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कमर दर्द के लिए लाभकारी योगासन

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कमर का दर्म कमर तोड़ देता है। कमर का दर्द असहनीय होता है। पीठ दर्द, कमर दर्द, सरवाइकल और कमर से जुड़ी अन्य समस्याएं आम हो गई है। डॉक्टर भी कहते हैं कि इसका सबसे अच्छा इलाज योग (Yoga for Back pain) ही है। आओ जानते हैं कि वह कौन से आसन हैं जिससे कमर का दर्द ठीक हो जाता है। ये चार आसन है- मकरासन, भुजंगासन, हलासन और अर्ध मत्येन्द्रासन।

1.मकरासन ( makarasana ) :makarasanaमकरासन की गिनती पेट के बल लेटकर किए जाने वाले आसनों में की जाती है। इस आसन की अंतिम अवस्था में हमारे शरीर की आकृति मगर की तरह प्रतीत होती है इसीलिए इसे मकरासन कहते हैं। मकरासन से जहां दमा और श्वांस संबंधी रोग समाप्त हो जाते हैं वहीं यह कमर दर्द में रामबाण औषधि है।

2.भुजंगासन ( bhujangasana ) : bhujangasanaभुजंगासन की गिनती भी पेट के बल लेटकर किए जाने वाले आसनों में की जाती है। इस आसन की अंतिम अवस्था में हमारे शरीर की आकृति फन उठाए सांप की तरह प्रतीत होती है इसीलिए इसे भुजंगासन कहते हैं।

3.हलासन ( halasana ) :

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दो आसन पेट के बल करने के बाद अब पीठ के बील किए जाने वाले आसनों में हलासन करें। हलासन करते वक्त शरीर की स्थित हल के समान हो जाती है इसीलिए इसे हलासन कहते हैं।

4.अर्ध-मत्स्येन्द्रासन ( ardha matsyendrasana ) : Ardha-Matsyendrasanaयह आसन सबसे महत्वपूर्ण है। कहते हैं कि मत्स्येन्द्रासन की रचना गोरखनाथ के गुरु स्वामी मत्स्येन्द्रनाथ ने की थी। वे इस आसन में ध्यानस्थ रहा करते थे। मत्स्येन्द्रासन की आधी क्रिया को लेकर ही अर्ध-मत्स्येन्द्रासन प्रचलित हुआ।


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रोजाना शीर्षासन करने से होते हैं ये 5 बड़े फायदे

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रोजाना शीर्षासन करने से होते हैं ये 5 बड़े फायदे

रोजाना शीर्षासन का अभ्यास आपको osteoporosis जैसी बीमारियों से दूर रखता है!

कई लोग सिर्फ इसलिये शीर्षासन नहीं करते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि वे इसे कर ही नहीं सकते हैं। लेकिन ऐसा नहीं है आप इसे थोड़े से प्रयासों के बाद आसानी से कर सकते हैं। इसे करने से हमें अनगिनत फायदे होते हैं। योगा एक्सपर्ट पूनम अग्रवाल बतातीं हैं कि शीर्षासन चाहे आप किसी दीवार के सहारे करें या बिना किसी सपोर्ट के करें, लेकिन इसे रोजाना करें। आइये जानते हैं इससे मिलने वाले फायदों के बारे में-

 

शरीर के ऊपरी हिस्सों को मजबूत बनाता है : शीर्षासन आपके शरीर के ऊपरी हिस्से को मजबूत बनाता है। शीर्षासन करने में आपको अपने कंधो, बाहों, और ऊपरी पीछे वाले हिस्से से बैलेंस बनाना पड़ता है, जिससे उनकी मजबूती बढ़ती जाती है। अगर आप अभी शीर्षासन करने की शुरुवात कर रहे हैं तो हो सकता है कुछ देर तक आप हिलते रहें, इसलिये लम्बे समय तक शीर्षासन करने के लिये आपको दीवार का सहारा लेना चाहिये।

संतुलन बढ़ाने में मददगार : आपके शरीर को मजबूत बनाने के अलावा, शीर्षासन आपके बैलेंस करने की क्षमता को भी बढ़ा देता है। बार-बार गिरने से जब आप खुद को बचाते हैं तो इससे आपकी बैलेंस की क्षमता का विकास होता है।

मूड को सही करता है: शीर्षासन करने से आपके मस्तिष्क में ब्लड फ्लो काफी बढ़ जाता है, जिससे आपको काफी शांति मिलती है और आपका तनाव दूर होता है। इस आसन को करने से कोर्टिसोल(cortisol) हार्मोन के बनने में काफी कमी आती है जिससे आपको एंग्जायटी जैसी समस्या से आराम मिलता है।

शक्ति प्रदान करता है: शीर्षासन करने से आपकी स्ट्रेंथ बढ़ जाती है और इससे आप मनचाहे एब्स भी पा सकते हैं। उलटी दिशा में खड़े होने के कारण यह आपके लोअर बैक और इनर थाई को और मजबूत बनाते हैं।

हड्डियों के स्वास्थ्य के लिये फायदेमंद: शीर्षासन करने से आपकी हड्डियां मजबूत होती हैं जिससे आप ओस्टियोपोरोसिस जैसी बीमारियों से दूर रहते हैं। इसलिये यंग एज में किया हुआ शीर्षासन आपको बुढ़ापे में ओस्टियोपोरोसिस से बचाने में मदद करता है।


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आपको किडनी की बीमारियों से दूर करेगा ये योग..

