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कब सोना चाहिए, कैसे सोना चाहिए और कितना सोना चाहिए

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कब सोना चाहिए और कितना सोना चाहिए, ये ऐसे सवाल हैं जिनमें हर कोई अपने जीवन में कभी न कभी उलझता ही है। नींद और आराम के बीच के अंतर को सद्‌गुरु ने हमें समझाया और यह भी बताया कि महत्वपूर्ण नींद की मात्रा नहीं, बल्कि उसकी गुणवत्ता है। सदगुरु बताते हैं कि योग का अभ्यास कैसे किसी व्यक्ति की आराम के दौरान हृदय गति को कम कर देता है:

रात को आप सोते हैं, यह तथ्य आपकी शाम और सुबह के बीच कुछ अंतर पैदा कर देता है। अगर रात में आप ठीक तरीके से आराम नहीं कर पाए तो आपकी सुबहें भी कष्टकारी होंगी। जो चीज अंतर पैदा कर रही है, वह नींद नहीं है, बल्कि आराम का स्तर और उसकी गुणवत्ता है। अच्छी सुबह का मतलब अच्छी शुरुआत होता है, लेकिन जैसे-जैसे दिन चढ़ता है, आप धीरे-धीरे धैर्य खोने लगते हैं और तनाव में आ जाते हैं। आपको यह समझने की जरूरत है कि यह तनाव आपके काम की वजह से नहीं है। हर किसी को लगता है कि उसके काम में बहुत तनाव है, लेकिन सच यह है कि तनाव किसी काम में नहीं होता। अपने सिस्टम को संभालने की यह आपकी अक्षमता ही है जो आपको तनावपूर्ण बनाती है।

आप अपने सिस्टम को तनावरहित कैसे बनाएं, ताकि सुबह और शाम हर वक्त आपके आराम का स्तर और उत्साह एक जैसा बना रहे?  चलिए, मेडिकल आधार पर बात करते हैं। अगर दोपहर का भोजन करने के ठीक बाद आप मेरी नब्ज देखेंगे तो यह 47 से 48 के आसपास होगी। अगर खाली पेट नब्ज देखी जाएगी तो वह 35 से 40 के बीच ही होगी। शारीरिक दृष्टि से इसका मतलब यह है कि मैं गहरी नींद की अवस्था में हूं। मैं इतना जागा हुआ हूं कि दुनिया में हर काम कर सकता हूं, लेकिन मेरा शरीर गहरी नींद में है। जब आप लगातार सो रहे हैं तो तनाव होने का सवाल ही नहीं उठता। जब कोई तनाव नहीं होता तो रात के 9 बजे हों या सुबह के 4, आपको कोई अंतर ही मालूम नहीं देगा।

कैसे सोना चाहिए?

तो सबसे जरूरी बात यह है कि आप अपने प्रणाली या सिस्टम को इस तरह का बनाएं कि यह अपने आप ही आराम की अवस्था में रहे और कोई भी काम या गतिविधि इस पर दबाव न बना सके। हो सकता है कि आप शारीरिक रूप से थक जाएं लेकिन आपको तनाव में आने की कोई जरूरत नहीं है। अपने सिस्टम को इस तरह का बनाना जरूरी है। कामकाज ज्यादा होने की वजह से आप अपने शरीर को धीमा नहीं कर सकते, लेकिन इतना आराम में आ जाना भी अच्छा नहीं है कि आप कोई काम ही न कर पाएं। इसके लिए पूरी एक तकनीक है, ऐसा संभव बनाने के लिए पूरा एक तरीका है। अगर आप योग की कुछ खास क्रियाओं को नियमित रूप से करने लगें तो तीन से चार महीने के अंदर आपकी नब्ज की संख्या में 8 से 20 की कमी हो सकती है। ऐसे में आपका शरीर ज्यादा प्रभावशाली तरीके से काम करने लगेगा और वह भी पूरे आराम के साथ।

