आखिर आयुर्वेद और वात, पित व कफ क्या है?

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आयुर्वेद क्या है ?

हिताहितं सुखं दुःखमायुस्तस्य हिताहितम्।

मानं च तच्च यत्रोक्तमायुर्वेदः स उच्यते॥

जिसमे आयु के हिताहित का ज्ञान और उसका योग मालूम हो उसको आयुर्वेद कहते है .

जिसमे आयु का हित- अहित, रोग का निदान और शमन हो , उसको लोग आयुर्वेद कहते है

आयुर्वेद की आवश्यकता ?

जो आयुर्वेद और धर्मशास्त्र की युक्तियो के अनुसार चलते है उनको रोग नहीं होते है और उनके पुण्य और आयु में वृधि होती है चिकित्सा करने से कही धन की प्राप्ति होती है तो कही मित्रता होती है कही कर्म होता है तो कही यश मिलता है. और कही किर्या करने से अभ्यास बढ़ता है किन्तु वेधक शिक्षा कभी व्यर्थ नहीं जाती है.

दोष क्या ?

है आयुर्वेद में तीन दोष होते है वात,पित्त और कफ. धातु और मल इन तीनो दोषों से दूषित होते है इसलिए इनको दोष कहते है यहाँ दोष को धारण करते है इसलिए इनको धातु भी कहते है महान आयुर्वेदाचार्य वाग्भट के अनुसार – वात ,पित्त और कफ दूषित होने से देह(Body) का नाश करते है तथा शुद्ध होने पर शरीर को धारण करते है.

वात के प्रकार और रहने व रहने के स्थान ?

  • उदान वायु –ये कंठ में रहती है.
  • प्राण वायु –ये दिल में में रहती है.
  • समान वायु – ये नाभि में रहती है.
  • अपान वायु – ये मलाशय में रहती है.
  • व्यान वायु –ये समस्त शरीर में व्याप्त रहती है .

पित के प्रकार और रहने व रहने के स्थान ?

  • पाचक पित्त – ये अमाशय में रहता है.
  • रंजक पित्त – ये लीवर में रहता है.
  •  साधक पित – ये दिल में रहता है.
  • आलोचक पित –ये आँखों में रहता है.
  • भ्राजक पित – ये सारे शरीर और आँखों में रहता है.

 

कफ के प्रकार और रहने व रहने के स्थान ?

  • क्लेदक काफ – ये पेट में रहता है.
  • अवलम्बक कफ – ये दिल में रहता है.
  • रसन कफ – ये कंठ में रहता है.
  • स्नेहन कफ ­– ये सिर में रहता है.
  • श्लेष्मक कफ – ये जोड़ो में रहता है.

 

धातु क्या है ?

  • रस
  • रक्त
  • मॉस
  • मेद
  • अस्थि
  • मज्जा
  • शुक्र ये सात धातुये होती है यहाँ मनुष्य के शरीर में स्वयं रहकर देह को धारण करती है,


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