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किडनी को मजबूत बनाने वाले योग

किडनी शरीर के मुख्य अंगों में से एक है। शरीर में किडनी का काम है रक्त में से पानी और बेकार पदार्थों को अलग करना। इसके अलावा शरीर में रसायन पदार्थों का संतुलन, लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण में भी सहायता करता है। इसका एक और कार्य है विटामिन-डी का निर्माण करना, जो शरीर की हड्डियों को स्वस्थ और मजबूत बनाता है

लगातार दूषित पदार्थ खाने, दूषित जल पीने और नेफ्रॉन्स के टूटने से किडनी के रोग होते हैं। इस वजह से किडनी शरीर से व्यर्थ पदार्थो को निकालने में अक्षम हो जाते हैं। किडनी रोग का बहुत समय तक पता नहीं चलता, लेकिन जब भी कमर के पीछे दर्द उत्पन्न हो तो इसकी जांच करा लेनी चाहिए। आइए जानें योग के जरिए किडनी को कैसे मजबूत बनाया जा सकता है।

अंर्धचंद्रासन

इस आसन को करते वक्त शरीर की स्थिति अर्ध चंद्र के समान हो जाती है, इसीलिए इसे अर्ध चंद्रासन कहते है। इस आसन की स्थि‍ति त्रिकोण समान भी बनती है इससे इसे त्रिकोणासन भी कह सकते है, क्योंकि दोनों के करने में कोई खास अंतर नहीं होता। यह आसन खड़े होकर किया जाता है। इससे किडनी से जुड़ी सभी समस्याएं दूर हो जाती हैं।

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पश्चिमोत्तनासन
अपने पैर को सामने की ओर सीधी स्ट्रेच करके बैठ जाएं। दोनों पैर आपस में सटे होने चाहिए। पीठ को इस दौरान बिल्कुल सीधी रखें और फिर अपने हाथों से दोनों पैरों के अंगूठे को छूएं। ध्यान रखें कि आपका घुटना न मुड़े और अपने ललाट को नीचे घुटने की ओर झुकाएं। 5 सेकंड तक रुकें और फिर वापस अपनी पोजीशन में लौट आएं। यह पोजीशन किडनी की समस्या के साथ क्रैम्स आदि जैसी समस्याओं से निजात दिलाता है।

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उष्ट्रासन

उष्ट्रासन करते समय हमारे शरीर की आकृति कुछ-कुछ ऊँट के समान प्रतीत होती है, इसी कारण इसे उष्ट्रासन कहते हैं। यह आसन वज्रासन में बैठकर किया जाता है। इस आसन से घुटने, ब्लैडर, किडनी, छोटी आँत, लीवर, छाती, लंग्स एवं गर्दन तक का भाग एक साथ प्रभावित होता है, जिससे क‍ि यह अंग निरोगी बने रहते हैं।

source : stylecraze

 

सर्पासन

पेट के बल लेट जाएं और दोनों पैरों को मिलाकर रखें। ठुड्डी को जमीन पर रखें। दोनों हाथों को कोहनी से मोड़ें और हथेलियों को सिर के दाएं-बाएं रखें और हाथों को शरीर से सटाकर रखें। आपकी कोहनी जमीन को छूती हुई रहेगी। धीरे-धीरे सांस भरे और कंधे को ऊपर की ओर उठाएं शरीर का भार कोहनी और हाथों पर रहेगा। कोशिश करें कि छाती भी ऊपर की ओर रहे। इस स्थिति में कुछ पल रुकें और सांस को सामान्य कर लें। इस स्थिति में आप दो मिनट तक रुकें। अगर रोक पाना संभव न हो तो पाँच बार इस क्रिया को दोहराएं।

image source : healthwomen

 

किडनी को स्वस्थ रखने और इसकी समस्याओं को दूर करने के लिए नियमित योगा करना आपके लिए बहुत फायदेमंद हो सकता है।


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तोंद कम करने के 10 सरल उपाय

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अनियमित और मसालेदार भोजन के अलावा आरामपूर्ण जीवनशैली के चलते तोंद एक वैश्विक समस्या बन गई है जिसके चलते डायबिटीज और हार्टअटैक का खतरा बढ़ जाता है। तोंद कई अन्य रोगों को भी जन्म देती है। इसके चलते व्यक्ति हमेशा शरीर में अच्छा फिल नहीं कर पाता।