आप सोने किस वक्त जाते हैं, यह आपके लाइफस्टाइल पर निर्भर करता है। महत्व इस बात का है कि आपको कितने घंटे की नींद की जरूरत है। अकसर कहा जाता है कि दिन में आठ घंटे की नींद लेनी ही चाहिए। आपके शरीर को जिस चीज की जरूरत है, वह नींद नहीं है, वह आराम है। अगर आप पूरे दिन अपने शरीर को आराम दें, अगर आपका काम, आपकी एक्सरसाइज सब कुछ आपके लिए एक आराम की तरह हैं तो अपने आप ही आपकी नींद के घंटे कम हो जाएंगे। लोग हर चीज तनाव में करना चाहते हैं। मैंने देखा है कि लोग पार्क में टहलते वक्त भी तनाव में होते हैं। अब इस तरह का व्यायाम तो आपको फायदे की बजाय नुकसान ही करेगा, क्योंकि आप हर चीज को इस तरह से ले रहे हैं जैसे कोई जंग लड़ रहे हों। आप आराम के साथ क्यों नहीं टहलते? चाहे टहलना हो या जॉगिंग, उसे पूरी मस्ती और आराम के साथ क्यों नहीं कर सकते?

जीवन के साथ जंग करना छोड़ दीजिए। खुद को स्वस्थ और सेहतमंद रखना कोई जंग नहीं है। कोई खेल खेलिए, तैरिए, टहलिए या वह कीजिए जो आपको पसंद है। अगर आपको चीज केक खाने के अलावा कुछ और करना पसंद ही नहीं है तो समझ लीजिए समस्या आने वाली है। नहीं तो किसी भी काम को करने के दौरान आराम में रहने में कोई समस्या नहीं है।

कितने घंटे सोना चाहिए?

तो सवाल घूमफिर कर वही आता है कि मेरे शरीर को कितनी नींद की जरूरत है। यह इस बात पर निर्भर है कि आप किस तरह का शारीरिक श्रम करते हैं। आपको न तो भोजन की मात्रा तय करने की जरूरत है और न ही नींद के घंटे। मुझे इतनी कैलरी ही लेनी है, मुझे इतने घंटे की नींद ही लेनी है, जीवन जीने के लिए ये सब बेकार की बातें हैं। आज आप जो शारीरिक श्रम कर रहे हैं, उसका स्तर कम है, तो आप कम खाएं। कल अगर आपको ज्यादा काम करना है तो आप ज्यादा खाएं। नींद के साथ भी ऐसा ही है। जिस वक्त आपके शरीर को पूरा आराम मिल जाएगा, यह उठ जाएगा चाहे सुबह के 3 बजे हों या 8। आपका शरीर अलार्म की घंटी बजने पर नहीं उठना चाहिए। एक बार अगर शरीर आराम कर ले तो उसे खुद ही जाग जाना चाहिए।

अगर शरीर बिस्तर को आरामगाह की तरह इस्तेमाल करना चाह रहा है तो वह बिस्तर से बाहर आना ही नहीं चाहेगा। अगर आपकी मानसिक अवस्था ऐसी है कि आप जीवन की घटनाओं से बचना चाहते हैं तो नींद एक अच्छा तरीका है। ऐसे में आप अपने आप ही ज्यादा खाने लगेंगे और ज्यादा सोएंगे भी।

नींद और भोजन

कुछ लोग ऐसी मानसिक अवस्था में होते हैं कि जब तक वे जमकर खा न लें और अपने शरीर को भारी न कर लें, उन्हें नींद ही नहीं आती। पाचन की प्रक्रिया होनी चाहिए और इसके लिए सोने से पहले आपको भरपूर समय जरूर देना चाहिए। मैं तो कहता हूं कि खाना खाने के दो घंटे के भीतर अगर आप सो गए तो जो खाना आपने खाया है, उसका 80 फीसदी हिस्सा बेकार चला जाएगा। अगर आपकी स्थिति ऐसी है कि बिना भरपेट खाए आपको नींद ही नहीं आती, तो आपको इस मामले में ध्यान देने की जरूरत है। यह नींद से जुड़ी बात नहीं है, यह एक खास किस्म की मानसिक अवस्था है। तो फिर वही सवाल, कितनी नींद? नींद उतनी ही, जितनी शरीर को जरूरत हो। भोजन और नींद, इन दोनों चीजों के बारे में फैसला लेने का हक अपने शरीर को दीजिए, खुद को नहीं, क्योंकि आप खुद इस बारे में सही फैसला ले ही नहीं सकते। भोजन और नींद के मामले में सबसे अच्छा तरीका यह है कि आप उस हिसाब से चलें, जो आपका शरीर चाहे। आखिर यह शरीर से संबंधित बात ही तो है।

