतरिक व बाह्य अंगों को अचानक धक्का लगता है जिसके कारण डायटिंग के फायदे कम और डायटिंग के नुकसान ज्यादा हो जाते है.

डायटिंग के नुकशान को देखकर क्या आप डायटिंग करना पसंद करेंगे?


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