कमर और पेट के आसपास इकट्ठा हुई अतिरिक्त चर्बी से किडनी और मूत्राशय में भी दिक्कतें होना शुरू हो जाती हैं। रीढ़ की हड्डी पर भी अतिरिक्त दबाव पड़ता है और जिसके चलते आए दिन कमर दर्द और साइड दर्द होता रहता है। अगर आप तोंद से छुटकारा पाकर फिर से उसे पेट बनाने की सोच रहे हैं तो यहां दिए जा रहे हैं 10 ऐसे उपाय जिसे करने में आपको अतिरिक्त श्रम नहीं करना पड़ेगा। जरूरी नहीं कि सभी 10 उपाय आप आजमाएं। किसी भी एक उपाय को नियमित करें तो 1 माह में लाभ नजर आने लगेगा।

डाइट पर नियंत्रण : यह बहुत जरूरी है लेकिन कुछ लोगों के लिए यह बहुत कठिन टॉस्क है तो वे मानस‌िक उपाय करें। जब उनके सामने फैटी डाइट हो तो वे उससे होने वाले नुकसान के बारे में सोचें और अपनी तोंद को देंखे। ओवर इटिंग से बचना जरूरी है। कोई भी बहाना न बनाएं। खुद के साथ न्याय करें।

योगा टिप्स : प्रतिदिन अंग संचालन करें। सावधान की मुद्रा में खड़े रहकर दोनों हाथों की हथेलियों कोकमर पर रखें फिर कमर को क्लॉकवाइज और एंटी-क्लॉकवाइज 10-10 बार घुमाएं।

नौकासन करें : नियमित रूप से यह आसन न सिर्फ पेट की चर्बी कम करने में मददगार है बल्कि शरीर को लचीला बनाने से लेकर पाचन संबंधी समस्याओं में यह काफी फायदेमंद साबित हुआ है।

बादम का सेवन : रोज बादाम का सेवन आपका वजन घटा सकता है। पुरड्यू यूनिव‌र्सिटी के शोध की मानें तो बादाम में मौजूद विटामिन ई और मोनोसैचुरेटेड फैट्स न सिर्फ शरीर में मौजूद सैचुरेटेड फैट्स को कम करने में मदद करता है बल्कि ओवर डाइटिंग से भी बचाता है। रोज हल्के भुने बादाम का सेवन बेहतरीन नाश्ता है जिसे लेने के बाद दिनभर स्नैक्स खाने का मन नहीं करता है, वहीं यह शरीर में गुड कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाता है।

उत्तान पादासन : यह एक ऐसा योग है जिसको नियमित करने से तुरंत ही पेट अंदर होने लगता है, खासकर वह अपच, कब्ज, मोटापा, तोंद और अन्य पेट संबंधी बीमारियों से बचाता है।

तोलांगुलासन : वजन तौलते वक्त दोनों तराजू संतुलन में रहते हैं अर्थात तराजू का कांटा बीचोबीच रहता है। उसी तरह इस योगासन में भी शरीर का संपूर्ण भार नितंब पर आ जाता है और व्यक्ति की आकृति तराजू जैसी लगती है इसीलिए इसे तोलांगुलासन कहते हैं।

ऊर्जा चल मुद्रा योग : ऊर्जा चल मुद्रा योग : मोटापा एक समस्या है। इससे पेट, पीठ, कमरऔर कंधे की समस्या भी बनी रहती है। मोटापे को दूर करने के लिए हम सबसे आसान उपाय बता रहे हैं ऊर्जा चल मुद्रा योग। दरअसल यह अंग संचालन (सूक्ष्म व्यायाम) का हिस्सा है।

कुर्मासन : कुर्मासन : कुर्म का अर्थ होता है कछुआ। इस आसन को करते वक्त व्यक्ति की आकृति कछुए के समान बन जाती है इसीलिए इसे कुर्मासन कहते हैं।

भुजंगासन : इस आसन में शरीर की आकृति फन उठाए हुए भुजंग अर्थात सर्प जैसी बनती है इसीलिए इसको भुजंगासन या सर्पासन कहा जाता है। यह आसन पेट के बल लेटकर किया जाता है। यह आसन भी पेट की चर्बी को घटाने के लिए किया जाता है।

योगा एक्सरसाइज: यदि आपका पेट थुलथुल हो रहा है, कमर मोटी हो चली है या पीठ दुखती रहती है, तो योग की यह हल्की-फुल्की एक्सरसाइज स्टेप बाई स्टेप करें। ‍इस एक्सरसाइज का नियमित अभ्यास करते रहने से निश्चित रूप से जहां पेट फ्लैट हो जाएगा, वहीं कमर भी छरहरी हो जाएगी।


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