यह भी पढ़ें : 

१. जानिए सोते समय किस दिशा में रखने चाहिए सिर व पैर और क्यों?

 २. सोने के बाद ऐसे उठें

 


Body Care

इन अासान तरीकोें से करें बवासीर को दूर

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बवासीर की बीमारी एक एेसा असहनीय दर्द है जो दो तरह का होता है अंदरूनी अौर बाहरी। अंदरूनी में नसों की सूजन नहीं दिखती लेकिन महसूस होती है अौर दूसरा बाहरी बवासीर में सूजन बाहर दिखती है। इस बीमारी का पता बड़ी ही अासानी से लग जाता है जैसे मलाशय में दर्द या जलन होना फिर इसके बाद रक्तस्राव, खुजली होना। इस बीमारी से छुटकारा पाने के लिए हम पता नहीं कितनी दवाईयों का सेवन करते लेकिन इनका ज्यादा कोई असर नहीं होता। अाप कुछ घरेलू तरीके अपनाकर भी इस इस समस्या से छुटकारा पा सकते है। आइए जानते है ये तरीके…
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1. फाइबर युक्त आहार
अगर अाप अपने पाचन को सही रखना चाहते है तो फाइबर युक्त अाहार का सेवन करें। खाने में साबुत अनाज, ताजे फल और हरी सब्जियों को अधिक शामिल करें।
2. छाछ
छाछ काफी हद तक बवासीर में फायदेमंद होता है। 2 लीटर छाछ में 50 ग्राम पिसा हुआ जीरा और स्‍वादानुसार नमक मिला लें और प्यास लगने पर इसी का सेवन करें।
3. दही 
रोजाना दही का सेवन करने से बवासीर होने की संभावना कम होती है अौर शरीर को फायदा मिलता है।
4. जीरा
जीरे को भूनकर मिश्री के साथ मिलाकर चूसने से फायदा मिलता है या आधा चम्‍मच जीरा पाऊडर एक गिलास पानी के साथ मिक्स करके पीएं।
5. अंजीर
सूखे अंजीर को लेकर रात भर के लिए गर्म पानी में भिगो दें और सुबह खाली पेट लें।  इसको खाने से फायदा होता है।
6. तिल
बवासीर को रोकने के लिए 10-12 ग्राम धुले हुए काले तिल को एक ग्राम मक्खन के साथ मिलाकर लेने से जल्द अाराम मिलता है।

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Dengue

इस तरह डेंगू से करें खुद का बचाव

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मच्छरों से फैलने वाले रोग डेंगू, मलेरिया होना अाम है लेकिन अाजकल डेंगू का रोग काफी वायरल हो रहा है। यह संक्रमित बीमारी मच्छरों के काटने से होती है जिसके बाद बुखार अाने लगते है। एेसे में हम कुछ सावधानियां बरत कर इस रोग से बच सकते है।  अाज हम अापको डेंगू के लक्षण,कारण अौर उपचार के बारे में बताएंगे जिनको फॉलो कर अाप अपने अाप को इस रोग से बचा सकते है।
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डेंगू के लक्षण
– शरीर के हिस्सों पर लाल रंग के निशान
– सिरदर्द
– तेज बुखार
– उल्टी अौर दस्त
– शरीर में दर्द
– कई बार नाक से खून निकलना
यह सब लक्षण मच्छर के काटने के 7-8 दिन बाद दिखाई देते है। कई बार यह काफी सामान्य लक्षण होते है जिसको हम नॉर्मल फ्लू समझते है। इन लक्षणों के होने पर तुरंत डॉक्टर के पास जाएं।
डेंगू होने के कारण 
– घरों के अास-पास जमा हुअा पानी
– संक्रमित पानी अौर खाना
डेंगू के उपचार के लिए कुछ जरूरी बातों का रखें ध्यान 
– इससे बचने के लिए अाराम करों अौर लिक्विड लेना चाहिए।
– अपने घर के अास-पास सफाई रखें।
– किसी भी जगह पर पानी खड़ा ना होने दें।
– मच्छरों का खात्मा करने के लिए दवाई छिड़के।
– पीने के पानी को हमेसा किसी चीज से ढक कर रखें।
– खून की कमी को पूरा करने वाले अाहार का सेवन करें।
डेंगू का रामबाण इलाज 
1. गिलोय
गिलोय बॉडी को इंफेक्शन से बचाने में मदद करत है। इसके तने को उबालकर हर्बल ड्रिंक की तरह पीने से डेंगू से छुटकारा मिलता है।
2. पपीते के पत्ते
पपीते के पत्तों का जूस बनाकर कर पीने से डेंगू अौर बॉडी से टॉक्सिन बाहर निकालने में मदद करते हैं।
3. मेथी के पत्ते
यह पत्तियां डेंगू के बुखार को कम करने के लिए सहायक हैं। मेथी की पत्तियों को पानी में मिलाकर उसका जूस पीएं। इसके अलावा, मेथी पाऊडर को भी पानी में मिलाकर पी सकते हैं।
4. गोल्डनसील
इस हर्ब का इस्तेमाल दवाई बनाने के लिए किया जाता है। इस हर्ब में डेंगू बुखार को बहुत तेजी से खत्म कर शरीर में से डेंगू के वायरस को खत्म करने की क्षमता होती है। इसका चूर्ण या जूस पीकर लाभ उठाया जा सकता है।
5. हल्दी
डेंगू बुखार होने पर हल्दी को दूध में मिलाकर पीने से अाराम मिलता है।

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Body Care

चिकनगुनिया को रखें खुद से दूर, जानिए कैसे ?

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मौसम बदलने के साथ साथ बहुत सारे वायरल रोग भी फैलते हैं। इन दिनों वायरल फीवर, खांसी-जुकाम की परेशानी आम सुनने को मिल रही हैं।  सबसे पहले तो बाहर के खाने से परहेज करें और साफ सुथरा स्वस्थ भोजन खाएं। इन दिनों चिकनगुनिया भी काफी तेजी से फैल रहा है। यह रोग ऐसे हैं जो संक्रमण और साफ सफाई ना होने की वजह से फैलते हैं। दिल्ली में तो चिकनगुनिया ने हड़कंप मचा रखा है।

चिकनगुनिया मच्छर के काटने से ही होता है जिससे रोगी बुखार खांसी, जुकाम से ग्रस्ति हो जाता है। इस रोग की गंभीर बात यह है कि इस रोग से बचने के लिए कोई टीका नहीं है। आमतौर पर चिकनगुनिया का मच्छर दिन में काटता है इसलिए दिन में भी मच्छर कॉयल जलाकर रखें।

चिकनगुनिया को रखें खुद से दूर, जानिए कैसे ?

चिकनगुनिया को रखें खुद से दूर, जानिए कैसे ?

लक्षण
– जोड़ों में दर्द
-100 डिग्री के आस-पास बुखार।
– शरीर पर लाल रंग के रैशेज बन जाते हैं।
– भूख नहीं लगती और थकान
– सिर में दर्द और खांसी-जुकाम

बचाव
– आस-पास साफ-सफाई का ध्यान रखें।
– मच्छरदानी का प्रयोग करें।
– खुद ही डॉक्टर बन दवाई ना खाएं। चेकअप जरूर करवाएं।
– खूब पानी पीजिए।
– बाहर का खाना ना खाएं
– खिड़की-दरवाजों को बंद रखें ताकि मच्छर घर में प्रवेश ना कर पाएं।
– पूरे ढके कपड़े पहनें।


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